खराब फिल्डिंग..24 वाइड और घटिया फैसले...पहला वन-डे न्यूजीलैंड जीता नहीं बल्कि भारत हारा
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रॉस टेलर के 21वें शतक ने भारतीय टीम को न्यूजीलैंड दौरे की पहली हार दिखाई। यह कीवी टीम की दो माह बाद पहली जीत थी। नंबर चार पर खेलते हुए रॉस टेलर ने रिकॉर्ड 18वीं बार शतक जमाया। निश्चित तौर पर रॉस टेलर न्यूजीलैंड टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं। दो साल पहले हुई आंखों की सर्जरी के बाद उनके खेल में जबरदस्त निखार आया। टेलर की इस शतकीय पारी के आगे श्रेयस अय्यर का पहला शतक भी बेकार चला गया।
348 के विशाल लक्ष्य को साधना कोई आम बात नहीं। वह जीत का हकदार था, लेकिन क्या वाकई यह वही टीम इंडिया थी, जिसने टी-20 सीरीज में 5-0 से मेजबानों का सूपड़ा साफ कर दिया था? क्या वाकई हैमिल्टन वन-डे में टीम इंडिया ने उस स्तर का खेल दिखाया जिसकी उम्मीद सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानियों को होती है। दरअसल, बुधवार को हैमिल्टन में न्यूजीलैंड जीता नहीं बल्कि टीम इंडिया हार गई।
केन विलियमसन की अनुपस्थिति में टीम की अगुवाई कर रहे स्टैंड-बाय कप्तान टॉम लाथम ने 48 गेंदों पर 69 रन बनाए। हेनरी निकोलस ने भी 82 गेंदों में 78 रन की अहम पारी खेली और न्यूजीलैंड को ठोस शुरुआत दी। मैच के बाद भारतीय कप्तान कोहली ने न्यूजीलैंड की तारीफ तो की, लेकिन अपनी उन कमियों को उजागर नहीं किया, जहां से वह मैच में पिछड़े। ये हैं वो तीन कारण जिनकी वजह से न्यूजीलैंड के हाथों भारतीय टीम को तीन मैच की वन-डे सीरीज के पहले मुकाबले में हार का मुंह देखना पड़ा।
बेहद खराब फिल्डिंग
'हम फिल्ड पर बेहद साधारण रहे। हमनें एक मौका भी गंवाया। हमें खुद को सुधारना होगा।' मैच के बाद विराट कोहली ने भारतीय टीम की फिल्डिंग को साधारण बताया। मगर यह काफी नहीं है, क्योंकि इस सुस्ती को खामियाजा टीम को हार के साथ चुकाना पड़ा। महज 10 रन पर खेल रहे टेलर स्लॉग स्विप करने के प्रयास में शॉट हवा में मार बैठे। फाइन लेग पर खड़े कुलदीप यादव के पास सुनहरा मौका था। हालांकि कैच आसान नहीं था, लेकिन एक इंटरनेशनल खिलाड़ी से असाधारण प्रदर्शन की उम्मीद की ही जा सकती है। बाएं हाथ के कलाई स्पिनर कुलदीप ने निराश किया। टेलर ने 84 गेंदों में 109 रन की मैच जिताऊ पारी खेल डाली। कैच के अलावा मोहम्मद शमी ने डीप पर दो बार गेंद बाउंड्री के पार जाने दी। हेनरी निकोलस का रनआउट देखने के बाद ऐसा लगा मानो मैदान पर अकेले विराट कोहली ही पूरे जज्बे के साथ फिल्डिंग कर रहे हैं।
24 वाइड, 4.1 ओवर्स एक्सट्रा
347 रन बचाने उतरी टीम इंडिया के गेंदबाजों को देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह जीत के प्रति आश्वस्त हैं। बॉलर्स ने 29 रन अतिरिक्त दिए। 4.1 ओवर्स एकस्ट्रा फेंके। 12 साल बाद ऐसा हुआ जब भारतीय खिलाड़ियों ने 30 वाइड गेंदें फेंकी हो। पाटा पिच और छोटे मैदान पर इस तरह की गलती आत्महत्या ही मानी जाती है। विरोधियों ने भी यही किया, हाथ आए मौके को दोनों हाथों से भुनाया और इतने बड़े स्कोर को 11 गेंद शेष रहते ही साधकर नया इतिहास रच दिया। यह लक्ष्य का पीछा करते हुए न्यूजीलैंड की सबसे बड़ी जीत थी।
शार्दुल ठाकुर का चयन
भले ही चौथे टी-20 में शार्दुल ठाकुर ने गजब की गेंदबाजी की हो, आखिरी ओवर में सात रन बचाते हुए मैच सुपर ओवर तक ले गए हो और उस मैच का विजेता भारत बना हो, लेकिन उनकी इस वापसी से वह सफेद गेंद के फॉर्मेट में टीम इंडिया के स्थायी गेंदबाज नहीं बन जाते।
खासकर तब जब आपके पास बेंच पर नवदीप सैनी जैसा कोई युवा तूफानी गेंदबाज हो, जो टी-20 सीरीज में अपने खेल से मैन ऑफ द सीरीज चुना गया हो। सैनी के पास पेस है। न्यूजीलैंड की तेज, उछाल भरी पिच पर वह विपक्षियों की बखिया उधेड़ने की ताकत रखता है। तरकश में सटीक यॉर्कर हैं। कोहली ने प्लेइंग इलेवन में उन्हें बाहर बिठाकर शार्दुल ठाकुर को खिलाया।
ठाकुर ने अपने 10 ओवर्स के कोटे में 80 रन खर्च कर डाले। टेलर और लॉथम ने उनकी स्लोअर बॉल्स पर जमकर धुनाई की। अपने आखिरी नौ एकदिवसीय मैच में ठाकुर ने 51.33 की औसत से सिर्फ 9 विकेट लिए हैं, जबकि सैनी का औसत 37 का है, इसलिए पहले वन-डे के लिए भारतीय टीम का चयन संदिग्ध हो जाता है।