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कोच पद से इस्तीफा देने वाले जाफर पर लगा था इस्लाम को बढ़ावा देने का आरोप, अब सीएम ने दिए जांच के आदेश

Tue, 16 Feb 2021 08:35 AM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Tue, 16 Feb 2021 08:35 AM IST
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Uttarakhand CM orders probe into Wasim Jaffer resignation as cricket coach
वसीम जाफर - फोटो : ट्विटर

टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और उत्तराखंड क्रिकेट संघ के कोच पद से इस्तीफा देने वाले वसीम जाफर प्रकरण मामले में राज्य के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जांच के आदेश दिए हैं। दरअसल, रावत ने रविवार शाम देहरादून में अपने आधिकारिक निवास पर सीएयू के अधिकारियों से मुलाकात की थी। इस बात की पुष्टि मुख्यमंत्री के मीडिया समन्वयक दर्शन सिंह रावत ने की। दर्शन सिंह ने कहा, 'सीएयू के कुछ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को इस मामले से अवगत कराया। उनकी बात सुनने के बाद उन्होंने (सीएम) पूरे मामले में जांच के आदेश दिए।' उन्होंने (दर्शन सिंह रावत) आगे कहा कि एक बार जांच रिपोर्ट आने के बाद सीएम साहब आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

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क्या था पूरा मामला?
उत्तराखंड क्रिकेट संघ के अधिकारियों ने जाफर पर उत्तराखंड के कोच के कार्यकाल के दौरान धर्म आधारित चयन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था है। हालांकि, उन्होंने (जाफर) संघ के अधिकारियों के इन आरोपों को खारिज कर दिया। भारत के लिए 31 टेस्ट खेलने वाले जाफर ने कहा था कि, टीम में मुस्लिम खिलाड़ियों को तरजीह देने के सीएयू के सचिव माहिम वर्मा के आरोपों से उन्हें काफी तकलीफ पहुंची। जाफर ने चयन में दखल और चयनकर्ताओं और संघ के सचिव के पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर बीते मंगलवार को इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद जाफर ने बुधवार (बीते) को ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था, 'जो कम्युनल एंगल लगाया, वह बहुत दुखद है। उन्होंने आरोप लगाया कि मैं इकबाल अब्दुल्ला का समर्थन करता हूं और उसे कप्तान बनाना चाहता था जो सरासर गलत है।'

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राहुल गांधी ने 13 फरवरी को किया ट्वीट

बता दें कि जांच के लिए मुख्यमंत्री का आदेश कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक ट्वीट के बाद आया है, जिसमें उन्होंने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया था। दरअसल, राहुल गांधी ने 13 फरवरी को एक ट्वीट कर लिखा था, पिछले कुछ वर्षों में नफरत इतनी ज्यादा बढ़ी है कि उसने हमारे प्यारे खेल क्रिकेट को भी अपनी आगोश में ले लिया है। भारत हम सभी का है, इस एकता को बांटने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
 



पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर जाफर ने दिया था इस्तीफा
उन्होंने कहा, 'बायो बबल में मौलवी आए और हमने नमाज पढ़ी। मैं आपको बताना चाहता हूं कि मौलवी, मौलाना जो भी देहरादून में शिविर के दौरान दो या तीन शुक्रवार को आए, उन्हें मैंने नहीं बुलाया था।' जाफर ने कहा, 'इकबाल अब्दुल्ला ने मेरी और मैनेजर की अनुमति जुमे की नमाज के लिए मांगी थी।' इस पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने ट्वीट करके कहा था, 'कप्तानी के लिए जय बिस्टा के नाम की सिफारिश की थी, इकबाल की नहीं लेकिन सीएयू अधिकारियों ने इकबाल को पसंद किया।'

बचाव में उतरे थे कई पूर्व क्रिकेटर

टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर के बचाव में कई पूर्व क्रिकेटर उतरे थे। भारत के पूर्व महान स्पिन गेंदबाज व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की क्रिकेट समिति के प्रमुख अनिल कुंबले ने जाफर का समर्थन करते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था, 'आपके साथ हूं वसीम। आपने सही किया। दुर्भाग्यशाली खिलाड़ी हैं, जिन्हें आपके मेंटर नहीं होने की कमी खलेगी।' वहीं, पू्र्व तेज गेंदबाज इरफान पठान ने ट्वीट कर लिखा था, 'दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको यह समझाना पड़ा।'


क्रिकेटर मनोज तिवारी ने की थी आवश्यक कार्रवाई की मांग
वहीं, इस बीच क्रिकेटर मनोज तिवारी ने ट्वीट कर कहा, 'मैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अनुरोध करूंगा कि वे इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान दें, जिसमें हमारे नेशनल हीरो वसीम भाई को क्रिकेट संघ में साम्प्रदायिक करार दिया गया था। इस पर आवश्यक कार्रवाई करें। एक उदाहरण सेट करने का समय आ गया है।'

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