Rishabh Pant: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी के लिए तैयार ऋषभ पंत, बोले- चोट से पूरी तरह मुक्त हुआ
पंत फिलहाल भारत ए और दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ बंगलूरू में खेले जा रहे पहले अनौपचारिक टेस्ट में हिस्सा ले रहे हैं और टीम की अगुआई कर रहे हैं।
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पंत को इंग्लैंड में मैनचेस्टर टेस्ट मैच के दौरान चोट लगी थी। क्रिस वोक्स के खिलाफ रिवर्स स्वीप खेलने की कोशिश में, गेंद उनके दाहिने पैर पर लग गई थी जिससे फ्रैक्चर हो गया था। अपने लचीले स्वभाव के अनुरूप पंत शुरुआत में रिटायर्ड हर्ट होने के बाद भी अपनी पारी जारी रखने के लिए क्रीज पर लौटे और एक बार फिर अपने खेल की पहचान बने दृढ़ संकल्प और साहस का परिचय दिया।
पंत चोट के कारण इंग्लैंड के खिलाफ पांचवें टेस्ट मैच से भी बाहर हो गए थे, लेकिन उन्हें दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ दो अनौपचारिक टेस्ट मैच के लिए टीम में शामिल किया गया। पंत इस मैच में बल्लेबाजी करने उतरे, लेकिन 17 रन बनाकर सस्ते में आउट हो गए। ये महीनों के रिहैबिलिटेशन के बाद उनका पहला मैच था। मैच से इतर पंत ने अपनी रिकवरी यात्रा के बारे में बताया और इस बात पर राहत व्यक्त की कि उनकी उपचार प्रक्रिया कितनी आसानी से पूरी हो गई।
पंत ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में कहा, प्रक्रिया का पहला चरण था घाव भरना। पहले छह सप्तान तक आपको फ्रैक्चर को ठीक होने देना होता है और फिर सीओई को रिपोर्ट करना होता है। शुक्र है घाव ठीक से भर गया। मैंने धीरे-धीरे रिहैब शुरू किया। शुरुआती दिनों में काफी फिजियोथेरेपी और सावधानीपूर्वक निगरानी की जरूरत पड़ी। जब मैं कुछ हद तक चलने-फिरने में सक्षम हो गया, तो मैंने अपनी ताकत बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया, जो दूसरे चरण की शुरुआत थी। अभी मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मैं पूरी तरह से ठीक हो गया हूं और इस दौरान मेरी मदद करने के लिए मैं सीओई स्टाफ का बहुत आभारी हूं।
Following his injury in the England series, Rishabh Pant underwent an intensive rehabilitation program at the BCCI Centre of Excellence 👍 👍
— BCCI (@BCCI) October 31, 2025
The focus extended beyond physical recovery, with equal emphasis on mental conditioning and match readiness.
With the support of the CoE… pic.twitter.com/8qB1SKjiNp
इस चोट को अपने करियर के सबसे निराशाजनक दौरों में से एक बताते हुए पंत ने स्वीकार किया कि मानसिक रूप से मजबूत बने रहना शारीरिक रूप से स्वस्थ होने जितना ही चुनौतीपूर्ण था। पंत ने कहा, सकारात्मक रहना वास्तव में एक मानसिकता का मामला है। चोट लगने पर निराश होना आसान होता है। आपकी ऊर्जा का स्तर गिर जाता है और निराशा बढ़ती है। लेकिन अगर आपको ऐसी छोटी-छोटी चीजें मिल जाएं जो आपको अच्छा महसूस कराती हैं तो उन पर टिके रहना जरूरी है, खासकर जब आप उस दौर से गुजर रहे हों।