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किरायेदार ने करवाई डॉक्टर की हत्या

Mon, 25 Sep 2017 10:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा
अमर उजाला ब्यूरो, इटावा Updated Mon, 25 Sep 2017 10:19 PM IST
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The tenant murdered doctor
पकड़े गए अपहरणकर्ता जानकारी देते एसएसपी वैभव कृष्ण साथ में एएसपी जितेंद्र श्रीवास्तव - फोटो : amarujala

इटावा। शहर के मोहल्ला फ्रेंड्स कॉलोनी से 14 सितंबर को अपहृत होम्योपैथिक डॉक्टर ज्ञान प्रकाश पांडेय की हत्या कर दी गई है। हत्या करने के बाद उनका शव भोगनीपुर नहर के तखरऊ पुल के समीप बक्से में रखकर नहर में फेंक दिया। पुलिस ने इस मामले में डाक्टर के यहां डेढ़ साल पहले रहने वाले किरायेदार और उसके तीन भांजों को गिरफ्तार कर लिया है। पूरे प्रकरण का सूत्रधार किरायेदार ही है। पुलिस ने बक्शा भी बरामद करने का दावा किया है। लेकिन, अभी शव नहीं मिल पाया है। हालांकि, तीन दिन पहले नहर में मिले अज्ञात शव को पुलिस डाक्टर का शव मान कर चल रही है। शव सड़ जाने की वजह से डाक्टर के परिजनों ने शिनाख्त नहीं की है। ऐसे में पुलिस  डीएनए टेस्ट का सहारा लेगी।   

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फ्रेंड्स कॉलोनी पत्ता बाग निवासी डॉ. ज्ञानप्रकाश पांडेय का 14 सितंबर को अपहरण कर लिया गया था। शाम को फोन के जरिए परिजनों से 55 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। सोमवार को एसएसपी वैभवकृष्ण ने डॉ. पांडेय के अपहरण मामले का खुलासा किया। बताया कि खुलासे के लिए चार टीमें लगी थीं। परिजनों से पूछताछ में जानकारी मिली कि मूल रूप से फिरोजाबाद के नसीरपुर थाना क्षेत्र के सहसारपुर निवासी पेस्टीसाइड कंपनी में कार्य करने वाले रामप्रकाश शर्मा डेढ़ साल पहले डा. ज्ञान प्रकाश पांडेय के यहां किरायेदार था। इस दौरान उसके घर पर रामप्रकाश के भांजे मैनपुरी जिले के करहल थाना क्षेत्र के गंभीरा गांव निवासी हरगोविंद उर्फ सीटू दुबे, अंकित दुबे, सुमित दुबे का आना जाना था।
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डाक्टर ने दूसरी मंजिल पर काम शुरू कराया तो रामप्रकाश बगल के ही दूसरे मकान में किरये पर रहने लगा। जिस नंबर से फिरौती मांगी गई थी, पुलिस ने उसे सर्विलांस पर लगाया। जांच में वह नंबर रामप्रकाश के भांजे हरदोविंद उर्फ सीटू का निकला। यहीं से पुलिस को शक हुआ। नंबर ट्रेस होेने के बाद पुलिस ने अपहरण एवं हत्या से जुड़ी कड़ियों को एक के बाद एक जोड़ना शुरू कर दिया। पुलिस ने हरगोविंद उर्फ सीटू, उसके भाई अंकित व मामा रामप्रकाश को शहर के आईटीआई चौराहा एवं भाई सुमित दुबे को भरथना से गिरफ्तार किया।
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फिर चारों से पूछताछ की। एसएसपी ने बताया कि पूछताछ में इन लोगों ने डॉ. पांडेय की हत्या करने की बात कुबूल की। 14 सितंबर को क्लीनिक के लिए निकले डॉक्टर पांडेय घर से चंद क दम आगे रेलवे लाइन क्रॉस कर दूसरी ओर पहुंचे थे कि सीटू दुबे मिल गया। उसने डॉक्टर के पैर छुए और करहल जाने की बात कह कर उन्हें अपनी कार में बैठा लिया। ड्राइविंग सीट पर उसका भाई अंकित था। पीछे दूसरा भाई सुमित था। हैंवरा के पास सुमित ने रस्सी से डॉ. पांडेय गला घोट दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। रास्ते में उनके शव को पहले से ही खरीद कर रखे गए बक्से में रखा और  तखरऊ पुल के पास नहर में बक्से को फेंक दिया।

