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T20 WC 2026: पाकिस्तान यू-टर्न लेगा या जिद पर रहेगा, कब होगा फैसला? आईसीसी के साथ लाहौर में हुई नकवी की बैठक
Mon, 09 Feb 2026 08:12 AM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Mon, 09 Feb 2026 08:12 AM IST
सार
आईसीसी के उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा रविवार को लाहौर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पीसीबी के चेयरमैन मोहसिन नकवी और बीसीबी के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम के साथ बैठक की। यह बैठक भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले को लेकर हुई।
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नकवी-शाह
- फोटो : IANS-PTI
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा रविवार को लाहौर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के चेयरमैन मोहसिन नकवी और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम के साथ बैठक की। इस बैठक में भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले को लेकर चर्चा हुई। पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट डॉन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पाकिस्तान सरकार से मंजूरी मिलने के बाद दोनों पक्ष बैठक के नतीजे का एलान करेंगे।
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क्या है मामला?
पाकिस्तान की सरकार ने हाल ही में इस बात का एलान किया था कि उनकी टीम टी20 विश्व कप 2026 में खेलने के लिए कोलंबो जाएगी, लेकिन भारत के खिलाफ 15 फरवरी को होने वाले मुकाबले का बहिष्कार करेगी। हालांकि, इस बात की जानकारी आईसीसी को पीसीबी की तरफ से नहीं दी गई, जिस पर खेल की वैश्विक संस्था ने बोर्ड से जवाब मांगा। शनिवार को खबर आई थी कि पीसीबी ने इस पूरे मामले को लेकर आईसीसी से संपर्क किया है और उसकी कार्रवाई से बचने के लिए फोर्स मेज्योर का सहारा लेने की कोशिश की। वहीं, क्रिकेट की वैश्विक संस्था ने भी पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा कि मैच नहीं खेलने को सही ठहराने के लिए फोर्स मेज्योर के प्रावधान को कैसे लागू किया जा सकता है।
पाकिस्तान की सरकार ने हाल ही में इस बात का एलान किया था कि उनकी टीम टी20 विश्व कप 2026 में खेलने के लिए कोलंबो जाएगी, लेकिन भारत के खिलाफ 15 फरवरी को होने वाले मुकाबले का बहिष्कार करेगी। हालांकि, इस बात की जानकारी आईसीसी को पीसीबी की तरफ से नहीं दी गई, जिस पर खेल की वैश्विक संस्था ने बोर्ड से जवाब मांगा। शनिवार को खबर आई थी कि पीसीबी ने इस पूरे मामले को लेकर आईसीसी से संपर्क किया है और उसकी कार्रवाई से बचने के लिए फोर्स मेज्योर का सहारा लेने की कोशिश की। वहीं, क्रिकेट की वैश्विक संस्था ने भी पाकिस्तान से यह स्पष्ट करने को कहा कि मैच नहीं खेलने को सही ठहराने के लिए फोर्स मेज्योर के प्रावधान को कैसे लागू किया जा सकता है।
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क्यों अहम है बैठक?
- इस गतिरोध को सुलझाने के लिए पीसीबी और आईसीसी के बीच बैठक रविवार को लाहौर में बैठक हुई।
- आईसीसी के उपाध्यक्ष से पहले बीसीबी के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ने मोहसिन नकवी से मुलाकात की।
- नकवी ने भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार के सरकार के निर्देशों पर ज्यादा टिप्पणी नहीं की लेकिन एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) द्वारा पीसीबी को एक ईमेल भेजने के बाद स्थिति बदल गई है।
- इस ईमेल में उनसे बहिष्कार खत्म करने का आग्रह किया गया है।
- दरअसल, एसएलसी अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने नकवी को विश्व कप में भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए ईमेल भेजा था।
क्यों फोर्स मेज्योर प्रावधान लागू करना चाह रहा पाकिस्तान?
- पीसीबी ने कुछ दिन पहले आधिकारिक तौर पर आईसीसी को पत्र लिखकर फोर्स मेज्योर प्रावधान लागू करने की मांग की थी।
- इसमें सरकार के उस सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया गया था, जिसमें 15 फरवरी को कोलंबो में होने वाले भारत के खिलाफ मुकाबले से टीम को दूर रहने का निर्देश दिया गया था।
- अब इस मामले में हालांकि उम्मीद की एक किरण दिख रही है। आईसीसी के एक निदेशक के अनुसार, पीसीबी ने इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए आईसीसी से संपर्क किया है।
- विश्व संस्था की औपचारिक चिट्ठी मिलने के बाद पीसीबी ने आगे की बातचीत शुरू कर दी है। आईसीसी वर्तमान में पीसीबी के साथ बातचीत कर रहा है ताकि इस मामले का समाधान निकाला जा सके।
- आईसीसी का मानना है कि खेल के हित को किसी एकतरफा कार्रवाई से ऊपर रखा जाना चाहिए।
क्या है फोर्स मेज्योर प्रावधान?
फोर्स मेज्योर एक कानूनी प्रावधान है, जो किसी पक्ष को असाधारण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों से हटने की छूट देता है। इसमें युद्ध, प्राकृतिक आपदा, सरकारी आदेश या सार्वजनिक आपातकाल जैसी स्थितियां शामिल होती हैं। इसका इस्तेमाल तभी मान्य होता है जब प्रभावित पक्ष साबित करे कि घटना अनपेक्षित, अपरिहार्य थी और उसने सभी संभव प्रयास किए ताकि नुकसान को कम किया जा सके। इसके लिए सिर्फ असुविधा या राजनीतिक पसंद पर्याप्त नहीं होती।
फोर्स मेज्योर एक कानूनी प्रावधान है, जो किसी पक्ष को असाधारण परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों से हटने की छूट देता है। इसमें युद्ध, प्राकृतिक आपदा, सरकारी आदेश या सार्वजनिक आपातकाल जैसी स्थितियां शामिल होती हैं। इसका इस्तेमाल तभी मान्य होता है जब प्रभावित पक्ष साबित करे कि घटना अनपेक्षित, अपरिहार्य थी और उसने सभी संभव प्रयास किए ताकि नुकसान को कम किया जा सके। इसके लिए सिर्फ असुविधा या राजनीतिक पसंद पर्याप्त नहीं होती।