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जिंदगी पर भारी पड़ रही बंद सड़कें
देहरादून/मनमीत रावत
Updated Fri, 21 Jun 2013 12:35 PM IST
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आपदा न केवल धन जन की अपार हानि कर गई, बल्कि उसका असर यह हुआ है कि अब लोग साधारण बीमारियों के इलाज के लिए भी जूझ रहे हैं। पुल बहने और रास्ते ब्लाक होने की वजह से शुगर जैसी तकलीफ भी मरीजों को बड़ा दर्द दे रही है।
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प्रतानगर स्थित बनाली गांव के ग्राम प्रधान उत्तम सिंह रावत यह दर्द झेल रहे हैं।
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डायबिटीज के अत्यधिक बढ़ जाने से उत्तम सिंह रावत घर में बेहोश हो गए। घर में कोई देखने वाला भी नहीं था। तकरीबन दो घंटे बाद गांव के कुछ लोग उनके घर किसी काम से पहुंचे तो उन्हें तुरंत एक निजी वाहन बुककर नई टिहरी जिला अस्पताल ले गए। स्थिति बिगड़ती देख वहां से डाक्टरों ने उन्हें देहरादून रेफर कर दिया, लेकिन भारी बारिश के कारण दो दिन तक रोड ब्लॉक थी।
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गंभीर बीमारियों से जूझ रहे
रावत को टिहरी में ही जीवन और मौत से संघर्ष करना पड़ा। रावत केवल बानगी भर हैं। यह हाल तो दून अस्पताल में उपचार करा रहे राजेंद्र गैरोला, कुसुमलता नौटियाल और दुर्गा प्रसाद का भी है और इनकी तरह पहाड़ के न जाने कितने बाशिंदे परेशान हैं। आपदा आते ही सबसे पहले गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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गुरुवार को दून अस्पताल में उत्तरकाशी और टिहरी जिले से कई ऐसे पीड़ित पहुंचे जो कई दिन तक घरों में ही तड़पते रहे। रास्ता ब्लॉक होने से उन्हें घर में ही मौत से जूझना पड़ा। लंबगांव (टिहरी) के पास स्थित पिपलोगी गांव के महेंद्र सिंह बिष्ट दून में अपनी मां को लेकर आए थे। मां को दिल का दौरा पड़ा था। लंबगांव में ही डाक्टरों ने दून के लिए रेफर कर दिया था। बावजूद इसके रास्ता ब्लॉक होने से दो दिन घर में ही तड़पना पड़ा।
मां की जान बच गई
महेंद्र बताते हैं हम तो खुशकिस्मत थे कि मां की जान बच गई। लेकिन पता नहीं कितने ही अभागे इलाज के अभाव में मर गए होंगे। बेटी का गर्भपात होने के बाद डाक्टर ने दून महिला अस्पताल में दिखाने की सलाह दी। घनसाली के पोखरी गांव से उसे टिहरी तक तो लाया गया। लेकिन उसके आगे ले जाने में चार दिन लगे।
ऐसे ही कई लोग दून अस्पताल में आए थे। जिनके चहरे पर कई दिनों की थकान और डर साफ झलक रहा था। पहाड़ के उन क्षेत्रों में जहां सड़क ब्लॉक है, वहां पर दवाइयां भेजी गई हैं। स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के डाक्टरों को भी जरूरी दिशा निर्देश वरिष्ठों की ओर से दिया जा रहा है।
- डा. एएस असवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक दून अस्पताल