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संविधान में बदलाव की तैयारी में BCCI, लोढ़ा कमेटी के सचिव बोले- सुप्रीम कोर्ट का होगा अपमान

Tue, 12 Nov 2019 07:10 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: मुकेश कुमार झा Updated Tue, 12 Nov 2019 07:10 PM IST
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Lodha panel secretary says If BCCI changes reformed constitution, it would be ridiculing SC
बीसीसीआई, स्पोर्ट्स - फोटो : SELF

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) लोढ़ा कमेटी द्वारा बनाए गए संविधान में जरूरी बदलाव करने की तैयारी में है। इस पर लोढ़ा कमेटी के सचिव गोपाल शंकरनारायणन ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किए गए सुधारों में बदलाव करने की बोर्ड की योजना देश की सर्वोच्च न्यायिक सत्ता का मजाक उड़ाना होगा।

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शंकरनारायणन का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की अब भी इस मामले में केंद्रीय भूमिका है और उसे उचित कदम उठाने चाहिए नहीं तो बीसीसीआई के प्रशासनिक ढांचे में सुधार करने के उसके सारे प्रयास बेकार चले जाएंगे।
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गोपाल शंकरनारायणन  ने कहा, 'अगर ऐसा करने की अनुमति दी जाती है और अगर अदालत में इसे चुनौती नहीं दी जाती और न्यायालय इस पर संज्ञान नहीं लेता है तो इसका मतलब न्यायालय और पिछले वर्षों में किए गए कार्यों का उपहास करना होगा।'
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संशोधित संविधान में बदलाव का प्रस्ताव शनिवार को सामने आया जब बीसीसीआई के नए सचिव जय शाह ने बोर्ड की एक दिसंबर को मुंबई में होने वाली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) के लिए एजेंडा तैयार किया।

सबसे प्रमुख संशोधनों में पदाधिकारियों के लिए विश्राम की अवधि (कूलिंग ऑफ पीरियड) से जुड़े नियमों को बदलना, अयोग्यता से जुड़े विभिन्न मानदंडों को शिथिल करना और संविधान में बदलाव करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी लेने की जरूरत को समाप्त करना शामिल हैं।

शंकरनारायणन ने कहा, 'इसका मतलब होगा कि जहां तक क्रिकेट प्रशासन और सुधारों की बात है तो फिर से पुराने ढर्रे पर लौट जाना। अधिकतर महत्वपूर्ण बदलावों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।'

शंकरनारायणन लोढ़ा समिति के सचिव थे जिसे सुप्रीम कोर्ट ने देश के क्रिकेट प्रशासन में सुधार करने के लिए 2015 में नियुक्त किया था। पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर. एम लोढ़ा इस समिति के अध्यक्ष थे जिसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आर.वी रवींद्रन और अशोक भान भी शामिल थे। शंकरनारायणन ने कहा कि अगर बदलावों को अपनाया जाता है तो उन्हें अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

उन्होंने कहा, 'वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि जब वो (बीसीसीआई) (संविधान में) बदलाव करेगा तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की जरूरत नहीं होगी।'
 

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