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5 ऐसी गलतियां, जो क्रिकेट के भगवान से हुईं...

Mon, 18 Nov 2013 01:48 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 18 Nov 2013 01:48 PM IST
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why_sachin tendulkar_never speaks_disputed matters
सचिन रमेश तेंदुलकर। माफ कीजिए! भारत रत्न सचिन तेंदुलकर। एक ऐसा जीनियस, जिसने अपने बल्ले से 22 गज की पट्टी पर कामयाबी की वो इबारत लिखी, जिसके धुंधला पड़ने में अरसा लग जाएगा।
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एक ऐसा खिलाड़ी, जो अपनी लगन, तकनीक और जुनून के बूते क्रिकेट में उस मुकाम तक पहुंच गया, जहां लोग उसे क्रिकेटर के रूप में कम और खुदा के तौर पर ज्यादा जानते हैं। वो मैदान छोड़कर गया, तो देश का बड़ा हिस्सा बिलख पड़ा।
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लेकिन सचिन भगवान नहीं, बल्कि एक आम इंसान हैं, यह साबित करने वाले कई वाकये आए लेकिन उनके रुतबे का असर कुछ ऐसा है कि रिटायरमेंट के मौके पर कोई भी उनसे चुभता सवाल नहीं करना चाहता।
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यूं तो उनकी कामयाबी और रिकॉर्ड पर एक किताब लिखी जा सकती है, लेकिन तीन ऐसी घटनाएं हैं, जिन पर सचिन की चुप्पी कई सवालों को जन्म देती है।

बदकिस्मती ऐसी है कि उनकी विदाई के बाद भी इन सवालों के जवाब खोजने की कोशिश किसी संवाददाता ने नहीं की। और न ही सचिन ने इन पुराने जख्मों पर खुद मरहम रखने की जहमत उठाई। तीन घटनाएं, जो 'भगवान' से सवाल करने का दुस्साहस दिखाती हैं:

फरारी पर क्यों मांगी ड्यूटी में छूट?
बात 2002 की है, जब उन्हें फिएट ने चमचमाती फरारी तोहफे में दी थी। सचिन उस वक्त फिएट को एंडोर्स करते थे और यह उसी का इनाम थी। लेकिन कार इंपोर्ट करते वक्त दी जाने वाली ड्यूटी चुकाने के बजाय उन्होंने कथित तौर पर एनडीए सरकार से छूट देने का आग्रह किया। सरकार ने सचिन की बात मानी भी। लेकिन पैसे के अंबार पर बैठे मास्टर ब्लास्टर ने 1.13 करोड़ की यह छूट मांगकर अपने खिलाफ कई सवाल खड़े कर लिए थे, जिनके सवाल आज तक नहीं मिले। हैरत की बात यह भी है कि यही कार उन्होंने बाद में जाकर बेच भी दी।

जब 'भगवान' ने की बॉल से छेड़छाड़!

दुनिया सचिन का सम्मान करती है, लेकिन इस घटना से साल भर पहले 2001 में दक्षिण अफ्रीका के पोर्ट एलिजाबेथ में कुछ ऐसा घटा, जो आज भी जहन में ताजा है। कप्तान सौरव गांगुली ने तेंदुलकर को गेंद थमाई और अपने चार ओवर के स्पेल में सचिन के हाथों पर कैमरा जूम हुआ, तो वह बॉल की सीम स्क्रैच करते देखे गए। मैच रेफरी ने उन्हें हल्की सजा देते हुए केवल एक मैच का बैन लगाया। इसके साथ कुछ दूसरे खिलाड़ियों पर जरूरत से ज्यादा अपील करने का आरोप भी लगा। लेकिन चली बीसीसीआई की। बोर्ड अड़ गया और बाद में आईसीसी को बैन वापस लेना पड़ा। यह भी हो सकता था कि सचिन अपनी गलती मानकर एक मैच की सजा भुगत लेते और किस्सा वहीं खत्म हो जाता। यह दृश्य आज भी यूट्यूब पर देखा जा सकता है।

मंकीगेट कांड ने भी खड़े किए सवाल
तीसरा वाकया 2008 का है, जब भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया में खेल रही थी। हरफनमौला कंगारू खिलाड़ी एंड्रयू साइमंड्स से भारतीय फिरकी गेंदबाज हरभजन सिंह पर नस्ली टिप्पणी करने का आरोप लगाया। तेंदुलकर उस वक्त पिच पर मौजूद थे और उन्होंने कहा कि हरभजन ने ऐसा कुछ नहीं कहा। लेकिन उनकी दलील मैच रेफरी ने खारिज कर दी। इसे सचिन को झूठा बनाने की तरह देखा गया और बवाल मच गया। बाद में एडम गिलक्रिस्ट और रिकी पॉन्टिंग ने अपनी किताब में दावा किया कि सचिन की भूमिका इस मामले में संदिग्ध रही। लेकिन अनिल कुंबले का कहना है कि उनकी आने वाली किताब इस राज से पर्दा हटाएगी। लेकिन सचिन कभी नहीं बोले।

फिक्सिंग का डंक, सचिन खामोश
महेंद्र सिंह धोनी जब टीम के साथ 2013 चैंपियंस ट्रॉफी खेलने के लिए इंग्लैंड रवाना हो रहे थे, तो उनसे सबसे ज्यादा सवाल आईपीएल में फिक्सिंग को लेकर हुए। लेकिन धोनी ने इससे जुड़े एक भी सवाल का जवाब देने से मना कर दिया। कुछ यही रुख 2000 में सचिन ने अपनाया था। जब तेंदुलकर से पूछा गया कि वह इस मामले में कुछ कहते क्यों नहीं हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, "मेरे लिए खेल से परे कुछ न कहना स्वाभाविक सी बात है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड इस तरह के मुद्दे पर कुछ भी कहने से मना करता है। हम नियम से चलते हैं।"

गांगुली-ग्रेग मामले में चुप्पी साधना
ग्रेग चैपल और सौरव गांगुली के बीच 2005 के अंत और 2006 की शुरुआत में एक अजीब मैच खेला गया। इस विवाद की वजह से गांगुली को कप्तानी खोनी पड़ी और टीम में उनकी जगह भी खत्म हो गई। देश भर में इसे लेकर बवाल मचा। गांगुली के गृह राज्य पश्चिम बंगाल से लेकर संसद तक, इस बारे में खूब बयानबाजी हुई। आखिरकार गांगुली को टीम में वापस लिया गया और वह 2007 में वर्ल्ड कप भी खेले। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सचिन की चुप्पी सवाल खड़े करती रही। गांगुली और ग्रेग चैपल, दोनों से सचिन की अच्छी बनती थी और उनके कद का जोर भी ऐसा था कि वह बीच-बचाव भी कर सकते थे। लेकिन ऐसी खबर बाहर नहीं आई कि उन्होंने इस दिशा में कोई कोशिश की हो।


जाहिर है, ऐसी सफाई दी जा सकती है कि सचिन ने विवादों से दूर रहने के लिए चुप रहना बेहतर समझा। लेकिन ऐसे कई मौके थे, जब देश की उनकी चुप्पी नहीं, जवाब मांग रहा था।
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