सहवाग ने संन्यास के दिन बताया किस गेंदबाज से लगता था डर
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क्रिकेट को जेंटलमैन गेम कहा जाता है लेकिन इस खेल में कुछ ही खिलाड़ी जेंटलमैन रहे हैं जिसमें एक बड़ा नाम है वीरेंद्र सहवाग का। अब सहवाग ने भी क्रिकेट से संन्यास ले लिया है। सहवाग ने 20 अक्टूबर को अपने 37वें जन्मदिन के अवसर पर संन्यास का ऐलान किया।
संन्यास लेने की घोषणा करने के साथ ही उन्होंने अपने टि्वटर हैंडल पर 2 पेज का एक पत्र पोस्ट किया। इस पत्र के जरिए उन्होंने अपने दिल की बात कही और सभी का शुक्रिया अदा किया। आप भी पढ़ें कि उन्होंने अपने पत्र में क्या लिखा है।
उन्होंने पत्र की शुरुआत अपने संन्यास की बात से की। उन्होंने लिखा, "मैंने हमेशा वही किया जो मुझे अच्छा लगा, ना कि वो जो लोगों ने अच्छा समझा। ईश्वर की कृपा मेरे साथ रही और वह सब होता गया जो मैंने चाहा। क्रिकेट के मैदान में भी और मेरी जिंदगी में भी। मैंने कुछ दिन पहले फैसला किया कि मैं अपने 37वें जन्मदिन पर रिटायर हो जाऊंगा। इसलिए, आज मैं अपने परिवार के साथ वक्त बिताते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉरमेट और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) से रिटायरमेंट की घोषणा करता हूं। क्रिकेट मेरी जिंदगी है और रहेगी।"
"भारत के लिए खेलना एक यादगार यात्रा थी और मैंने टीम के साथियों और भारतीय क्रिकेट के चाहने वालों के लिए उस यात्रा को और यादगार बनाने की कोशिश की। मैं खुशकिस्मत रहा कि मुझे देश के लिए दिग्गज खिलाड़ियों जैसे सचिन, द्रविड़, गांगुली, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण, जवागल श्रीनाथ, जहीर खान, एमएस धोनी, हरभजन सिंह और युवराज सिंह के साथ खेलने का मौका मिला।"
"मुझे इनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। मेरे आदर्श सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर और कपिल देव रहे हैं। इनके खेल को देखकर मैं बड़ा हुआ। मेरी कोशिश हर गेंद पर रन बनाने की थी। मैं हमेशा सकारात्मक माइंडसेट के साथ उतरता था। इसी की वजह से मैं रन बनाने में सक्षम हो पाता था। मैंने बहुत रन बनाए हैं और मैं अपने करियर से खुश हूं। मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर होकर खुश हूं। मैं क्रिकेट को मिस करूंगा।"
"मुझे सिर्फ एक गेंदबाज से डर लगता था"
उन्होंने आगे लिखा, "मेरे मुताबिक रिटायर होने का यह सही समय था। पहली बार 300 रन बनाना, 2011 विश्वकप खिताब जीतना और श्रीलंका के खिलाफ 201 रन की पारी यादगार रही। मैंने जब करियर के पहले टेस्ट मैच में 100 रन बनाए तो लोगों को लगने लगा कि मैं टेस्ट क्रिकेट खेल सकता हूं। इसलिए सबसे यादगार पल मेरे लिए यही था। रिटायरमेंट के बाद भी शायद कमेंटरी या अकादमी में कोचिंग स्टाफ के रूप में जुड़ा रहूंगा।"
"आज मैं अपने पिता को मिस कर रहा हूं। जब मैंने अपनी क्रिकेट यात्रा शुरू की थी तब वह वहां मौजूद थे। मैं चाहता था कि वह आज भी मेरे साथ रहते, लेकिन मुझे पता है कि वह जहां भी हैं, मुझे बहुत गर्व से देख रहे हैं। मैं अपने कोच एएन शर्मा सर, मां, पत्नी आरती और बच्चों आर्यवीर व वेदांत का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिनकी उपस्थिति से मुझे मजबूती मिली।"
सौरव गांगुली की कप्तानी में टेस्ट करियर की शुरुआत करने वाले वीरेंद्र सहवाग ने कप्तान गांगुली की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा, "मैं पूर्व कप्तान गांगुली का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जिन्होंने मुझपर विश्वास जताया और मुझे दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2001 में टेस्ट में पदार्पण का मौका दिया। ‘दादा’ ने मेरे लिए ओपनिंग स्लॉट का त्याग किया। उन्होंने मेरे अंदर विश्वास जताया। इसलिए धन्यवाद सौरव दा। मैं आपका आभारी हूं। आपने मुझ में एक टेस्ट खिलाड़ी की छवि देखी। यदि मैं टेस्ट नहीं खेलता तो मैं इतने सारे रन नहीं बना पाता।"
"मैंने कुछ मैच बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ खेले हैं उनमें वसीम अकरम, वकार यूनुस, शोएब अख्तर, मुथैया मुरलीधरन, ग्लेन मैक्ग्रा आदि हैं जिनके खिलाफ मैंने काफी रन बनाए हैं इनको टीम और मीडिया में आदर के साथ देखा जाता है। मुझे केवल एक गेंदबाज मुरलीधरन का सामना करने से बहुत डर लगता था।"
"मैंने हमेशा वही किया जिसे मैंने सही महसूस किया। वो नहीं जिसे दूसरे सही समझते थे। मैं जो चाहता था मैदान में और जिंदगी में वो करने में सफल रहा। क्रिकेट मेरी जिंदगी रहा है और रहेगा। मेरा मानना है कि मैंने अपने साथियों और समर्थकों के लिए इसे और यादगारपूर्ण बनाने की कोशिश की और शायद ऐसा करने में सफल रहा। आप सभी का प्यार, समर्थन और बेहतरीन यादों के लिए शुक्रिया...।"