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आखिर बर्फीले पानी से क्यों नहाते हैं क्रिकेटर्स, जानिए क्या होता है आइस बाथ?

Thu, 10 Oct 2019 09:34 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Published by: अंशुल तलमले Updated Thu, 10 Oct 2019 09:34 AM IST
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INDvSA: Ice baths is secret of Mohammad Shami success in day five of Vizag Test
आइस बाथ लेते मोहम्मद शमी - फोटो : ट्विटर

'एक काफी नहीं, पांच चाहिए!'.... 'हां, ले लेंगे'। 



यह बातचीत भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच रवि शास्त्री और तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के बीच विशाखापट्टनम टेस्ट के पांचवें और आखिर दिन होती है। टेम्बा बवूमा को आउट करने के बाद जैसे ही शमी का पहला स्पैल खत्म होता है, वह ड्रेसिंग रूम की तरफ भागते हैं, उन्हें देखते ही शास्त्री ने आईस बाथ लेने को कहा। शमी के लिए पहले से ही पूरी तैयारी की जा चुकी थी। आइस बाथ के लिए बर्फीले पानी से भरी बाल्टी, उसी पानी में भिगोकर निकाली गई टी-शर्ट। दुनिया के लगभग हर खेल के ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों को तरो-ताजा करने की इससे बेहतर तकनीक अब तक विकसित नहीं हो पाई। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि यह आइस बाथ होता क्या हैं और क्यों खिलाड़ियों के लिए कितना अहम है। 

INDvSA: Ice baths is secret of Mohammad Shami success in day five of Vizag Test
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ट्विटर

पेशेवर एथलीटों के ट्रेनिंग रूम में बर्फ से भरा बाथटब होना बेहद आम बात है। बहुत से खिलाड़ी कड़ी मेहनत के बाद बर्फ के टुकड़ों वाले पानी में कुछ देर बैठते हैं। इसे आइस बाथ भी कहा जाता है। इसके पीछे धारणा है कि व्यायाम के बाद बर्फीले पानी में नहाने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और शरीर जल्दी ही दोबारा व्यायाम के लिए तैयार हो जाता है। मांसपेशियों को होने वाला नुकसान कम होता है और मांसपेशियों के विकास में भी मदद मिलती है।

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आइस बाथ लेते मुनाफ पटेल - फोटो : बीसीसीआई

मांसपेशियों में मौजूद बॉयोकेमिकल्स हो जाते हैं असंतुलित

शोधकर्ताओं का कहना है कि मांसपेशिया लंबे फाइबर से निर्मित होती हैं। कसरत के बाद इनका विकास तेजी से होता है। हालांकि, कसरत के बाद तुरंत शरीर पर बर्फीला पानी पड़ने से फाइबर का विकास थम जाता है। आइस बाथ से मांसपेशियों में मौजूद बॉयोकेमिकल्स का संतुलन बिगड़ जाता है। ऊतक के विकास के लिए जरूरी प्रोटीन की मात्रा घट जाती है जबकि उनके टूटने के लिए जिम्मेदार प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है। यही वजह है कि मांसपेशी के फाइबर छोटे रह जाते हैं।

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मोहम्मद शमी - फोटो : सोशल मीडिया

क्यों क्रिकेटर्स लेते हैं आइस बाथ?

आइस बाथ का तापमान कितना रखना है, यह उस दिन के मौसम पर भी निर्भर करता है। खिलाड़ियों को 10 मिनट आराम के लिए मिलते हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विशाखापट्टनम टेस्ट में पांचवें दिन तो आसमान से जैसे आग बरस रही थी। इसी दौरान शमी ड्रेसिंग रूम में घुसे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार शमी ने आइस बाथ लिया। बर्फीले पानी से धुलकर कुर्सी पर सुखती जर्सी पहनी, मोजे बदले और फिर दोबारा तरोताजा होकर जलवे बिखरने मैदान पर लौट गया। शमी अक्सर तभी ड्रेसिंग रूम में इस तरह घुसते हैं जब उन्हें लगता है कि पिच में उनके लिए कुछ है।

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