{"_id":"64c671000df6bcdcbe0ec46e","slug":"stuart-broad-credits-yuvraj-singh-six-sixes-for-making-him-the-type-of-competitor-he-is-now-2023-07-30","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Stuart Broad: स्टुअर्ट ब्रॉड ने युवराज को दिया सफलता का श्रेय; कहा- आज जो भी हूं, उन छह छक्कों की वजह से हूं","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
Stuart Broad: स्टुअर्ट ब्रॉड ने युवराज को दिया सफलता का श्रेय; कहा- आज जो भी हूं, उन छह छक्कों की वजह से हूं
Sun, 30 Jul 2023 07:47 PM IST
शक्तिराज सिंह
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sun, 30 Jul 2023 07:47 PM IST
सार
ब्रॉड ने अपने संन्यास का एलान करने के बाद कहा कि कम उम्र में छह छक्के खाने के बाद उन्होंने बहुत कुछ सीखा और उसी घटना की वजह वो वह खिलाड़ी बन सके, जो आज हैं।
विज्ञापन
स्टुअर्ट ब्रॉड
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
इंग्लैंड के तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड ने संन्यास का एलान कर दिया है। वह एशेज सीरीज में अपने करियर का आखिरी मैच खेल रहे हैं। अपने संन्यास का एलान करने के बाद ब्रॉड ने कई यादगार लम्हों पर बात की। इसमें युवराज सिंह के छह छक्के भी शामिल थे। 2007 टी20 विश्व कप में युवराज सिंह ने ब्रॉड के ओवर में छह छक्के जड़े दिए थे। इस पर ब्रॉड ने कहा कि वह आज जिस तरह के खिलाड़ी हैं, वह उन छह छक्कों की वजह से हैं।
ब्रॉड ने कहा कि उनके करियर की शुरुआत में यह एक कड़वी सीख थी और इससे उन्हें प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बनने में मदद मिली, उन्होंने अच्छे लोगों को क्रिकेट में चमकने का मौका देने के पीछे बुरे दिनों से वापसी करने और खराब प्रदर्शन के महत्व पर जोर दिया।
कई पूर्व भारतीय खिलाड़ियों ने अतीत में कहा है कि ब्रॉड को 2007 टी20 विश्व कप के भारत-इंग्लैंड मैच में युवराज सिंह द्वारा लगाए गए छह छक्कों के लिए याद किया जाएगा। युवराज ने 19 सितंबर 2007 को इतिहास रचा, जब वह पहले टी20 विश्व कप के दौरान एक मैच में एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने। युवराज ने भारत की पारी के 19वें ओवर में ब्रॉड को स्टेडियम के सभी क्षेत्रों में छह छक्के जड़कर भारत का कुल स्कोर 200 रन के पार पहुंचा दिया था।
विज्ञापन
युवराज के छह छक्कों पर ब्रॉड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा "हां, यह स्पष्ट रूप से एक बहुत कठिन दिन था। मैं 21-22 साल का था। मैंने बहुत कुछ सीखा। मैंने उस अनुभव के माध्यम से एक संपूर्ण मानसिक दिनचर्या पर आधारित किया, यह जानते हुए कि एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में मेरे पास बहुत कम समय बचा था। मैंने अपनी तैयारी जल्दी कर दी थी। मेरे पास प्री-बॉल की किसी भी तरह की दिनचर्या नहीं थी। मेरे पास विशेष रूप से कोई फोकस नहीं था, और मैंने अपना 'योद्धा मोड' बनाना शुरू कर दिया, जिसे मैं उस अनुभव के बाद कहता हूं।"
"आखिरकार, मैं चाहता हूं कि ऐसा न होता। मुझे लगता है कि जिस चीज ने वास्तव में मेरी मदद की वह यह था कि टूर्नामेंट के लिहाज से इस मैच की कोई अहमियत नहीं थी। इसलिए ऐसा नहीं लगा कि मैंने अपनी टीम को विश्व कप से बाहर कर दिया है। लेकिन मुझे लगता है इसने मुझे प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए मजबूत किया है और मुझे काफी हद तक आगे बढ़ाया है।"
ब्रॉड ने बेन स्टोक्स को इसका प्रमुख उदाहरण बताते हुए कहा कि हर खिलाड़ी अपने करियर के दौरान उतार-चढ़ाव से गुजरता है। हालांकि, उन्होंने वापसी करने में लचीलेपन के महत्व पर जोर दिया और खराब प्रदर्शन का असर भविष्य के मैचों पर नहीं पड़ने दिया। अपने 15 से 16 साल के लंबे क्रिकेट करियर में ब्रॉड ने इस बात पर जोर दिया कि बुरे दिनों से निपटना महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर उनकी संख्या अच्छे दिनों से ज्यादा होती है। असफलताओं को संभालने की यह क्षमता यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि किसी की प्रतिभा मैदान पर निखर सके।
