बेहद कम समय में टीम इंडिया के अगले कपिल देव कहलाने वाले हार्दिक पांड्या के लिए आज का दिन बेहद खास है। 11 अक्टूबर 1993 को गुजरात में जन्में पांड्या आज अपना 26वां जन्मदिन मना रहे हैं। वन-डे हो टी-20 या फिर टेस्ट खेल के तीनों ही फॉर्मेट में अपनी उपयोगिता साबित कर चुके हार्दिक बेहद कम समय में टीम इंडिया की जान बन गए।
हाल ही में लंदन में हुई सर्जरी के बाद हॉस्पिटल में आराम कर रहे पांड्या भले ही आज अपने स्टाइल स्टेटमेंट, बिंदास और आलीशान जीवनशैली के लिए मशहूर हैं, लेकिन कभी इस खिलाड़ी ने जीवन में बेहद कठिन दौर भी देखे हैं। यह हार्दिक पांड्या की कड़ी मेहनत और लगन ही तो है कि मैगी खाकर पेट भरने और उधार की कीट से क्रिकेट खेलना शुरू करने वाले इस खिलाड़ी के पास आज लंबी-चौड़ी फैन फॉलोइंग है।
हार्दिक पांड्या ने विपरीत परिस्थितियों का सामना करके सफलता का मुकाम हासिल किया है। अगर कोई इस क्रिकेटर की निजी जिंदगी के बारे में जाने तो उसे प्रेरणा जरूर मिलेगी कि अगर आप लक्ष्य बना लें तो कड़ी मेहनत से उसे हासिल किया जा सकता है। हार्दिक की कहानी भी काफी प्रेरणादायी है।
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हार्दिक पांडया
- फोटो : BCCI
गुजरात के इस ऑलराउंडर को आईपीएल से पहचान मिली और जैसे ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिला तो उन्होंने इसे दोनों हाथों से लपक लिया। हार्दिक पांड्या अब टीम इंडिया के प्रमुख और विश्व के सक्रिय सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर्स की लिस्ट में शामिल हैं।
वैसे, हार्दिक के मौजूदा सोशल मीडिया पोस्ट देखकर कोई भी यही आकलन करेगा कि वह बेहद आकर्षक जिंदगी जी रहे हैं। हालांकि, पांड्या परिवार का समय हमेशा से ऐसा नहीं रहा। हार्दिक के पिता हिमांशु पांड्या गुजरात के सूरत में फाइनेंस का व्यापार करते थे। उन्हें 1998 में इसे बंद करना पड़ा और पूरा परिवार फिर वडोदरा चला गया।
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क्रुणाल और हार्दिक पांड्या
हार्दिक के पिता हिमांशु पांड्या क्रिकेट के बहुत बड़े दीवाने हैं और वह अपने दोनों बेटों (हार्दिक व क्रुणाल) को मैच दिखाने के लिए ले जाते थे। यहीं से हार्दिक और क्रुणाल को क्रिकेटर बनने की प्रेरणा मिली। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद भी हिमांशु ने अपने बेटों को वडोदरा में किरण मोरे एकेडमी में भेजा, जहां से हार्दिक के क्रिकेटर बनने की यात्रा शुरू हुई।