पहला सेमीफाइनल: जानिए किसमें कितना है दम?
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बुधवार को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में पहला सेमीफाइनल खेला जाएगा। बल्लेबाजों से मजबूत इंग्लैंड टीम के सामने है, हर तरह से संतुलित टीम न्यूजीलैंड। लेकिन ऐसा नहीं कि न्यूजीलैंड की कोई कमजोरी नहीं।
पहले बात करते हैं, टूर्नामेंट में अभी तक एक भी मैच न गंवाने वाली टीम न्यूजीलैंड यानि ब्लैक कैट। चाहे वनडे हो या टी-20 दोनों ही फॉर्मेट में यह टीम खिताब अपने नाम नहीं कर सकी है। हालांकि इस वक्त यह टीम वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी दावेदार के रुप में उभरी है।
न्यूजीलैंड के ट्रैक रिकॉर्ड पर नजर डाले तो वनडे में यह 2015 के फाइनल में पहुंची है। जबकि 1975, 1979, 1992, 1999 और 2011 में सेमीफाइनल तक पहुंची है। वहीं, टी-20 में इस टीम का सर्वश्रेष्ठ सफर सबसे पहले वर्ल्ड कप 2007 में सेमीफाइनल तक रहा।
ब्लैक कैट की मजबूती इस वक्त उसकी बल्लेबाजी ही नहीं संतुलित गेंदबाजी भी है। सिर्फ तेज गति ही नहीं स्पिनिंग ने भी इस टीम ने दिग्गजो को चौंकाया है। पहले लीग मैच में स्पिन खेलने में माहिर भारतीय टीम को न्यूजीलैंड ने स्पिनिंग के दम पर ही मात दी। टीम में बेहतरीन स्पिनरों के तौर पर नॉथन मैकुलम, मिचेल सेंटनर और भारतीय मूल के इश सोढ़ी उभरे हैं।
न्यूजीलैंड की कमजोरी
हालांकि इंग्लैंड के बल्लेबाज कीवी गेंदबाजों की लाइन और लेंथ बिगाड़ सकते हैं। जोए रूट, जोस बटलर और कप्तान इयोन मोर्गन जैसे बल्लेबाज अपने क्लास का जादू दिखा सकते हैं, जैसा इन्होंने पिछले मुकाबलों में दिखाया। इंग्लैंड हालांकि सिर्फ एक मुकाबला वेस्टइंडीज के हाथों हारी हो लेकिन बल्लेबाजों ने सभी मोर्चो में सराहनीय प्रदर्शन किया है।
वहीं बल्लेबाजी में न्यूजीलैंड ओपनर मार्टिन गुप्टिल, कप्तान केन विलियमसन माहिर खिलाड़ी है, लेकिन अगर वर्ल्ड कप की बात करें तो इक्का-दुक्का मुकाबलों में इनका संतोषजनक नहीं रहा। गुप्टिल पिछले 5 मैचों में से सिर्फ दो मुकाबलों ही 40 से ऊपर का स्कोर करने में कामयाब रहे। वही हाल विलियमसन का भी है।
इंग्लैंड की ताकत और कमजोरी
इंग्लैंड का वर्ल्ड कप इतिहास देखें तो वनडे में यह एक भी खिताब पाने में नाकाम रही। हालांकि फाइनल में 1979, 1987 और 1992 तीन बार पहुंची। टी-20 में 2010 में वेस्टइंडीज में हुए फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया को मात देकर विजेता बनी थी। 2010 में हुए टूर्नामेंट में इंग्लिश टीम ने कुल खेले 30 मुकाबलों में से 14 में जीत हासिल की जबकि 15 में हार झेलनी पड़ी।
इंग्लैंड टीम की मजबूती इस वक्त लंबा बैटिंग लाइन-अप है। टीम में 6 बल्लेबाज हैं जो किसी भी लक्ष्य को भेदने में सक्षम हैं। एडम हेल्स, जोए रूट, जोस बटलर और कप्तान इयोन मोर्गन लंबी और बड़ी पारी खेलने मे माहिर हैं। टीम में तुरूप का इक्का ऑलराउंडर मोइन अली हैं, जो गेंद और बल्ले दोनों से मैच का रुख पलट सकते हैं।
हालांकि इंग्लैंड की सबसे बड़ी कमजोरी उसका कम स्पिनिंग अटैक है। सिर्फ दो स्पिनरों के दम पर दक्षिण एशियाई पिचों पर उतरना बड़ा जोखिम हो सकता है। कीवी बल्लेबाज अपनी तेज होमग्राउंड पिचों के चलते तेज गेंदबाजों को खेलने में माहिर हैं।