"आप स्पष्ट रूप से उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं और जब आप स्टोक्स जैसे किसी व्यक्ति के करियर को देखते हैं, तो उसने भी इस तरह का काम किया है। अधिकांश खिलाड़ियों ने किया है। लेकिन अंततः मुझे लगता है कि यह उछाल-वापस लेने की क्षमता है। यह वह क्षमता है जो आपके बुरे दिनों को पीछे छोड़ने में फर्क डाल सकती है। क्योंकि 15-16 साल के करियर में निश्चित रूप से क्रिकेट में अच्छे दिनों की तुलना में बहुत अधिक बुरे दिन हैं। इसलिए आपको यह सुनिश्चित करने के लिए उनसे निपटने में सक्षम होना होगा कि आपके अच्छे दिन फल-फूल सकें।"
विज्ञापन
ब्रॉड ने कहा कि उनके करियर की शुरुआत में यह एक कड़वी सीख थी और इससे उन्हें प्रतिस्पर्धी खिलाड़ी बनने में मदद मिली, उन्होंने अच्छे लोगों को क्रिकेट में चमकने का मौका देने के पीछे बुरे दिनों से वापसी करने और खराब प्रदर्शन के महत्व पर जोर दिया।
विज्ञापन
कई पूर्व भारतीय खिलाड़ियों ने अतीत में कहा है कि ब्रॉड को 2007 टी20 विश्व कप के भारत-इंग्लैंड मैच में युवराज सिंह द्वारा लगाए गए छह छक्कों के लिए याद किया जाएगा। युवराज ने 19 सितंबर 2007 को इतिहास रचा, जब वह पहले टी20 विश्व कप के दौरान एक मैच में एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने। युवराज ने भारत की पारी के 19वें ओवर में ब्रॉड को स्टेडियम के सभी क्षेत्रों में छह छक्के जड़कर भारत का कुल स्कोर 200 रन के पार पहुंचा दिया था।
विज्ञापन
युवराज के छह छक्कों पर ब्रॉड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा "हां, यह स्पष्ट रूप से एक बहुत कठिन दिन था। मैं 21-22 साल का था। मैंने बहुत कुछ सीखा। मैंने उस अनुभव के माध्यम से एक संपूर्ण मानसिक दिनचर्या पर आधारित किया, यह जानते हुए कि एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में मेरे पास बहुत कम समय बचा था। मैंने अपनी तैयारी जल्दी कर दी थी। मेरे पास प्री-बॉल की किसी भी तरह की दिनचर्या नहीं थी। मेरे पास विशेष रूप से कोई फोकस नहीं था, और मैंने अपना 'योद्धा मोड' बनाना शुरू कर दिया, जिसे मैं उस अनुभव के बाद कहता हूं।"
"आखिरकार, मैं चाहता हूं कि ऐसा न होता। मुझे लगता है कि जिस चीज ने वास्तव में मेरी मदद की वह यह था कि टूर्नामेंट के लिहाज से इस मैच की कोई अहमियत नहीं थी। इसलिए ऐसा नहीं लगा कि मैंने अपनी टीम को विश्व कप से बाहर कर दिया है। लेकिन मुझे लगता है इसने मुझे प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए मजबूत किया है और मुझे काफी हद तक आगे बढ़ाया है।"
ब्रॉड ने बेन स्टोक्स को इसका प्रमुख उदाहरण बताते हुए कहा कि हर खिलाड़ी अपने करियर के दौरान उतार-चढ़ाव से गुजरता है। हालांकि, उन्होंने वापसी करने में लचीलेपन के महत्व पर जोर दिया और खराब प्रदर्शन का असर भविष्य के मैचों पर नहीं पड़ने दिया। अपने 15 से 16 साल के लंबे क्रिकेट करियर में ब्रॉड ने इस बात पर जोर दिया कि बुरे दिनों से निपटना महत्वपूर्ण है, क्योंकि अक्सर उनकी संख्या अच्छे दिनों से ज्यादा होती है। असफलताओं को संभालने की यह क्षमता यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि किसी की प्रतिभा मैदान पर निखर सके।
"आप स्पष्ट रूप से उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं और जब आप स्टोक्स जैसे किसी व्यक्ति के करियर को देखते हैं, तो उसने भी इस तरह का काम किया है। अधिकांश खिलाड़ियों ने किया है। लेकिन अंततः मुझे लगता है कि यह उछाल-वापस लेने की क्षमता है। यह वह क्षमता है जो आपके बुरे दिनों को पीछे छोड़ने में फर्क डाल सकती है। क्योंकि 15-16 साल के करियर में निश्चित रूप से क्रिकेट में अच्छे दिनों की तुलना में बहुत अधिक बुरे दिन हैं। इसलिए आपको यह सुनिश्चित करने के लिए उनसे निपटने में सक्षम होना होगा कि आपके अच्छे दिन फल-फूल सकें।"