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मुख्यमंत्री ने डाक्टरों को जेनेरिक दवाईयां लिखने के दिए निर्देश
Updated Sun, 28 Jan 2018 02:25 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
जन औषधि केंद्रों से मरीजों को दवाएं न मिलने और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के जेनेरिक के बजाय महंगी ब्रांडेड दवाइयां लिखे जाने की खबर शुक्रवार 26 जनवरी को अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को जेनेरिक दवाइयां लिखे जाने के निर्देश दिए हैं।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब आदमी की सुविधा को देखते हुए डॉक्टर ब्रांडेड के बजाय जेनेरिक दवाइयां लिखने का अभ्यास करें। डॉक्टर जेनेरिक दवाइयां लिखें ताकि आम जनता व निर्धन मरीजों को कम से कम खर्च पर अच्छा उपचार मिल सके। समारोह में विधायक खजान दास ने कहा कि दून मेडिकल कॉलेज की स्थिति ठीक नहीं है। जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के बाद भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। जिले का अपना कोई जिला अस्पताल नहीं है। जबकि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अलावा सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर से मरीज काफी संख्या में देहरादून आते हैं। ऐसे में मरीजों की समस्या को देखते हुए दून मेडिकल कॉलेज को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए या फिर कोरोनेशन व गांधी नेत्र चिकित्सालय में से किसी एक को जिला अस्पताल घोषित किया जाए।
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जन औषधि केंद्रों से मरीजों को दवाएं न मिलने और सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के जेनेरिक के बजाय महंगी ब्रांडेड दवाइयां लिखे जाने की खबर शुक्रवार 26 जनवरी को अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को जेनेरिक दवाइयां लिखे जाने के निर्देश दिए हैं।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब आदमी की सुविधा को देखते हुए डॉक्टर ब्रांडेड के बजाय जेनेरिक दवाइयां लिखने का अभ्यास करें। डॉक्टर जेनेरिक दवाइयां लिखें ताकि आम जनता व निर्धन मरीजों को कम से कम खर्च पर अच्छा उपचार मिल सके। समारोह में विधायक खजान दास ने कहा कि दून मेडिकल कॉलेज की स्थिति ठीक नहीं है। जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज बनाए जाने के बाद भी मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। जिले का अपना कोई जिला अस्पताल नहीं है। जबकि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के अलावा सहारनपुर, बिजनौर, मुजफ्फरनगर से मरीज काफी संख्या में देहरादून आते हैं। ऐसे में मरीजों की समस्या को देखते हुए दून मेडिकल कॉलेज को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए या फिर कोरोनेशन व गांधी नेत्र चिकित्सालय में से किसी एक को जिला अस्पताल घोषित किया जाए।
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