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50 वां टेस्ट खास बनाना चाहेंगे पुजारा, सहवाग और द्रविड़ को छोड़ सकते हैं पीछे
presented by शरद मिश्र
Updated Thu, 03 Aug 2017 01:23 PM IST
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चेतेश्वर पुजारा
- फोटो : twitter
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टीम इंडिया के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा गुरुवार को 50 वां टेस्ट खेलते हुए अगर 4000 रन पूरे कर लिए तो वह पारी के आधार पर सबसे तेज 4000 रन बनाने के मामले में द्रविड़ की बराबरी पर आ जाएंगे। पुजारा की यह 84 वीं पारी है। द्रविड़ ने भी इतनी पारियों में 4000 रन बनाए थे।हालांकि उन्होंने 48 टेस्ट में ही यह आंकड़ा पार कर लिया था। इस तरह भारत की तरफ से टेस्ट में सबसे तेज 4000 रन बनाने के मामले में पुजारा और द्रविड़ संयुक्त रूप से चौथे स्थान पर आ जाएंगे। पुजारा से इस मामले में सिर्फ वीरेंद्र सहवाग (79 पारी) और सुनील गावस्कर (81 पारी) आगे रहेंगे। पुजारा इस पारी के दौरान रनों के मामले में सहवाग और द्रविड़ को पीछे छोड़ सकते हैं। द्रविड़ ने 50 टेस्टों की 88 पारियों में 4135 रन बनाए हैं। सहवाग ने इतने ही टेस्ट में 79 पारियों में 4103 रन बनाए हैं।
पुजारा ने अब तक टेस्ट में 12 शतक और 15 अर्धशतक लगाए हैं। पुजारा का सर्वोच्च स्कोर 206* रन रहा है। पुजारा को बड़ी पारी खेलने के लिए जाना जाता है और इसका सबूत इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 12 में 6 बार 150 या इससे बड़ी पारी खेली है। पुजारा ने कहा कि अभी तक का टेस्ट सफर शानदार रहा है। देश के लिये 50 वें टेस्ट मैच में खेलना मेरे लिये गर्व का क्षण है। गौरतलब है कि पुजारा के लिये उनका सात साल का अंतरराष्ट्रीय कैरियर 2015 तक मुश्किलों से भरा रहा। शुरूआती चरण में उन्हें घुटने की चोट का सामना करना पड़ा।
अपनी कामयाबी में पिता के योगदान को याद करते हुए पुजारा कहते हैं कि मेरे पिता ने हमेशा मेरे क्रिकेट को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई। वह मेरे सर्वश्रेष्ठ आलोचक रहे हैं। पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ साल 2010 में अपना पहला टेस्ट खेला था।
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पुजारा ने अब तक टेस्ट में 12 शतक और 15 अर्धशतक लगाए हैं। पुजारा का सर्वोच्च स्कोर 206* रन रहा है। पुजारा को बड़ी पारी खेलने के लिए जाना जाता है और इसका सबूत इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 12 में 6 बार 150 या इससे बड़ी पारी खेली है। पुजारा ने कहा कि अभी तक का टेस्ट सफर शानदार रहा है। देश के लिये 50 वें टेस्ट मैच में खेलना मेरे लिये गर्व का क्षण है। गौरतलब है कि पुजारा के लिये उनका सात साल का अंतरराष्ट्रीय कैरियर 2015 तक मुश्किलों से भरा रहा। शुरूआती चरण में उन्हें घुटने की चोट का सामना करना पड़ा।
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अपनी कामयाबी में पिता के योगदान को याद करते हुए पुजारा कहते हैं कि मेरे पिता ने हमेशा मेरे क्रिकेट को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई। वह मेरे सर्वश्रेष्ठ आलोचक रहे हैं। पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ साल 2010 में अपना पहला टेस्ट खेला था।
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