एसएसपी ने बताया कि इनकी निशानदेही पर नहर से बक्सा और डॉक्टर का पैंट बरामद किया। पैंट में उनका आधार कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस मिला। टिफिन आदि सामान भी बरामद हो गया। पूछताछ में अपहरणकर्ताओं ने बताया कि  डॉक्टर की हत्या करके फिरौती वसूलने की उनकी योजना थी क्योंकि वह डॉक्टर से पहले से परिचित थे। उन्होंने बताया कि अपहरण से एक दिन पहले डॉक्टर के घर के आसपास बाइक से रेकी भी की गई थी। उस बाइक क ो भी बरामद कर लिया गया। दो नि पहले कानपुर देहात के रूरा के पास नहर मिला अज्ञात शव डाक्टर का होने का अनुमान है। हालांकि शव सड़ जाने की वजह से परिजन अभी पहचान नहीं कर पाए हैं। ऐसे में शव का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। वार्ता के दौरान एएसपी जितेंद्र श्रीवास्तव, सीओ सिटी राजेश कुमार सिंह भी मौजूद थे।
 
किरायेदार पर  भरोसा करना डॉक्टर को पड़ा महंगा
इटावा। घर में काफी समय तक रहे किरायेदार पर अत्यधिक भरोसा करना डॉ. ज्ञानप्रकाश को मंहगा पड़ा। किरायेदार ने ही उनका अपहरण कर हत्या करने और फिरौती में बड़ी रकम वसूलने की साजिश रची थी। अपनी इस साजिश में उसने भांजों को भी शामिल किया था।  पूरे मामले को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए डॉक्टर की रेकी भी की गई थी।

पत्ता बाग फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी डॉ. ज्ञानप्रकाश ने डेढ़ साल पूर्व रामप्रकाश शर्मा को अपना मकान किराये पर दिया था। वह परिवार के साथ रहता था और किसी पेस्टीसाइड कंपनी में सेल्समैन था। वर्ष 2016 में डॉक्टर ने अपने मकान की ऊपरी मंजिल का निर्माण कराया तो रामप्रकाश को मोहल्ले में ही मकान दिलवा दिया। डॉ. ज्ञानप्रकाश ने अपना मकान बनवाने के साथ साथ एक कार भी खरीदी। इससे रामप्रकाश को इनके काफी धनवान होने का अनुमान लगा। बस यहीं से उसने डॉक्टर के अपहरण के जरिए फिरौती वसूलने की योजना बनाना शुरू कर दिया।

रामप्रकाश जब उनके मकान में रहता था तब उनके भांजे हरगोविंद उर्फ सीटू, अंकित दुबे व सुमित दुबे का उसके घर आना-जाना था। जिससे वे डॉक्टर से अच्छे से परिचित थे। करहल स्थित उनकी क्लीनिक पर दवा लेने आते थे। इसलिए रामप्रकाश ने अपने इन भांजों को अपनी योजना में शामिल किया। 13 सितंबर को डॉक्टर के अपहरण की योजना को अमली जामा पहनाना था। इसके लिए बाइक से रेकी भी की गई थी लेकिन डॉक्टर के पहले ही क्लीनिक के लिए निकल जाने के कारण योजना सफल नहीं हुई। 14 सितंबर योजना के तहत सीटू अपनी गाड़ी के साथ उन्हें मिला। चूंकि खास परिचित थे। पैर छूने के पीछे उसके कपट को नहीं समझ सके और उसकी बातों में आकर गाड़ी में बैठ गए। जहां उन्हें अपना जीवन गंवाना पड़ा।


एक वर्ष पहले भी बना चुके थे योजना
एक वर्ष पहले किरायेदार रामप्रकाश और उसके भांजे डॉ. ज्ञानप्रकाश के घर पर ही बैठकर उनके अपहरण की योजना बना चुके थे। लेकिन सफल नहीं हो पाए। पकड़े गए आरोपियों के अनुसार उन लोगों ने जून 2016 में भी डॉक्टर का अपहरण करने की योजना बनाई थी लेकिन किन्ही कारणों के कारण सफल नहीं हो सकी थी।

सर्विलांस के जरिए आरोपियों तक पहुंची पुलिस
पुलिस अपहरणकर्ताओं तक सर्विलांस के जरिए पहुंची। हालांकि पुलिस की चार टीमें आरोपियों की तलाश में लगी थीं। जब डॉ. ज्ञानप्रकाश के घर पर छूटे मोबाइल फोन की घंटी बजी और फोन उनकी पत्नी ने उठाया तो 55 लाख की फिरौती मांगी गई। जिस नंबर से फिरौती की मांग की गई थी। पुलिस ने उसी नंबर को सर्विलांस पर लगाया और आरोपियों के स्थान को ट्रेस कर लिया। आरोपियों को चिह्नित करने के बाद उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज किए। उनके कई अन्य नंबर भी पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे। उसी के आधार पुलिस उनको गिरफ्तार करने में सफल हो सकी। अपहरणकर्ता सीटू ने अपने मोबाइल नंबर से ही डॉक्टर के नंबर पर 55 लाख की फिरौती का फोन किया था। नंबर ट्रेस होेने के बाद पुलिस ने अपहरण एवं हत्या से जुड़ी कड़ियों को एक के बाद एक जोड़ना शुरू कर दिया। सबसे पहले पुलिस सीटू के पास पहुंची। सीटू के गिरफ्त में आते ही रामप्रकाश एवं उसके साथी पुलिस की पकड़ में आ गए।

पहले भी बनवा लिया था बक्सा
एसएसपी वैभव कृष्ण के अनुसार योजना के तहत अपहरणकर्ताओं ने पहले से ही बक्सा तैयार कराया था। बक्से को करहल के जिस दुकानदार से बक्सा खरीदा गया। उस दुकानदार ने भी बक्से को 900 रुपये में उससे खरीदने की बात बताई।

बक्सा खुलने से शव नहर में बहा
एसएसपी ने खाली बक्सा से शव न मिलने का कारण बताया कि बिलंदा झाल से बक्सा के गिरने से उसकी कुंडी खुल गई और शव बह गया। इस बात को एक मछुआरे सत्यपाल  निवासी सढ़ थाना कुर्रा ने पुष्टि की। उसने बताया कि कुछ दिन पहले उसने नहर में एक बक्से को आते देता था। उसने बक्से को पकड़ना चाहा। परंतु पकड़ न सका। बक्सा झाल से नीचे नहर में गिरा तो खुल गया और उसमें शव बह निकला।

रूरा में मिले शव के होने का अनुमान
एसएसपी ने बताया कि फिलहाल अभी डॉक्टर का शव नहीं मिला है। हालांकि कानपुर देहात के रूरा के पास नहर से एक शव बरामद हुआ है। परिजन शिनाख्त के लिए ले गए थे। चूंकि शव बुरी तरह से सड़ गल चुका था। इसलिए उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि उस शव का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा।
डॉ. ज्ञानप्रकाश पांडेय के भाई डॉ. रामप्रकाश पांडेय व डॉ. बबुआ पांडे ने बताया कि वह लोग पुलिस की छानबीन से संतुष्ट हैं। उनकी पैंट व अन्य सामान की उन्होंने पहचान भी की है। पुलिस उनको कानपुर देहात भी ले गई थी। जहां एक शव को दिखाया लेकिन शव के सड़ गल जाने से उसकी पहचान नहीं कर सके।


शव बरामदगी के लिए तीन दिन नहर को छानती रही पुलिस
डॉ. ज्ञानप्रकाश पांडेय के अपहरण कर हत्या की गुत्थी को पुलिस ने तीन दिन पहले ही सुलझा लिया था। लेकिन उनके शव के न मिल पाने के कारण पुलिस उसका खुलासा नहीं कर सकी थी। पुलिस को यह तो जानकारी हो गई थी कि नहर में शव को बक्से में रखकर फेंका गया। इसी को लेकर पुलिस पिछले तीन दिनों से गोताखोरों के जरिए नहर को छान रही थी। एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने 80 किमी तक नहर में शव बरामदगी के लिए सघन अभियान चलाया। इसमें बक्सा तो मिला लेकिन खाली। खाली बक्सा मिलने के बाद पुलिस ने तलाश जारी रखी और तथ्य भी जुटाए। तब सोमवार को पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया गया।

 

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