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देवदूत बन पहुंचे ग्रामीण, धोती व रस्सी से बचाई कई की जान
Amarujala Bureau
Updated Fri, 30 Dec 2016 11:36 PM IST
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हादसा
- फोटो : अमर उजाला
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तालगांव में शारदा नहर में गिरी बस की डूबती सवारियों के लिए वहां के ग्रामीण देवदूत बन गए। मदद के लिए चीखते डरे-सहमे लोगों को बचाने में इन्होंने पूरी ताकत झोंक दी। मफलर व गमछे को जोड़कर बनाई गई रस्सी के सहारे बस पर खड़े लोगों को किसी तरह नहर के लबालब भरे पानी से बाहर निकाल गए। करीब 7 से अधिक लोगों को जान जोखिम में डालकर ये ग्रामीण बचा लाए। कड़ाके की सर्दी में चार घंटों तक राहत व बचाव कार्य में जुटे रहे।
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दरअसल, शुक्रवार दोपहर करीब डेढ़ बजे तालगांव के लश्करपुर के पास लहरपुर-बिसवां मार्ग पर अचानक एक बस शारदा नहर में जा गिरी। एकाएक शोर सुनकर लश्करपुर पुल के आसपास खड़े ग्रामीण भागे उठे। आवाज की ओर निगाह दौड़ाई तो सभी का कलेजा कांप उठा। शारदा नहर में एक बस धीरे-धीरे गहरे पानी में डूबती जा रही थी।
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उसमें सवार लोग जिंदगी बचाने की जद्दोजह करते हुए मदद के लिए पुकार रहे थे। दिन दहला देने वाला यह मंजर देख हादसे की जगह के इधर-उधर मौजूद ग्रामीणों को माजरा समझते देर न लगी। कोई घास की गठरी तो कोई चाय का गिलास फेंककर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा।
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लोगों के लिए देवदूत बनकर पहुंचे पुतान, प्यारे, राम सिंह, सुरेश, शत्रोहन, अवधेश इत्यादि ने जल्दबाजी में रस्सी न मिलने पर मफलर व गमछे को जोड़कर बस की ओर फेंका। बस के ऊपर खड़े लोगों में से एक-एक को इसी के सहारे नहर से निकालना शुरू किया। इसी बीच प्यारे नहर में कूदकर बस के ऊपर जा पहुंचा।
प्यारे ने बस में रस्सी बांधकर दूसरा सिरा नहर के दूसरी तरफ खड़े साथियों से बंधवाते हुए रस्सी के सहारे लोगों को बाहर भेजा। पुतान व प्यारे बस के ऊपर चढ़े लोगों को बाहर निकालने के बाद गहरे पानी में डुबकी लगाकर अन्य लोगों की तलाश में जुट गए। नहर के गहरे पानी में जो भी मिलता ग्रामीण उसे रस्सी के सहारे बाहर निकालते रहे।
कुछ ग्रामीण घरों से महिलाओं की साड़ियां व जानवरों की रस्सी भी लेकर मौके पर आ गए। तकरीबन चार घंटों तक कड़ाके की सर्दी में नहर के ठंडे पानी की परवाह करते हुए यह ग्रामीण राहत और बचाव कार्य में जुटे रहे।
खुली आंखों से मौत का भयावह मंजर देखने वाले लोगों के लिए कड़ी मशक्कत से दोबारा जिंदगी का तोहफा देने वाले यह ग्रामीण यकीनन देवदूत साबित हुए हैं। इस दौरान प्रशासनिक अमला नहर पटरी पर खड़ा होकर मूकदर्शक बना रहा। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें अगर ग्रामीण तत्काल मदद में न जुटते