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गावस्कर बोले, कप्तान-कोच में मतभेद आम बात, इस वजह से होता है ऐसा
amarujala.com- Presented by: नवीन चौहान
Updated Wed, 31 May 2017 10:16 PM IST
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विराट कोहली और सुनील गावस्कर
- फोटो : ESPN
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भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अनिल कुंबले और कप्तान विराट कोहली के बीच मतभेद की खबरों को खास तवज्जो नहीं देते हुए पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि दो पीढ़ियों के अंतर के कारण यह आम बात है और प्रत्येक टीम में ऐसा देखने को मिलता है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने पिछले सप्ताह नए मुख्य कोच के लिए आवेदन मंगाए क्योंकि वर्तमान कोच कुंबले का कार्यकाल जून में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के साथ ही समाप्त हो जाएगा। गावस्कर ने बोर्ड के इस फैसले का भी समर्थन किया। गावस्कर ने कहा, ‘बीसीसीआई ने जो किया मेरी निगाह में उसने प्रक्रिया का अनुसरण किया। कभी भी आपको ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिलेगी जब किसी देश के कप्तान और कोच की राय एक जैसी हो। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा,‘ऐसा होना असंभव है क्योंकि कोच पूर्व की पीढ़ी के साथ खेलते थे और इसलिए उनका रवैया वर्तमान पीढ़ी से थोड़ा भिन्न होता है। मैदान पर भले ही यह नहीं दिखे लेकिन अभ्यास सत्र या टीम संयोजन तैयार करते समय यह अंतर सामने आ सकता है। मुझे नहीं लगता कि हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
गावस्कर ने हालांकि कुंबले की तारीफ की जिनके कोच बनने के बाद भारत ने अधिकतर मैचों में जीत दर्ज की। उन्होंने कहा, ‘कुंबले ने कोच के रूप में बहुत अच्छी भूमिका निभाई मैं केवल परिणामों की बात कर रहा हूं और जब आप पिछले साल के परिणामों पर गौर करते हो तो आप कह सकते हो कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया। गावस्कर ने इसके साथ ही कहा कि कोच उस व्यक्ति को बनाया जाना चाहिए जो भारतीय क्रिकेट के लंबी अवधि के हितों को ध्यान में रखे। उन्होंने कहा, ‘कोच ऐसा होना चाहिए जिसके पास भारतीय क्रिकेट के लिए विजन हो।
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने पिछले सप्ताह नए मुख्य कोच के लिए आवेदन मंगाए क्योंकि वर्तमान कोच कुंबले का कार्यकाल जून में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के साथ ही समाप्त हो जाएगा। गावस्कर ने बोर्ड के इस फैसले का भी समर्थन किया। गावस्कर ने कहा, ‘बीसीसीआई ने जो किया मेरी निगाह में उसने प्रक्रिया का अनुसरण किया। कभी भी आपको ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिलेगी जब किसी देश के कप्तान और कोच की राय एक जैसी हो। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा,‘ऐसा होना असंभव है क्योंकि कोच पूर्व की पीढ़ी के साथ खेलते थे और इसलिए उनका रवैया वर्तमान पीढ़ी से थोड़ा भिन्न होता है। मैदान पर भले ही यह नहीं दिखे लेकिन अभ्यास सत्र या टीम संयोजन तैयार करते समय यह अंतर सामने आ सकता है। मुझे नहीं लगता कि हमें इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
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गावस्कर ने हालांकि कुंबले की तारीफ की जिनके कोच बनने के बाद भारत ने अधिकतर मैचों में जीत दर्ज की। उन्होंने कहा, ‘कुंबले ने कोच के रूप में बहुत अच्छी भूमिका निभाई मैं केवल परिणामों की बात कर रहा हूं और जब आप पिछले साल के परिणामों पर गौर करते हो तो आप कह सकते हो कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया। गावस्कर ने इसके साथ ही कहा कि कोच उस व्यक्ति को बनाया जाना चाहिए जो भारतीय क्रिकेट के लंबी अवधि के हितों को ध्यान में रखे। उन्होंने कहा, ‘कोच ऐसा होना चाहिए जिसके पास भारतीय क्रिकेट के लिए विजन हो।
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