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DDCA Election: दिल्ली क्रिकेट संघ में दोबारा चुनाव कराने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे कीर्ति आजाद, गाइडलाइन में भी बदलाव की मांग

Fri, 14 Jan 2022 03:30 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शक्तिराज सिंह Updated Fri, 14 Jan 2022 03:30 PM IST
सार

पूर्व क्रिकेटर कीर्ती आजाद ने अपनी याचिका में कहा है कि दिल्ली जिला क्रिकेट संघ में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की व्यवस्था होनी चाहिए। उनकी याचिका के आधार दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली क्रिकेच संघ के प्रतिनिधियों को नोटिस भी जारी किया है।

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Kirti Azad moves Delhi HC, seeks fresh election of DDCA, appointment of administrator
कीर्ति आजाद

विस्तार

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद की याचिका के आधार पर दिल्ली जिला क्रिकेट संघ को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने डीडीसीए, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और अन्य से बुधवार तक जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। हालांकि, केंद्र सरकार के स्थायी वकील अमित महाजन ने इस मामले में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को एक पक्ष के रूप में पेश करने पर आपत्ति जताई है। डीडीसीए की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी और अधिवक्ता टी सिंहदेव ने भी याचिका के आधार पर सुनवाई का विरोध किया।
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कीर्ति आजाद ने अपनी याचिका में डीडीसीए की मतदाता सूची को एक परिवार-एक वोट के आधार पर पुनर्गठित करने और उसके बाद नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश देने की भी मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने डीडीसीए के मामलों को संभालने के लिए एक प्रशासक की नियुक्ति के लिए निर्देश देने की मांग भी की थी।
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कीर्ति आजाद की याचिका में क्या है
उन्होंने कहा कि डीडीसीए की सदस्यता देने की तदर्थ प्रणाली को रोका जाए और आवेदकों की पारदर्शी प्रतीक्षा सूची सहित एक पारदर्शी और निष्पक्ष सदस्यता प्रणाली लागू की जाए। साथ ही केवल उन व्यक्तियों को चुनाव में मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए जिन्होंने समय पर अपने क्लब सदस्यता शुल्क का भुगतान किया है। कीर्ति आजाद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि वर्तमान याचिका दायर करने का प्राथमिक कारण डीडीसीए की उचित, पारदर्शी और निष्पक्ष सदस्यता प्रणाली की विफलता है। वर्तमान में, सदस्यता कैसे दी जाती है, इस बारे में कोई दिशानिर्देश/मानदंड नहीं हैं। सदस्यों के लिए कोई प्रतीक्षा सूची भी नहीं है, जिसके जरिए यह पता किया जा सके कि सदस्यता प्राप्त करने में उन्हें कितना समय लगेगा। 
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डीडीसीए में चुनिंदा परिवारों का कब्जा
आजाद ने आरोप लगाया कि सदस्यता प्रक्रिया नई सदस्यता प्राप्त करने में तदर्थवाद से ग्रस्त है और डीडीसीए अधिकारियों की सनक और लालच के अधीन है। चुनिंदा लोगों और उनके परिवारों को सदस्यता देकर एक निहित स्वार्थ बनाया जाता है, जिससे परिवार का एकाधिकार बनता है। डीडीसीए के कई सदस्य एक ही पते के हैं, जैसे कि नरिंदर कुमार बत्रा और सीके खन्ना के मामले में जिनके परिवारों में डीडीसीए के कई सदस्य हैं। नरिंदर कुमार बत्रा के परिवार में 17 सदस्य हैं और सीके खन्ना के परिवार में 25 से अधिक सदस्य हैं।

चुनाव जीतने के लिए दी जाती है सदस्यता
विकास सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए डीडीसीए का पिछला चुनाव भी लड़ा था। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि सदस्यता केवल चुनावों को हथियाने के उद्देश्य से दी जाती है। इस अन्यायपूर्ण प्रक्रिया ने कुछ लोगों को चुनाव में हावी होने के लिए प्रेरित किया क्योंकि उनके समर्थकों के परिवारों में कई सदस्य हैं। यह चुनावों में मतदान पैटर्न को बहुत अधिक प्रभावित करता है और एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के रास्ते में आता है। यह बाहरी लोगों को सदस्य बनने के लिए अनिश्चित काल तक इंतजार करना पड़ता है।

अपने फायदे के लिए पद का उपयोग कर रहे अधिकारी 
याचिका में आगे कहा गया है कि वर्तमान सदस्यता प्रक्रिया या उसके अभाव का उपयोग डीडीसीए के अधिकारी अपने फायदे के लिए करते हैं क्योंकि वे अक्सर अपने रिश्तेदारों को एसोसिएशन में विभिन्न आधिकारिक पदों पर रखते हैं। कई सदस्यों ने अपने कर्मचारियों को डीडीसीए के सदस्यों के रूप में नामांकित भी करवाया है।

हर टूर्नामेंट में टीम का प्रदर्शन खराब
याचिका में कहा गया कि डीडीसीए में भ्रष्ट लोग टीम चयन में भी धांधली करते हैं और अपनी मर्जी के हिसाब से खिलाड़ियों को टीम के अंदर-बाहर करते हैं। इसी वजह से टीम विजय मर्चेंट, वीनू मांकड़ सहित खेल की हर प्रतियोगिता के शुरुआती दौर में ही बाहर हो जाती है। कूचबिहार, सीके नायडू, रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे, सैयद मुश्ताक अली आदि प्रतियोगिताओं में दिल्ली का प्रदर्शन बेहतर करने के लिए, इस मनमानी सदस्यता प्रक्रिया एक नई सदस्यता प्रणाली शामिल की जानी चाहिए।


इसके अलावा, मौजूदा सदस्यों के बीच, मतदान एक परिवार में एक वोट तक सीमित होना चाहिए। यह सुनिश्चित करेगा कि डीडीसीए पदों को सत्ता के स्थायी पदों के रूप में नहीं माना जाएगा और कुछ के हाथों में बनाए गए एकाधिकार को भी समाप्त कर दिया जाएगा।
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