टीम इंडिया को जिसकी जरूरत है वो उसके पास है नहीं और जिसकी जरूरत नहीं है वो भरपूर है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ये कहानी एक अदद ऑलराउंडर की है। टीम इंडिया में ऑलराउंडर तो कई हैं, लेकिन वो वाला नहीं जो टीम इंडिया को चाहिए। खास तौर पर इस बात को ध्यान में रखते हुए कि अगले साल भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया में टी-20 वर्ल्ड कप खेलना है। अब अगर आप ‘है’ और ‘नहीं है’ की चकरघिन्नी में फंस रहे हैं तो तस्वीर को साफ कर देते हैं।
दरअसल टीम इंडिया को सीमिंग ऑलराउंडर की तलाश है। सीमिंग ऑलराउंडर यानी ऐसा खिलाड़ी जो तेज गेंदबाजी करे और साथ में अच्छी बल्लेबाजी भी कर सकता हो। शुक्रवार से वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरू हो रही 3 टी-20 मैचों की सीरीज में शिवम दुबे को टीम में लाया भी इसलिए गया है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी काबिलियत का इम्तिहान हो सके। हार्दिक पांड्या ने इस रोल में अपनी उपयोगिता अच्छी तरह साबित की थी, लेकिन फिलहाल वो चोट की वजह से टीम से बाहर हैं और जनवरी में वापसी के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहे हैं।
इस रोल के लिए आजमाया विजय शंकर को भी गया था, लेकिन वो खुद को साबित नहीं कर पाए। 2019 विश्व कप में भी उन्हें इसी रोल के लिए टीम में जगह दी गई थी लेकिन, उनका प्रदर्शन औसत रहा। बल्कि उन्हें टीम में शामिल करने के लिए सेलेक्टर्स ने अंबाती रायडू की अनदेखी की और इसके लिए बाद में उन्हें जबरदस्त आलोचना झेलनी पड़ी।
क्यों चाहिए सीमिंग ऑलराउंडर
दरअसल, सीमिंग ऑलराउंडर की तलाश तो भारत को लंबे समय से रही है। इस तलाश को कई साल पहले इरफान पठान ने कुछ हद तक पूरा किया था। उसके बाद एक लंबे अंतराल के बाद हार्दिक पांड्या टीम में आए। जो 140 किलोमीटर से ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी कर लेते हैं और मिडिल ऑर्डर में उनकी बल्लेबाजी भी घातक होती है। अब तक खेले गए 40 टी-20 मैचों में उन्होंने 147.61 की स्ट्राइक रेट से 310 रन बनाए हैं। उनके खाते में 38 विकेट भी हैं। ऑस्ट्रेलियाई पिचों पर सीमिंग ऑलराउंडर ही काम आने वाले हैं। शिवम दुबे को आजमाया जा रहा है लेकिन वो बिल्कुल नए हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका खुद को साबित करना बाकी है। इस बात को अगर मान भी लिया जाए कि ऑस्ट्रेलियाई पिचें अब पहले की तरह तेज और उछाल भरी नहीं होतीं फिर भी उनमें इतनी जान तो होती ही है कि तेज गति के गेंदबाज बल्लेबाजों के लिए कुछ परेशानी पैदा कर सकें।
टीम इंडिया के लिए राहत की बात बस इतनी है कि हार्दिक पांड्या का हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया में आया था जिसमें वो ट्रेनिंग के साथ साथ एक्सरसाइज करते दिखे थे। जनवरी में वो टीम में वापसी तो करेंगे लेकिन बतौर कप्तान विराट कोहली को उन्हें संभालकर रखना होगा। हैदराबाद में पहले टी-20 मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी विराट कोहली ने कहाकि कुछ और गेंदबाजों पर भी नजर है जो तीन तेज गेंदबाज के साथ टीम में जगह बना सकते हैं । टीम में तीन गेंदबाजों की जगह पक्की है और एक जगह के लिए खिलाड़ियों के बीच दौड़ है।
स्पिन ऑलराउंडर्स की भरमार है
भारतीय टीम में इन दिनों स्पिन ऑलराउंडर्स की भरमार है। खास तौर पर टी-20 फॉर्मेट में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो स्पिन ऑलराउंडर की हैसियत से खेलते हैं। रवींद्र जडेजा, क्रुणाल पांड्या, वाशिंगटन सुंदर और राहुल चाहर जैसे खिलाड़ी इस फेहरिस्त में शामिल हैं।
ध्यान देने वाली बात ये है कि फुलटाइम स्पिनर के तौर पर कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल की जोड़ी के अलावा ये नाम टीम में हैं। विश्व कप में टीम के संतुलन के लिहाज से व्यवहारिक बात ये है कि रवींद्र जडेजा को छोड़कर इसमें से कोई भी खिलाड़ी शायद ही प्लेइंग 11 में जगह बना पाए। जिस बात का हम बार बार जिक्र कर रहे हैं वो बात दिमाग में रखिएगा कि टी-20 विश्व कप ऑस्ट्रेलिया में खेला जाना है।
बाकी स्पिन ऑलराउंडर्स के मुकाबले रवींद्र जडेजा उपयोगी इसलिए हैं क्योंकि जडेजा बहुत समझदारी के साथ अपने ओवर निकालते हैं। टी-20 में उनकी 100 की स्ट्राइक रेट के साथ साथ 33 विकेट उन्हें स्पिन ऑलराउंडर में नंबर एक पर रखते हैं।
जडेजा की फील्डिंग भी शानदार है इसलिए असल मायने में इस स्लॉट में कोई जगह बचती ही नहीं है। जगह जहां खाली है वहां के लिए फिलहाल कोई खिलाड़ी नहीं दिख रहा है। चयनकर्ताओं ने अगर शिवम दुबे पर भरोसा जताया है तो पर्याप्त मौके दिए जाने चाहिए।