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‘कागजी’ पौधों को मिली पैसों की ‘खाद’
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 23 Feb 2013 01:43 PM IST
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पैसा पेड़ पर नहीं उगता और पेड़ जमीन पर उगते हैं, ये दोनों बातें बाकी दुनिया के लिए भले सच हों लेकिन राजाजी पार्क पर लागू नहीं होतीं। यहां पेड़ जमीन पर नहीं कागजों में उगते हैं, उन्हें पैसों की ‘खाद’ दी जाती है और फिर इन पेड़ों पर ‘उगे’ पैसों की बंदरबांट भी होती है।
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चौंकिए नहीं, सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी यही इशारा कर रही है। मामला पार्क क्षेत्रांतर्गत चीला-मोतीचूर कॉरिडोर बनाने का है। हाथियों की सुगम आवाजाही के नाम पर पार्क प्रशासन ने कुछ वर्ष पूर्व योजना तैयार की। कॉरिडोर बनाने के बाद यहां पौधे लगाए जाने थे।
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केंद्रीय योजना आयोग को प्रस्ताव मिला तो ढाई करोड़ का बजट भी पार्क प्रशासन को जारी कर दिया गया। यही नहीं, इसमें से एक करोड़ रुपये की रकम वर्ष 2002 से 2007 तक पौधे लगाने के नाम पर खर्च की जा चुकी है। खांड गांव के प्रधान बेताल सिंह की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में पार्क प्रशासन ने यह बातें बताई हैं।
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हैरत की बात यह है कि कॉरिडोर बनाने के लिए पार्क क्षेत्र स्थित खांड गांव और रायवाला स्थित सेना के आयुध डिपो का विस्थापन किया जाना था। विस्थापन के बाद खाली होने वाली भूमि पर कॉरिडोर बनाकर इसके दोनों ओर पौधरोपण होना था। लेकिन गांव अब भी आबाद है, जबकि आयुध डिपो अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिला। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि पार्क प्रशासन ने पौधे लगाए तो कहां?
पिछले दस साल के भीतर खांड गांव में एक भी पौधा नहीं लगाया गया। यह एक बड़ा घोटाला है, जिसकी जांच शासन और विभाग को करानी चाहिए।
- बेताल सिंह नेगी, ग्राम प्रधान खांड गांव
कॉरिडोर में लंबे समय से काम कर रहा हूं। राजाजी पार्क ने कोई पौधरोपण नहीं किया। सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराए कागजात अनियमितता का इशारा करते हैं। जांच होनी चाहिए।
- दिनेश पांडे, फील्ड आफिसर, वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया
यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है। अब जानकारी मिली है। ऐसा हुआ है तो पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी।
-एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव/ मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक