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बस लाचार खड़े देखते रहे...किसी को बचा नहीं पाएं
बरेली।
Updated Mon, 05 Jun 2017 06:51 PM IST
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Just see the helpless standing ... no one can save you
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
सभी बस में बैठे थे, किसी को झपकी आ रही थी तो कोई किसी से बात कर रहा था। बरेली से निकलकर बदायूं रोड की ओर जाते हुए इंवर्टिस यूनिवर्सिटी पर जैसे ही बस पहुंची अचानक धमाके की आवाज हुई, जब लोग संभल पाते और समझ पाते आग की लपटें उठीं और बस के अंदर धुआं भर गया। चीख पुकार मच गई। देखते ही देखते बस आग का गोला बन गई। लोग कुछ समझ ही नहीं पाए आखिर हुआ क्या बस भागने की सोचने लगे। कोई खिड़की से कूदा तो कोई रास्ता बनाकर दरवाजे से निकलने की कोशिश में था। बस सभी बचना चाह रहे थे। इसी जद्दोजहद के बीच कई लोग आग की चपेट में आ चुके थे और कई को तो सीट से उठने का मौका नहीं मिला और बैठे- बैठे झुलस गए। सब अपनी- अपनी जान बचाने में लगे रहे बच्चों का तो पता ही नहीं चला।
गोंडा के 62 वर्षीय श्रीराम अपनी कंपकंपाती आवाज से बताते हैं कि उनको कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या करें। खुद को बचाएं या फिर अपनी बहु और बेटे को। श्रीराम के पूरे बाल जले हुए हैं। सुध बुध खोकर अपने अपने परिवार वालों का इलाज होते देख रहे हैं। श्रीराम के बेटे शंकर की हालत अभी गंभीर है। रामधन सिंह का पैर टूट चुका है वह दर्द से चीख रहा है। डॉक्टराें के हाथ जोड़ रहा है और कह रहा है कि बचा लो। रामधन ने बताया कि उसके साथ पड़ोस के सात लोग बस में सवार थे। चाचा और चाची के अलावा एक 10 साल का बच्चा भी बस में बैठा था। लेकिन रामधन सिर्फ खिड़की से कूदकर अपनी जान बचा सके। इसमें भी उनका पैर टूट गया। रामधन ने कहा कि आसपास से निकलने वाले वाहन सिर्फ जलती बस देखते रहे कोई मदद को नहीं रुका। करीब आधे घंटे बाद पुलिस पहुंची तो मदद की गुंजाइश दिखी। सोनू के सिर पर गंभीर चोट लगी है। वह अपनी चोट का दर्द भूल कर सिर्फ अपने भाई को याद करके रो रहा है। सोनू ने रोते- रोते बताया कि उसका 18 साल का भाई अनिल उसी बस में रह गया है। मैं तो खाली घायल हुआ हूं मेरा भाई तो बस में ही झुलस गया।
- ये घायल पहुंचे सिद्धि विनायक अस्पताल
श्रीराम (62), उवरी बेगमगंज, गोहरी जीत, गोंडा
पूजा (28), श्रीराम की बहू, गोंडा
शंकर (32), श्रीराम का बेटा, गोंडा
सोनू (30), गोंडा
विनोद (36), गोंडा
श्रीकिशन (40), गोंडा
रामधन सिंह (26), गोंडा
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गोंडा के 62 वर्षीय श्रीराम अपनी कंपकंपाती आवाज से बताते हैं कि उनको कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर क्या करें। खुद को बचाएं या फिर अपनी बहु और बेटे को। श्रीराम के पूरे बाल जले हुए हैं। सुध बुध खोकर अपने अपने परिवार वालों का इलाज होते देख रहे हैं। श्रीराम के बेटे शंकर की हालत अभी गंभीर है। रामधन सिंह का पैर टूट चुका है वह दर्द से चीख रहा है। डॉक्टराें के हाथ जोड़ रहा है और कह रहा है कि बचा लो। रामधन ने बताया कि उसके साथ पड़ोस के सात लोग बस में सवार थे। चाचा और चाची के अलावा एक 10 साल का बच्चा भी बस में बैठा था। लेकिन रामधन सिर्फ खिड़की से कूदकर अपनी जान बचा सके। इसमें भी उनका पैर टूट गया। रामधन ने कहा कि आसपास से निकलने वाले वाहन सिर्फ जलती बस देखते रहे कोई मदद को नहीं रुका। करीब आधे घंटे बाद पुलिस पहुंची तो मदद की गुंजाइश दिखी। सोनू के सिर पर गंभीर चोट लगी है। वह अपनी चोट का दर्द भूल कर सिर्फ अपने भाई को याद करके रो रहा है। सोनू ने रोते- रोते बताया कि उसका 18 साल का भाई अनिल उसी बस में रह गया है। मैं तो खाली घायल हुआ हूं मेरा भाई तो बस में ही झुलस गया।
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- ये घायल पहुंचे सिद्धि विनायक अस्पताल
श्रीराम (62), उवरी बेगमगंज, गोहरी जीत, गोंडा
पूजा (28), श्रीराम की बहू, गोंडा
शंकर (32), श्रीराम का बेटा, गोंडा
सोनू (30), गोंडा
विनोद (36), गोंडा
श्रीकिशन (40), गोंडा
रामधन सिंह (26), गोंडा