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धोनी को जीत की निशानी ले जाने से अंपायर ने क्यों रोका?

Tue, 17 Feb 2015 10:41 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला दिल्ली Updated Tue, 17 Feb 2015 10:41 AM IST
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MS dhoni stopped to take bells after match against pakistan

भारत और पाकिस्तान के बीच महामुकाबले में जीत मिलने के बाद हर भारतीय खिलाड़ी इस यादगार जीत से जुड़ी कोई न कोई निशानी अपने साथ रखना ही चाहता है। अक्सर आपने मैच खत्म होने के बाद देखा होगा कि खिलाड़ी मैदान पर लगे स्टंप्स को उखाड़कर अपने साथ लेते जाते हैं। पिछले वर्ल्ड कप में खिताबी जीत के बाद टीम इंडिया के कई खिलाड़ी स्टंप उखाड़कर ले गए थे।

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रविवार को वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान छठी बार आमने-सामने हुए थे और इससे पहले टीम इंडिया अपने सभी पांचों मुकाबले जीत चुकी थी। अपने अजेय रिकॉर्ड को बनाए रखने के लिए भारत को यह मैच हर हाल में जीतना था जिसमें वह कामयाब रहा। भारत की यह जीत इस मायने में बेहद खास रहा क्योंकि नवंबर से टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया में है और उसे इस दौरान एक भी जीत नसीब नहीं हुई थी। उसे इस दौर में पहली जीत नसीब हुई भी तो वह भी पाक जैसी टीम के खिलाफ।
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दूसरी ओर, यह बात तो किसी से छिपी नहीं है कि टीम इंडिया की हर खास जीत के बाद भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को स्टंप इकट्ठा करने का शौक है। अपनी इसी आदत से मजबूर धोनी जब पाक के खिलाफ मिली जोरदार जीत के बाद स्टंप्स पर लगी बेल्स को उठाकर लौट रहे थे तो मैदानी अंपायर ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया और धोनी को स्टंप वहीं छोड़कर वापस लौटना पड़ा।

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पाक पर जीत के बाद बेल्स भी नहीं ले जा पाए कप्तान धोनी

MS dhoni stopped to take bells after match against pakistan

अब तक हर बड़ी जीत के बाद टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को विकेट उखाड़कर अपने घर ले जाने की आदत थी लेकिन पाक के खिलाफ जीत के बाद वह ऐसा नहीं कर सके।

पाक पर जीत ही क्यों अगर वह वर्ल्ड कप में फिर से जीतते हैं तो भी स्टंप उखाड़कर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इन सबके पीछे का कारण है स्टंप्स का काफी महंगा होना। वर्ल्ड कप में एलईडी स्टंप्स और बेल्स इस्तेमाल की जा रही हैं जो टच सेंसेटिव है।

रविवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पर जीत के बाद धोनी ने स्टंप पर लगी एक बेल्स जीत की निशानी के तौर पर उठा ली। मगर तभी स्क्वाएर लेग अंपायर इयान गाउल्ड उनके पास आए और दोस्ताना लहजे में उनसे कुछ बात की, जिसके बाद धोनी ने बेल्स लेने का इरादा छोड़ दिया।

दरअसल, जीत के बाद किसी को भी स्टंप या बेल्स न देने की वजह इसका बेहद महंगा होना है।

ऐसे में जब तक आईसीसी से इस बारे में कोई अनुमति नहीं मिलती, धोनी जीत की यादगार के तौर पर स्टंप या बेल्स रखने का अपना शौक पूरा नहीं कर पाएंगे। एलईडी स्टंप्स को बनाने वाले एकरमैन का कहना है कि यह पूरा सिस्टम काफी महंगा होने के कारण स्टंप या बेल्स खिलाड़ियों को देने की अनुमति नहीं दी जाती है। एकरमैन को एलईडी स्टंप्स का अपना विचार साकार करने में तीन साल लग गए थे।

2013 में सबसे पहले हुआ इस्तेमाल

MS dhoni stopped to take bells after match against pakistan
आप एक एलईडी स्टंप्स की कीमत जानकार चौंक जाएंगे। जहां एक एलईडी स्टंप्स के सेट की कीमत 24 लाख रुपये है, वहीं बेल्स की एक जोड़ी की कीमत एक आईफोन के करीब 50 हजार रुपये है।

क्रिकेट मैच में एलईडी स्टंप्स का इस्तेमाल सबसे पहले साल 2013 में बिग बैश टूर्नामेंट के दौरान हुआ। इसके बाद इसका इस्तेमाल 2014 में बांग्लादेश में हुए टी-20 वर्ल्ड कप में प्रयोग के तौर पर किया गया जो काफी सकारात्मक रहा।

बिग बैश टूर्नामेंट में भले ही इसका इस्तेमाल शुरू हो गया लेकिन इसे असली पहचान मिली टी-20 वर्ल्ड कप से। गेंद के स्टंप्स पर लगने के साथ इसके अचानक चमकने पर दर्शकों को काफी आश्चर्य हुआ था।
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