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विश्व टेस्ट चैंपियनशिप : साहा ने कहा- इंग्लैंड में बेहतर बल्लेबाजी करने वाली टीम रहेगी आगे

Sun, 23 May 2021 06:56 AM IST
Jeet Kumar स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 23 May 2021 06:56 AM IST
सार

  • 06 टेस्ट मैच खेलने हैं भारतीय टीम को इंग्लैंड में तीन माह के दौरान
  • 18 जून को न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के साथ होगी दौरे की शुरुआत 
  • 1251 रन बनाए हैं साहा ने 38 टेस्ट में 29.9 की औसत से। इसमें तीन शतक और पांच अर्द्धशतक शामिल हैं 
  • 103 शिकार (92 कैच, 11 स्टं) किए हैं विकेट के पीछे

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Wriddhiman Saha says team which batting better will be ahead
ऋद्धिमान साहा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अनुभवी विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा ने कहा है कि इंग्लैंड में बल्लेबाज जीत में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड की परिस्थितियों को देखते हुए बल्लेबाजों को सबसे अधिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा। तेज गेंदबाजों को हमेशा वहां फायदा मिलता है। इसलिए बल्लेबाजों के पास सफलता की कुंजी होगी। बेहतर बल्लेबाजी करने वाली टीम आगे होगी।

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विराट एंड कंपनी को इंग्लैंड दौर में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल सहित छह टेस्ट खेलने हैं। इसकी शुुरुआत 18 जून को साउथम्पटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के खिताबी मुकाबले से होगी।
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उसके बाद चार अगस्त से मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो ऋषभ पंत का विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल में खेलना तय है। साहा का मानना है कि अगस्त से इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उन्हें कुछ मौके मिल सकते हैं। 
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आलोचना के कारण बदलाव की जरूरत नहीं :
खुद के बारे में साहा ने कहा,‘जाहिर है, जब आप अच्छा नहीं करेंगे तो आलोचना भी होगी। मैं हमेशा उस तरह का प्रदर्शन करने की कोशिश करता हूं जैसा मैंने वर्षों से सीखा है। अगर लोग कह रहे हैं कि मेरी बल्लेबाजी अच्छी नहीं है, तो शायद ऐसा हो सकता है।

आगे कहा कि मुझे हालांकि नहीं लगता कि मानसिक या तकनीकी दृष्टिकोण से कुछ भी बदलने की जरूरत है। मैं बस अपना ध्यान केंद्रित करने और कड़ी मेहनत करने की कोशिश करता हूं।’ 

पंत ने उठाया मौके का फायदा 
उन्होंने स्वीकार किया कि धोनी के संन्यास और 2018 के पूरे सत्र केदौरान उनके चोटिल होने के बाद जिन विकेटकीपरों को मौका मिला उनमें पंत ने ही सबसे अच्छा उपयोग किया था।

साहा ने कहा,‘जब मैं चोट के कारण बाहर हुआ तो पार्थिव पटेल, दिनेश कार्तिक और पंत को मौके मिले। लेकिन वह ऋषभ ही थे, जिन्होंने मौके का पूरा फायदा उठाया और टीम में अपनी जगह पक्की कर ली। मुझे इस दौरान कुछ ही मैच खेलने को मिले।’

देश का प्रतिनिधित्व करना बड़ी प्रेरणा 
साहा ने कहा,‘मुझे लगता है कि भारत का प्रतिनिधित्व करना अपने आप में एक बड़ी प्रेरणा है। अगर मुझे कोई मौका मिलता है तो यह बड़ी बात होगी। आखिरकार, हर किसी को इस तरह की छोटी-बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

साथ ही कहा टीम के साथ रहना और 140 करोड़ लोगों के देश का प्रतिनिधित्व करना कहीं अधिक बड़े सम्मान की बात है। भारतीय टीम के साथ 11 साल के सफर में साहा को कई बार टीम से अंदर-बाहर होना पड़ा। उन्हें इससे कोई शिकायत नहीं है। उनके लिए हमेशा टीम की प्राथमिकता सर्वोच्च है। 

फिर वही कहानी 
बल्लेबाजी में अच्छी तकनीक होने के बाद भी साहा टीम प्रबंधन को प्रभावित करने में नाकाम रहे हैं। वह एक बार फिर उसी स्थिति में आ गए हैं जब वह दस साल पहले तत्कालीन कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के उत्तराधिकारी (विकेटकीपिंग में विकल्प) के तौर पर 2011 में इंग्लैंड दौरे पर गए थे।

ऐसी ही कहानी 2014 में भी दोहराई गई। विकेट के पीछे शानदार कौशल होने के बावजूद 2021 (इंग्लैंड दौरे पर) में एक बार फिर से वह ड्रेसिंग रूम से शानदार बल्लेबाजी लय में चल रहे युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋ षभ पंत को मैदान में उतरते हुए देखेंगे। 

आईपीएल-14 का बायो-बबल यूएई जैसा नहीं था 
साहा ने संकेत दिए हैं कि आईपीएल-14 के लिए तैयार किया गया जैविक  रूप से सुरक्षित माहौल (बायो-बबल) पिछले साल यूएई की तुलना में उतना अधिक अभेद्य नहीं था। वह उन खिलाड़ियों में शामिल थे जो कोरोना संक्रमण का शिकार हुए।

उन्होंने कहा, ‘इसका आकलन करना हितधारकों का काम है लेकिन मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि पिछले साल यूएई में हमारी ट्रेनिंग के दौरान कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, मैदानकर्मी भी नहीं। यहां लोग मौजूद रहते थे, बच्चे पास की दीवारों से झांक रहे होते थे। मैं अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहता लेकिन हमने देखा कि 2020 में यूएई में आईपीएल कितने आराम से हो गया और फिर इस साल भारत में शुरू हुआ जब मामले बढ़ रहे थे।’ 

जम्मू-कश्मीर के युवा ने श्रीनगर से दिल्ली की 950 किमी मैराथन सात दिन में पूरी की
 जम्मू-कश्मीर के 25 वर्षीय युवक उजैर फैयाज खान ने नशा मुक्ति जागरूकता के लिए श्रीनगर से दिल्ली के बीच लगभग 950 किलोमीटर की मैराथन को सात दिन में पूरा किया। खान ने रिकॉर्ड बनाने के बाद ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में पंजीकरण के लिए आवेदन किया है।

इसके लिए हालांकि उन्हें 22,000 रुपये का भुगतान करना होगा जो घर की खराब वित्तीय स्थिति के कारण अभी संभव नहीं है। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि खान श्रीनगर के नौहट्टा के रहने वाले हैं।


उन्होेंने नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए श्रीनगर से दिल्ली के बीच 940 किलोमीटर की लंबी दूरी को रिकॉर्ड सात दिन में दौड़ कर पूरा किया है। खान अमर सिंह कॉलेज में मनोविज्ञान में स्नातक के छात्र हैं। 

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