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पुलिस को पड़ी फटकार, श्रीसंत-चंडीला गए तिहाड़ जेल
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 28 May 2013 10:33 PM IST
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अदालत ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को दूसरा झटका देते हुए क्रिकेटर श्रीसंत की रिमांड अवधि बढ़ाने से इंकार कर दिया।
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अदालत ने कहा बिना ठोस आधार के रिमांड अवधि बढ़ाना अभियुक्त श्रीसंत के साथ अन्याय होगा। इतना ही नहीं अदालत ने पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने श्रीसंत के अलावा अजीत चंदीला, अश्विनी अग्रवाल व चंद्रेश पटेल को 4 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया। वहीं, अदालत ने अंकित चव्हाण को विवाह के लिए जमानत प्रदान करने से इंकार कर दिया।
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साकेत स्थित मुख्य मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट लोकेश कुमार ने पुलिस के उस तर्क को खारिज कर दिया कि अभियुक्त श्रीसंत को मुंबई होटल से श्रीसंत का सामान गायब करने वाले अभिषेक शुक्ला से आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करनी है। अदालत ने कहा कि पुलिस के ही अनुसार सामान शुक्ला ने अभियुक्त जीजू के निर्देश पर गायब किया था न कि श्रीसंत के। जबकि श्रीसंत उस समय पुलिस की हिरासत में था।
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अदालत ने पुलिस व अभियोजन पक्ष के बीच तालमेल न होने पर भी नारागजी जताई। अदालत ने कहा, 'जांच अधिकारी रिमांड पेपर में मात्र श्रीसंत का रिमांड बढ़ाने के लिए पांच लाख रुपये बरामदगी का तर्क रख रहे है, जबकि सरकारी वकील होटल से गायब इलेक्ट्रोनिक सामान बरामद करने का तर्क रख रहे हैं।' अदालत ने कहा वे पुलिस व सरकारी वकील के तर्कों पर सहमत नहीं है और श्रीसंत का पहले ही तीन बार रिमांड लिया जा चुका है।
अदालत ने कहा अब पुन: उसकी रिमांड अवधि बढ़ाने का कोई आधार नहीं है अत: वे पुलिस के आवेदन को खारिज कर सभी चारों को 4 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजते हैं।
इससे पूर्व, जांच अधिकारी व सरकारी वकील राजीव मोहन ने अदालत से श्रीसंत की रिमांड अवधि 2 दिन के लिए बढ़ाने का आग्रह करते हुए बताया कि श्रीसंत की गिरफ्तारी के बाद अभियुक्त जीजू व राजीव के कहने पर अभिषेक शुक्ला नाम का व्यक्ति उनके कमरे में गया व इलेक्ट्रोनिक सामान इत्यादि हटा दिया था। उन्होंने शुक्ला सुबह 1.30 बजे मुंबई से आकर पूछताछ में शामिल हुआ है। उन्होंने कहा श्रीसंत को उसके सामने बिठाकर पता करना है कि क्या सामान ले गया था।
अदालत के पूछने पर वे स्पष्ट नहीं कर पाए कि जब श्रीसंत उनकी हिरासत में था तो वह कैसे बता सकता कि क्या सामान ले गया था। इसके अलावा यदि कोई सामान बरामद भी हो गया तो कैसे साबित होगा कि वह श्रीसंत का है। अभियोजन पक्ष ने कहा श्रीसंत ने शुक्ला का पैन कार्ड जयपुर में इस्तेमाल किया था।
अदालत ने इस तर्क को भी खारिज करते हुए कहा पैन कार्ड इस्तेमाल करना कोई अपराध नहीं है जबकि आप ही कह रहे है कि श्रीसंत ने स्वयं इस्तेमाल नहीं किया। ऐसे में रिमांड नहीं दिया जा सकता।