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जब कप्तान होते हैं तभी रन बनाते हैं ये जनाब
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 11 Sep 2013 05:16 PM IST
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यह कहानी है भारतीय क्रिकेट जगत के उभरते एक युवा बल्लेबाज की जिनकी बल्लेबाजी एक खास समय ही चलती है। उनकी खासियत यह है कि वह अपनी कप्तानी में भारत को वर्ल्ड चैंपियन भी बना चुके हैं।
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उभरते बल्लेबाज उन्मुक्त चंद का बल्ला तभी चलता है जब वह किसी टीम के कप्तान होते हैं। न्यूजीलैंड ए के खिलाफ तीन गैर एकदिवसीय मैचों की सीरीज के लिए भारतीय टीम की कप्तानी मिलने के बाद उन्होंने लगातार दो मैचों में अर्धशतक लगाए हैं।
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पहले मैच में उन्होंने 94 रन बनाए जबकि दूसरे मैच में 59 रनों की पारी खेली थी। ये दोनों ही मैच जीतकर भारत ने सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त भी बना ली है।
इससे पहले 20 साल के चंद पिछले साल उस समय सुर्खियों में आए जब उन्होंने अपनी कप्तानी में भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप दिलाया।
ऑस्ट्रेलिया में हुए इस वर्ल्ड कप के खिताबी जंग में चंद के अविजित 111 रनों के दम पर भारतीय टीम ने मेजबान टीम को हराया था।
इसके अलावा पिछले साल विशाखापत्तनम में खेली गई चार देशों की अंडर-19 टीम की वनडे सीरीज में बतौर कप्तान उन्होंने एक शतक और दो अर्धशतक जमाए थे।
बल्लेबाजी स्टाइल के कारण उनकी तुलना टीम इंडिया के बेजोड़ बल्लेबाज विराट कोहली से होती है। लेकिन यह महज संयोग है कि जब वह बतौर खिलाड़ी किसी मैच में उतरते हैं तो वह बल्ले से कुछ खास नहीं कर पाते।
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उनकी प्रतिभा को देखते हुए 2011 में उन्हें आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स टीम में शामिल किया गया।
पिछले साल वर्ल्ड कप जिताने के बाद प्रशंसकों की उम्मीद उनसे काफी बढ़ गई थी, लेकिन इस बार आईपीएल में उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा और सात मैचों में महज 61 रन ही बना पाए।
उनका फीका प्रदर्शन आगे भी जारी रहा पिछले महीने अगस्त में सिंगापुर में खेले गए अंडर-23 टीमों के टूर्नामेट में खास नहीं कर सके थे।
बल्ले से लगातार असफलता ने उन पर काफी दबाव बना दिया था, लेकिन शुक्र है कि चयनकर्ताओं ने उन्हें भारत ए टीम की कमान सौंपी और फिर फॉर्म में आ गए और उनका बल्ला फिर से बोलने लगा है।