{"_id":"5b65dd2f4f1c1b572f8b833d","slug":"death-of-siblings-from-malnutrition","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कुपोषण से भाई-बहन की मौत, भोजन के अभाव से जूझते बच्चे झेल नहीं सके डायरिया की मार"}
कुपोषण से भाई-बहन की मौत, भोजन के अभाव से जूझते बच्चे झेल नहीं सके डायरिया की मार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 04 Aug 2018 10:36 PM IST
विज्ञापन
डेमो पिक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली में भूख से बच्चों की मौत का दहलाने वाला घटनाक्रम अभी लोग भूल नहीं पाए कि यूपी के कन्नौज जिले में जलालाबाद केअनौगी ग्राम पंचायत के एक परिवार में दो बच्चों की जिंदगी कुपोषण की भेंट चढ़ने का मामला सामने आया है। कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों में शुमार भाई-बहन की मौत की तात्कालिक वजह डायरिया बनी। गरीबी के कारण एक वक्त खाना बनना और दिन में बने चावल को रात में खाना डायरिया के संक्रमण का कारण माना जा रहा है।
चौबीस घंटे के भीतर दो बच्चों की मौत का सामना किया मजरा बदलेपुरवा निवासी मजदूर हरिराम कोरी के परिवार ने। चार संतानों में शामिल छह साल के बेटे शिवशंकर की गुरुवार देर रात मौत हो गई तो शुक्रवार रात 18 महीने की बेटी कंचन की सांसें भी थम गईं। दोनों की हालत उल्टी-दस्त से बिगड़ी थी। देखते-देखते दो बच्चों की जान जाने पर ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह बघेल ने सूचना अफसरों को दी तो जलालाबाद सीएचसी से लेकर जिले के अफसरों तक हड़कंप मच गया। बताया गया कि कुपोषित बच्चों में शामिल कंचन बदलेपुरवा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की देखरेख में थी।
विज्ञापन
चौबीस घंटे के भीतर दो बच्चों की मौत का सामना किया मजरा बदलेपुरवा निवासी मजदूर हरिराम कोरी के परिवार ने। चार संतानों में शामिल छह साल के बेटे शिवशंकर की गुरुवार देर रात मौत हो गई तो शुक्रवार रात 18 महीने की बेटी कंचन की सांसें भी थम गईं। दोनों की हालत उल्टी-दस्त से बिगड़ी थी। देखते-देखते दो बच्चों की जान जाने पर ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह बघेल ने सूचना अफसरों को दी तो जलालाबाद सीएचसी से लेकर जिले के अफसरों तक हड़कंप मच गया। बताया गया कि कुपोषित बच्चों में शामिल कंचन बदलेपुरवा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की देखरेख में थी।
विज्ञापन
परिवार में दोनों वक्त का भोजन नहीं बनता था
डेमो पिक
शिवशंकर को भी वजन के आधार पर अतिकुपोषित बच्चों की श्रेणी में रखा गया था। डीएम के निर्देश पर सीएमओ और जिला कार्यक्रम अधिकारी टीम के साथ गांव में पहुंचे। अफसरों ने माना कि ज्यादा गरीब होने के कारण परिवार में दोनों वक्त का भोजन नहीं बनता था। बुधवार और गुरुवार को दिन में बने चावल ही बच्चों ने रात तक खाए। रात तक चावल खराब होने से संक्रमण के कारण उल्टी-दस्त की चपेट में आए और कुपोषित होने के कारण तथा सही इलाज की जगह झोलाछाप पर निर्भर रहने के कारण डायरिया से उबर नहीं सके। प्रधान की आर्थिक मदद से दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार कराया गया, जबकि तबीयत बिगड़ने से गंभीर हालत में पहुंचे हरिराम के चार वर्षीय बेटे हेमराज को नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया है।
दो बच्चों की मौत की जानकारी पर टीमें गांव में भेजी गईं। अभी तक स्पष्ट हुआ है कि बासी भोजन से बच्चे डायरिया और फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आए थे। दोनों बच्चे कुपोषित थे और उन्हें पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा था। डायरिया के लक्षण पर तीसरे बच्चे का इलाज चल रहा है।
- रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी
दो बच्चों की मौत की जानकारी पर टीमें गांव में भेजी गईं। अभी तक स्पष्ट हुआ है कि बासी भोजन से बच्चे डायरिया और फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आए थे। दोनों बच्चे कुपोषित थे और उन्हें पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा था। डायरिया के लक्षण पर तीसरे बच्चे का इलाज चल रहा है।
- रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी