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आपदा की मार के बाद दो माह से बसों के पहिए जाम
Dehradun
Updated Mon, 19 Aug 2013 05:36 AM IST
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ऋषिकेश। चारधाम यात्रा के दौरान जिन बसों में सफर के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ता था, आपदा के बाद से वही बसें संयुक्त रोटेशन यात्रा बस टर्मिनल कंपाउंड में दो महीने से खड़ी हैं। इससे वाहन स्वामियों, चालक और परिचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, उनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
प्रदेश में 16 और 17 जून को विनाशकारी आपदा से क्षतिग्रस्त हुए यात्रा मार्गों के कारण सैकड़ों वाहनों के पहिये जाम हैं। स्थिति यह है कि आपदा के दो माह बाद भी अवरुद्ध हुए विभिन्न पर्वतीय रूटों पर आवागमन बहाल नहीं हो पाया है। ऐसे में तीर्थनगरी के चारधाम यात्रा बस टर्मिनल कंपाउंड में अकेले टीजीएमओ की करीब 250 बसें खड़ी हैं।
टीजीएमओ सचिव हिम्मत सिंह रावत ने बताया कि यात्रा के साथ ही लोकल रूटों पर भी आवाजाही बंद होने से भारी नुकसान हो रहा है। इसी प्रकार यातायात कंपनी और संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति की क्रमश: दो सौ और 150 बसें दो महीने से टर्मिनल कंपाउंड में खड़ी हैं। ज्वाइंट रोटेशन के कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर राय ने बताया कि यात्रा काल के दौरान महीने भर में एक बस से करीब पौने दो लाख रुपये की अर्निंग होती है। ऐसे में यात्रा और लोकल रूटों के बंद होने से सैकड़ों बसों के खड़े होने से परिवहन कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। इससे मोटर मालिक, चालक- परिचालकों और कंपनियों के कर्मचारियों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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प्रदेश में 16 और 17 जून को विनाशकारी आपदा से क्षतिग्रस्त हुए यात्रा मार्गों के कारण सैकड़ों वाहनों के पहिये जाम हैं। स्थिति यह है कि आपदा के दो माह बाद भी अवरुद्ध हुए विभिन्न पर्वतीय रूटों पर आवागमन बहाल नहीं हो पाया है। ऐसे में तीर्थनगरी के चारधाम यात्रा बस टर्मिनल कंपाउंड में अकेले टीजीएमओ की करीब 250 बसें खड़ी हैं।
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टीजीएमओ सचिव हिम्मत सिंह रावत ने बताया कि यात्रा के साथ ही लोकल रूटों पर भी आवाजाही बंद होने से भारी नुकसान हो रहा है। इसी प्रकार यातायात कंपनी और संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति की क्रमश: दो सौ और 150 बसें दो महीने से टर्मिनल कंपाउंड में खड़ी हैं। ज्वाइंट रोटेशन के कार्यकारी अध्यक्ष सुधीर राय ने बताया कि यात्रा काल के दौरान महीने भर में एक बस से करीब पौने दो लाख रुपये की अर्निंग होती है। ऐसे में यात्रा और लोकल रूटों के बंद होने से सैकड़ों बसों के खड़े होने से परिवहन कंपनियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। इससे मोटर मालिक, चालक- परिचालकों और कंपनियों के कर्मचारियों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।
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