उत्तराखंड: हाईकोर्ट के आदेश को ताक पर रखकर किए 150 शिक्षकों के तबादले
- प्रदेश के चार जनपदों के मैदानी क्षेत्रों में नहीं किए जाने थे अनिवार्य तबादले
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उत्तराखंड में शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट का आदेश ताक पर रखकर 150 से शिक्षकों के तबादले कर दिए। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार पर्वतीय जनपदों के दुर्गम क्षेत्रों में 70 फीसदी शिक्षकों के पद न भरे जाने तक चार जनपदों ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून एवं नैनीताल के मैदानी क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले नहीं होने थे, लेकिन विभाग की ओर से वर्तमान शिक्षा सत्र में इन जनपदों के मैदानी क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले किए गए हैं।
यह हाल तब है, जबकि शिक्षा विभाग की ओर से तबादलों के लिए रिक्त पद दिखाए जाने के दौरान कहा गया था कि इन चार जनपदों के मैदानी क्षेत्रों के लिए शिक्षकों से विकल्प स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।
उच्च न्यायालय के 18 जून 2018 के पारित आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया कि दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षकों के 70 फीसदी पद न भरे जाने तक चार जनपदों के मैदानी क्षेत्रों के स्कूलों में गंभीर बीमार शिक्षकों को छोड़कर अन्य के अनिवार्य तबादले न किए जाए। इसके बाद भी इन जनपदों में शिक्षकों के तबादले कर दिए गए हैं।
विभाग की ओर से जो रिक्त पद दिखाए, उसमें लिखी थी यह बात
उच्च न्यायालय के पारित आदेश 18 जून 2018 एवं माडिफिकेशन एप्लीकेशन में पारित आदेश 10 मई 2019 के अनुपालन में उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम 2017 की धारा तीन डी के अतिरिक्त अन्य प्रवक्ताओं के ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून एवं नैनीताल के मैदानी क्षेत्र के विद्यालयों में तबादलों के लिए विकल्प स्वीकार्य नहीं किए जाएंगे।
प्रवक्ता और प्रिंसिपलों के इन चार जनपदों में तबादले नहीं किए गए, केवल उनके तबादले किए गए, जो गंभीर बीमार थे, लेकिन सहायक अध्यापक एलटी के तबादले किए गए हैं। एलटी के कुछ पर्वतीय जनपदों में 70 फीसदी पद भरे होने की वजह से ऐसा किया गया है।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक