हिम तेंदुए की खाल का कौन था खरीददार

Dehradun Updated Fri, 07 Dec 2012 05:30 AM IST
देहरादून। हिम तेंदुए की खाल का खरीददार कौन था। माल की डिलेवरी कौन लेने वाला था। अफसरों के पास 24 घंटे बाद भी इन सवालों के जवाब नहीं है। उनकी निगाहें भी जांच पर टिकी हुई है।
पिछले कुल साल से प्रदेश में बाघ और गुलदार की खाल की कृत्रिम मांग की जा रही थी। इसके कारण वन्यजीवों का शिकार किया जा रहा था। इसमें कुछ एनजीओ की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी। इसका खुलासा ‘अमर उजाला’ ने किया था। इसके बाद पिछले तीन माह से शिकार की घटनाएं काफी कम हो गई थी। लेकिन, बुधवार को एसटीएफ ने हिम तेंदुए की जिस खाल को बरामद किया है, वह ताजी बताई जा रही है। इससे शक हो रहा है कि किसी न किसी स्तर पर पहले हिम तेंदुए की खाल की कृत्रिम मांग पैदा की गई। इसके बाद सूचना को किसी न किसी तरह एसटीएफ को लीक किया गया। इसके बाद एसटीएफ ने एक व्यक्ति को रंगे हाथ खाल के साथ पकड़ा है। जानकारों का कहना है कि जब तक खाल के खरीददार के बारे में एसटीएफ को पता नहीं चलता तब तक असली कातिल तक पहुंचना मुश्किल होगा।

खाल का खरीददार कौन था। इसके बारे में अभी तक एसटीएफ को कोई जानकारी नहीं है। मुख्य आरोपी की धरपकड़ को कोशिश की जा रही है। इसके बाद ही कुछ कहना संभव होगा। -- सेंथिल ए कृष्णराज, एसएसपी एसटीएफ

नंदा देवी के अधिकारियों ने भी शुरू की जांच
हिम तेंदुए के शिकार की घटना की नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व के अधिकारियों ने भी अपने स्तर पर जांच शुरू कर दी है। रिजर्व के निदेशक वीके गांगटे ने बताया कि डीएफए के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया है, जोकि एसटीएफ की ओर से उपलब्ध कराई सूचना के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। जांच के दौरान इस तथ्य को खंगाला जाएगा कि किसने हिम तेंदुए की खाल की मांग की। किसके कहने पर हिम तेंदुए का शिकार किया गया।

कपाट बंद होते ही सक्रिय हो जाते हैं शिकारी
चार धाम यात्रा बंद होते ही शिकारी सक्रिय हो जाते हैं। मंदिरों के कपाट बंद होने के बाद बर्फबारी को देखते हुए कर्मचारी और अधिकारी भी नीचे चले आते हैं। इसी का फायदा उठाकर शिकारी अपने काम को अंजाम तक पहुंचाने में सफल हो जाते हैं।

फोटोग्राफ से खाल का कराया जाएगा मैच
जिस हिम तेंदुए की खाल को एसटीएफ ने बरामद किया है। उस खाल और नंदा नेवी बायोस्फियर रिजर्व की ओर लिए गए फोटोग्राफ का मिलान भारतीय वन्यजीव संस्थान में कराया जाएगा। इससे यह अंदाजा लग सके कि पिछले दो से तीन सालों के भीतर कैमरे में कैद किये गए हिम तेंदुए का शिकार हुआ है या फिर किसी और का। निदेशक बीके गांगटे ने बताया कि इसको लेकर एसटीएफ को पत्र भेजा जाएगा।
प्रोजेक्ट हिम तेंदुए पर बनी थी सहमति
उत्तराखंड में प्रोजेक्ट हिम तेंदुआ शुरू करने को लेकर 28 जुलाई 2012 को स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में सहमति बनी थी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से यह प्रस्ताव किया गया था।

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