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पेयजल कर्मचारियों का आंदोलन पांच से
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
पेयजल निगम, जल संस्थान के राजकीयकरण, नियमित रूप से वेतन और पेंशन का भुगतान करने की मांगों के समर्थन में पेयजल कर्मचारियों ने आंदोलन की रूपरेखा तय कर ली है। इसके तहत अधिकारी, कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के बैनर तले निगमकर्मी पांच फरवरी से 11 मार्च तक आंदोलन करेंगे। यह निर्णय सोमवार को अधिकारी, कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति की परेड ग्राउंड स्थित संघ भवन में हुई बैठक लिया गया।
समिति के अध्यक्ष इं. एके चतुर्वेदी और महामंत्री विजय खाली ने बताया कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि पेयजल निगम, जल संस्थान के राजकीयकरण जल्द कर लिया जाएगा, लेकिन लंबे समय के बाद भी मांग पूरा नहीं हो सकी है। इसके अलावा शासनादेश के बाद भी तीन महीने से वेतन और पेंशन नहीं मिल पा रही है। सातवें वेतनमान का शेष भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। इसके चलते आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है। आंदोलन से पहले 31 जनवरी को सामूहिक अवकाश और चार फरवरी को रैली निकाली जाएगी। मांगों के समर्थन में पांच फरवरी को प्रबंध निदेशक, छह को पेयजल सचिव, 21 को मुख्य सचिव, 27 को पेयजल मंत्री, छह मार्च को मुख्यमंत्री और 11 मार्च को राज्यपाल को ज्ञापन भेजा जाएगा। बैठक में प्रवीण सिंह रावत, योेगेंद्र सिंह, इं. सीता राम, इं. अजय बैलवाल, इं. जितेंद्र देव, इं. इमरान अहमद, आरके रोनिवाल, एलडी भट्ट, डीपी डंगवाल, कमल कुमार, पंकज मर्तोलिया, कुशाल सिंह राणा, इं. अरविंद सजवाण, इः एसपीएस देवड़ा, आरएस बिष्ट आदि मौजूद रहे।
उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर संघ समर्थन देगा
अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के आंदोलन को राज्य निगम कर्मचारी महासंघ भी समर्थन देगा। इस बाबत संघ भवन में महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष संतोष रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में सामूहिक अवकाश और आंदोलन के संबंध में चर्चा की गई। महासंघ के महासचिव सूर्य प्रकाश राणा कोटी ने पदाधिकारियों और सदस्यों से आंदोलन में प्रतिभाग करने की अपील की है। बैठक में गजेंद्र कपिल, प्रवीन रावत, रमेश बिंजोला, अशोक शर्मा, बाबा हरदेव सिंह, ललित शर्मा, रमेश नेगी, हरि सिंह, रविनंदन कुमार, बालेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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पेयजल निगम, जल संस्थान के राजकीयकरण, नियमित रूप से वेतन और पेंशन का भुगतान करने की मांगों के समर्थन में पेयजल कर्मचारियों ने आंदोलन की रूपरेखा तय कर ली है। इसके तहत अधिकारी, कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के बैनर तले निगमकर्मी पांच फरवरी से 11 मार्च तक आंदोलन करेंगे। यह निर्णय सोमवार को अधिकारी, कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति की परेड ग्राउंड स्थित संघ भवन में हुई बैठक लिया गया।
समिति के अध्यक्ष इं. एके चतुर्वेदी और महामंत्री विजय खाली ने बताया कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि पेयजल निगम, जल संस्थान के राजकीयकरण जल्द कर लिया जाएगा, लेकिन लंबे समय के बाद भी मांग पूरा नहीं हो सकी है। इसके अलावा शासनादेश के बाद भी तीन महीने से वेतन और पेंशन नहीं मिल पा रही है। सातवें वेतनमान का शेष भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। इसके चलते आंदोलन करने का निर्णय लिया गया है। आंदोलन से पहले 31 जनवरी को सामूहिक अवकाश और चार फरवरी को रैली निकाली जाएगी। मांगों के समर्थन में पांच फरवरी को प्रबंध निदेशक, छह को पेयजल सचिव, 21 को मुख्य सचिव, 27 को पेयजल मंत्री, छह मार्च को मुख्यमंत्री और 11 मार्च को राज्यपाल को ज्ञापन भेजा जाएगा। बैठक में प्रवीण सिंह रावत, योेगेंद्र सिंह, इं. सीता राम, इं. अजय बैलवाल, इं. जितेंद्र देव, इं. इमरान अहमद, आरके रोनिवाल, एलडी भट्ट, डीपी डंगवाल, कमल कुमार, पंकज मर्तोलिया, कुशाल सिंह राणा, इं. अरविंद सजवाण, इः एसपीएस देवड़ा, आरएस बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर संघ समर्थन देगा
अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के आंदोलन को राज्य निगम कर्मचारी महासंघ भी समर्थन देगा। इस बाबत संघ भवन में महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष संतोष रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में सामूहिक अवकाश और आंदोलन के संबंध में चर्चा की गई। महासंघ के महासचिव सूर्य प्रकाश राणा कोटी ने पदाधिकारियों और सदस्यों से आंदोलन में प्रतिभाग करने की अपील की है। बैठक में गजेंद्र कपिल, प्रवीन रावत, रमेश बिंजोला, अशोक शर्मा, बाबा हरदेव सिंह, ललित शर्मा, रमेश नेगी, हरि सिंह, रविनंदन कुमार, बालेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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