'रांची और मोहाली की हार के झटके टीम इंडिया को नींद से जगाने के लिए जरूरी थे'
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देश के पूर्व धुरंधर टेस्ट लेफ्ट आर्म स्पिनर मनिंदर सिंह ने कहा कि मेहमान ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच वन-डे मैचों की क्रिकेट सीरीज के शुरू के दो मैच जीतने के बाद अति आत्म विश्वास की शिकार मेजबान टीम इंडिया के लिए रांची और मोहाली में हार के झटके नींद से जगाने के लिए जरूरी थे।
मनिंदर ने मंगलवार को 'अमर उजाला' से कहा, 'टीम इंडिया हैदराबाद और नागपुर में सीरीज शुरू के दो वन-डे जीते तो इसके बाद ही वह रांची और मोहाली में अगले दो वन-डे में आत्मविश्वास की बजाय अति आत्मविश्वास की शिकार लगी। मुझे लगा कि भारतीय टीम कहीं ढीली पड़ गई थी और यही संभवत: उसकी अगले दो वन-डे में हार का कारण बनी।'
'हार के दोनों झटके भारत के नींद से जगाने के लिए जरूरी थे। भारतीय टीम ढील से बची होती तो मुमकिन है कि इन दोनों वन-डे में नतीजा शायद भारत के हक में होता। भारत को सीरीज जीतने के लिए यहां ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बुधवार को यहां फिरोजशाह कोटला मैदान पर निर्णायक पांचवें और अंतिम वन-डे में अति आत्मविश्वास जैसी किसी भी तरह की ढिलाई से बचते हुए एकाग्र होकर खेलने की कोशिश करनी चाहिए।'
उन्होंने कहा, 'इस वन-डे सीरीज के मोहाली पिछले चौथे वन-डे में ओस से भी खासतौर पर स्पिनरों को खासी दिक्कत पेश आई। भारत के गेंदबाजों द्वारा रांची में तीसरे वन-डे में सवा तीन सौ रन से अधिक रन लुटाने और मोहाली में चौथे वन-डे में 358 रन को बचाने में नाकाम रहने के बावजूद मेरा यह मानना है कि कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चहल की स्पिन जोड़ी ही भारतीय स्पिनरों की मौजूदा सर्वश्रेष्ठ जोड़ी है।'
'इस जोड़ी को रात की ओस के कारण मोहाली में गेंदबाजी में खासी दिक्कत पेश आई। भारत को विश्व कप में चहल और कुलदीप यादव की स्पिन जोड़ी पर भरोसा करना होगा। भारत के कप्तान विराट कोहली ने वन-डे में 40 सेंचुरी तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए जड़ी तो ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्हें विश्व कप के मद्देनजर प्रयोग की दुहाई देकर चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने के प्रयोग की कतई जरूरत नहीं थी। भारत को यह वन-डे सीरीज जीतने के लिए अब यहां अंतिम वन-डे में किसी वेवजह के प्रयोग से बचने की दरकार है।'
धोनी बतौर विकेटकीपर भारत के लिए विश्व कप के मद्देनजर बहुत जरूरी हैं
मनिंदर कहते हैं, 'पहले मैं धोनी की बल्लेबाजी को लेकर कुछ चिंतित था। मैं अब यह कहूंगा कि धोनी बतौर विकेटकीपर भारत के लिए विश्व कप के मद्देनजर बहुत जरूरी हैं। आप विश्व कप जैसे बड़े मंच पर वन-डे में यंग ऋषभ पंत पर विकेटकीपर के रूप में अभी भरोसा नहीं कर सकते हैं। उन्हें आप विश्व कप जैसे बड़े मंच पर उतारेंगे तो मुश्किल में फंसने की आशंका ज्यादा है।'
धोनी की मौजूदगी में बतौर कप्तान विराट कोहली भारत की 'कप्तानी' की अपनी गाड़ी बेफिक्र होकर चलाते हैं क्योंकि उनके जेहन में रहता है कि धोनी के रूप में उनकी बगल में 'अनुभवी ड्राइवर' बैठा हुआ है। कोई भी मुश्किल मोड़ आएगा तो धोनी 'गाड़ी' संभाल लेंगे। धोनी को मौजूदा सीरीज के अंतिम दो वन-डे में आसाम देने की कोई तुक नहीं थी। उनकी गैर मौजूदगी अंतिम दो वन-डे में मुश्किल क्षणों में विराट कोहली को धोनी की कमी अनुभवी मार्गदर्शक के रूप में बहुत खली।'
'खासतौर पर मोहाली में जब ऑस्ट्रेलिया ने कप्तान एरोन फिंच और शॉन मार्श के रूप में शुरू के दो विकेट 12 रन पर गंवा दिए और उसके बाद उस्मान ख्वाजा और हैंडकॉम्ब की जोड़ी के जमने का कारण कप्तान विराट कोहली का कामचलाउ केदार जाधव और विजय शंकर से गेंदबाजी कराना रहा।'
'जब यह ऑस्ट्रेलियाई जोड़ी कुछ ही जमती लग रही थी तो तब भारत ने अपने कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चहल जैसे स्पिनरों को लगा कर इस जोड़ी को तोडने की कोशिश की होती तो ज्यादा बेहतर होता। मैदान पर आक्रामकता जरूरी है लेकिन एक हद तक ही। जीत के बाद भी जश्न मनाने में गरिमा की जरूरी है लेकिन हमारे कई खिलाड़ी इसमें भी सीमा लांघ जाते हैं। विकेट चटकाने के बाद केदार जाधव के बेवजह के आक्रामक तेवर गैरजरूरी थे।'