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बेटियों की आवाज सुनने के लिए किए 30 लाख कुर्बान
देहरादून/निर्मला सुयाल
Updated Thu, 13 Jun 2013 05:14 PM IST
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बेटियों का कोख में ही कत्ल कर देने वालों के लिए गिरी दंपति मिसाल हैं। ईंश्वर ने उन्हें दो बेटियां तो दीं, लेकिन बोलने-सुनने की क्षमता से महरूम रखा। अपनी फूल सी बच्चियों की आवाज सुनने की चाह में डा. दिलीप गिरी और ममता गिरी ने कोई दर नहीं छोड़ा।
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एक डाक्टर ने बोलने-सुनने की समस्या दूर करने की बात कह रोशनी की किरण दिखाई तो चेहरे पर मुस्कान फैल गई, लेकिन खर्च सुन जल्द ही यह मुस्कान गुम भी हो गई। खर्च था तकरीबन 30 लाख। इतने रुपये जुटाना टेढ़ी खीर था। लेकिन, गिरी दंपति ने हौसला नहीं छोड़ा।
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परिचितों से किसी तरह 10 लाख रुपये एकत्र हुए, लेकिन मंजिल दूर थी। आखिर एक निजी बैंक से 20 लाख का लोन ले लिया। डाक्टर ने इलाज शुरू कर दिया। तीन साल की बेहिसाब कोशिशों के बाद आखिर वह दिन आया, जब डा. दिलीप और ममता को अपनी बच्चियों 12 साल शुभाश्री और छह साल की सुजाता की आवाज सुनने को मिली। आज दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं।
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...पर इम्तेहान और भी
एक निजी संस्थान में व्याख्याता की नौकरी करते हुए डा. दिलीप गिरी के लिए यह कर्ज उतरना बेहद मुश्किल था, लिहाजा उन्हें नौकरी बदलनी पड़ी। घर-परिवार से दूर हो गए। आज अलीगढ़ में मंगलायतन विश्वविद्यालय में कार्य कर रहे हैं, पर संतोष है कि बच्चियां ठीक हो गईं।
यूं दिखी रोशनी की किरण
ममता के अनुसार एक दिन छोटी बेटी के कान में दिक्कत हुई तो ईएनटी स्पेशलिस्ट डा. डीएम काला के पास गए। डा. काला ने उम्मीद का दिया जलाते हुए उन्हें दिल्ली रेफर किया। वहां सीटी स्कैन, एमआरआई और ब्रेन स्कैन हुआ। पाजिटिव रिपोर्ट के बाद सर गंगाराम अस्पताल के ईएनटी सर्जन डा. लाहिरी ने दून आकर यह आपरेशन किया।
पेंटिंग और डांस का शौक
शुभाश्री और सुजाता दोनों अब नॉर्मल बच्चों के स्कूल में पढ़ती हैं। शुभाश्री कक्षा दो, जबकि सुजाता कक्षा एक में पढ़ रही है। पढ़ाई में तो दोनों बेहतर हैं ही, पेंटिंग और डांस का भी शौक फरमाती हैं। बड़ी शुभाश्री क्लासिकल डांस के लिए सराहना भी पा चुकी है।