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हर्बल गार्डन में थमेगी हाथियों की धमाचौकड़ी

Sat, 15 Jun 2013 11:40 AM IST
ऋषिकेश/ब्यूरो
ऋषिकेश/ब्यूरो Updated Sat, 15 Jun 2013 11:40 AM IST
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elephants will ban in herbal gardens
तीर्थनगरी में स्थापित हर्बल गार्डन में हाथी की आमद रोकने के लिए वनविभाग नया प्रयोग करने जा रहा है। इसके लिए गार्डन के तीनों ओर खाई खोदी जा रही है, जबकि एक ओर से सुरक्षा के लिए लोहे के पांटूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर योजना साकार हुई तो हर्बल गार्डन में हाथी की धमाचौकड़ी पर रोक लग सकेगी और जड़ी-बूटियों की सुरक्षा की जा सकेगी।
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हाथी की धमाचौकड़ी आम है

गंगोत्री राजमार्ग पर हाथी बाहुल्य भद्रकाली क्षेत्र में स्थापित डा. सुशीला तिवारी हर्बल गार्डन में हाथी की धमाचौकड़ी आम हो गई है। हाथी कई बार लाखों की लागत से बने गार्डन को नुकसान पहुंचा चुका है। आए दिन चहारदीवारी तोड़ने, और गार्डन में लगी जड़ी बूटी की क्यारियों को रौंदने से यह योजना अपने उद्देश्यों पर खरी नहीं उतर पा रही है। ऐसे में नरेंद्रनगर वन प्रभाग ने गार्डन की सुरक्षा के लिए नई योजना तैयार की है।
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कुंभ मेले के समय मुनिकीरेती में गंगा पर बनने वाले अस्थायी पांटून ब्रिज में इस्तेमाल किए जाने वाले लोहे के पांटून गार्डन के आसपास वन विभाग की भूमि पर सालों से पड़े हैं। विभाग ने पीडब्लूडी नरेंद्रनगर डिवीजन से अनुमति लेकर जंगल में बेकार पड़े करीब 45 पांटूनों का इस्तेमाल हर्बल गार्डन की सुरक्षा के लिए करने का निर्णय लिया है, जिन्हें हाथी की रोकथाम के लिए दीवार के सहारे लगाया जा रहा है।
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विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भारी भरकम पांटून्स को हाथी टाप नहीं पाएगा, लिहाजा उसकी आमद रुकने पर गार्डन को विकसित करने के लिए प्रस्तावित योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

यह है बहुद्देशीय योजना

वन प्रभाग की ओर से गार्डन को विकसित करने की योजना सालभर से लंबित है। इसके तहत गार्डन का सुंदरीकरण, क्यारी में विभिन्न औषधीय पादपों का रोपण, ऑडिटोरियल निर्माण कर एलसीडी प्रोजेक्टर के जरिए हर्बल और वन्य जंतुओं की जानकारी देना और गार्डन में आने वाले लोगों को राफ्टिंग और कैंपिंग पैकेज से जोड़ना है।


क्या कहते हैं अधिकारी
गार्डन के विकास में बाधक बन रहे हाथी की रोकथाम के लिए सुरक्षा कारणों से पांटून का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे हाथी की आमद पर अंकुश लगने की उम्मीद है। इसके बाद गार्डन को विकसित करने के लिए स्वीकृत हो चुकी बहुद्देशीय योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।
-डा. विनय कुमार भार्गव, डीएफओ, नरेंद्रनगर वन प्रभाग
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