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वाटरप्रूफ रहेगी प्रदेश की पहली डबल लेन टनल
Updated Mon, 26 Mar 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
सहारनपुर रोड पर डाट काली मंदिर के पास 57 करोड़ रुपये से बन रही डबल लेन टनल प्रदेश की पहली वाटरप्रूफ टनल होगी। वर्तमान में जो टनल है, वह पहाड़ काटकर बनाई गई है। इससे बरसात में होने वाले पानी के रिसाव से टनल पर असर पड़ रहा है। इसे देखते हुए टनल बनाने में विशेष तकनीकि के इस्तेमाल के साथ लाइनिंग और बैक फीलिंग बीच प्लास्टिक शीट लगाई जाएगी। इससे बारिश के पानी के असर टनल के भीतरी हिस्से पर नहीं पड़ेगा। टनल कार्य पूरा करने का लक्ष्य नवंबर-2018 है।
सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार की ओर से ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रॉक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) के तहत भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी सहारनपुर रोड पर डाट काली मंदिर के पास 330 मीटर लंबी टनल बना रही है। इन दिनों टनल के लिए आरसीसी बेस बनाने का काम चल रहा है। जिसकी ऊंचाई एक मीटर है। इसके अलावा टनल के भीतर ही पैदल चलने वालों के लिए दोनों ओर फुटपाथ निर्माण भी हो रहा है। शटरिंग कार्य में हाईड्रोलिक प्रेशर का इस्तेमाल किया जाएगा। जिसका वजन 140 टन है। अमूमन इस तकनीकी का इस्तेमाल रेलवे लाइन बिछाने में किया जाता है। एनएच के अधिकारियों के मुताबिक उत्तराखंड में जो भी टनल हैं, वह 10 मीटर के हैं। पुरानी तकनीकि से बने टनल में बरसात के पानी को रोकने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए हैं। पहली बार प्रदेश में डबल लेन टनल बनाई जा रही है जो 330 मीटर लंबी है। इस टनल को बनाने में लाइनिंग और बैक फीलिंग बीच प्लास्टिक की मोटी शीट का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे बरसात के पानी का असर टनल के भीतरी तह तक नहीं आएगा। इससे टनल की मजबूती बरकरार रहेगी।
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लोगों को जाम से मिलेगी निजात
प्रदेश की पहली टनल बनने के बाद सहारनपुर, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जाने वाले यात्रियों को जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी। पुरानी टनल संकरी होने के चलते अभी यात्रियों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।
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टनल के भीतर शटरिंग का कार्य चल रहा है। इसके बाद लाइनिंग और बैक फीलिंग बीच प्लास्टिक शीट लगाई जाएगी। इससे पानी के रिसाव आदि का असर टनल के भीतरी भाग पर नहीं पड़ेगा। इससे टनल वर्षों तक टिकाऊ और मजबूत बनी रहेगी।
-डीसी नौटियाल, सहायक अभियंता, नेशनल हाईवे, रुड़की खंड
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सहारनपुर रोड पर डाट काली मंदिर के पास 57 करोड़ रुपये से बन रही डबल लेन टनल प्रदेश की पहली वाटरप्रूफ टनल होगी। वर्तमान में जो टनल है, वह पहाड़ काटकर बनाई गई है। इससे बरसात में होने वाले पानी के रिसाव से टनल पर असर पड़ रहा है। इसे देखते हुए टनल बनाने में विशेष तकनीकि के इस्तेमाल के साथ लाइनिंग और बैक फीलिंग बीच प्लास्टिक शीट लगाई जाएगी। इससे बारिश के पानी के असर टनल के भीतरी हिस्से पर नहीं पड़ेगा। टनल कार्य पूरा करने का लक्ष्य नवंबर-2018 है।
सड़क परिवहन मंत्रालय भारत सरकार की ओर से ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रॉक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) के तहत भारत कंस्ट्रक्शन कंपनी सहारनपुर रोड पर डाट काली मंदिर के पास 330 मीटर लंबी टनल बना रही है। इन दिनों टनल के लिए आरसीसी बेस बनाने का काम चल रहा है। जिसकी ऊंचाई एक मीटर है। इसके अलावा टनल के भीतर ही पैदल चलने वालों के लिए दोनों ओर फुटपाथ निर्माण भी हो रहा है। शटरिंग कार्य में हाईड्रोलिक प्रेशर का इस्तेमाल किया जाएगा। जिसका वजन 140 टन है। अमूमन इस तकनीकी का इस्तेमाल रेलवे लाइन बिछाने में किया जाता है। एनएच के अधिकारियों के मुताबिक उत्तराखंड में जो भी टनल हैं, वह 10 मीटर के हैं। पुरानी तकनीकि से बने टनल में बरसात के पानी को रोकने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए हैं। पहली बार प्रदेश में डबल लेन टनल बनाई जा रही है जो 330 मीटर लंबी है। इस टनल को बनाने में लाइनिंग और बैक फीलिंग बीच प्लास्टिक की मोटी शीट का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे बरसात के पानी का असर टनल के भीतरी तह तक नहीं आएगा। इससे टनल की मजबूती बरकरार रहेगी।
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लोगों को जाम से मिलेगी निजात
प्रदेश की पहली टनल बनने के बाद सहारनपुर, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जाने वाले यात्रियों को जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी। पुरानी टनल संकरी होने के चलते अभी यात्रियों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है।
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टनल के भीतर शटरिंग का कार्य चल रहा है। इसके बाद लाइनिंग और बैक फीलिंग बीच प्लास्टिक शीट लगाई जाएगी। इससे पानी के रिसाव आदि का असर टनल के भीतरी भाग पर नहीं पड़ेगा। इससे टनल वर्षों तक टिकाऊ और मजबूत बनी रहेगी।
-डीसी नौटियाल, सहायक अभियंता, नेशनल हाईवे, रुड़की खंड