हजारों तीर्थयात्रियों को पड़े खाने के लाले
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दैवी आपदा के कारण प्रशासन ने फिलहाल स्थिति सामान्य होने तक चारधाम यात्रा रोक दी है। जिससे तीर्थनगरी में लगभग आठ हजार तीर्थयात्री फंस गए हैं। स्थिति यह कि यात्रियों के पास पैसा और राशन खत्म हो रहा है। ऐसे में वह तय नहीं कर पा रहे हैं कि यात्रा के लिए रुकें या फिर वापस घर लौट जाएं।
तीर्थनगरी की धर्मशालाओं और आश्रमों में पंजाब, हिमाचल, यूपी, मध्यप्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, नेपाल आदि क्षेत्रों के तीर्थयात्री डेरा डाले हैं। धर्मशालाओं में ठहरे तीर्थयात्रियों ने बताया कि वे खुद ही भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा। तीर्थयात्री जानकी प्रसाद शुक्ल, राम गोपाल, संसार दूबे, त्रिपुरारी लाल मिश्रा ने बताया कि धर्मशाला में ठहरने के लिए जगह नहीं है।
लिहाजा जमीन पर लेटकर समय काट रहे हैं। यात्रा खुलने के बारे में भी पुष्ट जानकारी नहीं मिल रही। यात्रा पर निकलने से पहले घर से जो पैसे और राशन लेकर चले थे, व खत्म हो रहा है।
आपदा पीड़ितों की मदद को उठे हाथ
जीएमवीएन और टीजीएमओ संस्था ने चारधाम यात्रा मार्गों पर फंसे यात्रियों की मदद के लिए राहत सामग्री भेजी है। मंगलवार को जीएमवीएन की ओर से प्रथम चरण में पांच हजार खाने के पैकेट और सौ कंबल भेजे गए। निगम अधिकारियों ने बताया कि राहत और बचाव कार्य जौलीग्रांट एयरपोर्ट से संचालित किए जा रहे हैं।
दो ट्रक खाद्य सामग्री भेजी
उधर, मंगलवार को टिहरी गढ़वाल मोटर आनर्स कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा चारधाम यात्रा मार्ग पर फंसे यात्रियों के लिए दो ट्रक खाद्य सामग्री भेजी। संस्था अध्यक्ष विजयपाल सिंह धनै ने बताया कि राहत सामग्री के साथ संस्था की एक टीम भी रवाना की गई है। जो रास्ते में फंसे यात्रियों को सामग्री वितरित करते हुए आगे बढ़ेगी। इस मौके पर विक्रम सिंह गुसाईं, कुशाल सिंह रावत, जगमोहन चौहान, यशपाल धनै, प्रेम सिंह चौहान, विजय कुड़ियाल आदि थे।