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न्यूजीलैंड का वह ऐतिहासिक मैदान जहां, टीम इंडिया इतिहास रचने से चूक गई

Sun, 09 Feb 2020 08:28 AM IST
Vimal Kumar विमल कुमार
Updated Sun, 09 Feb 2020 08:28 AM IST
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India vs New Zealand: Eden Park of Auckland is historical venue
भारत बनाम न्यूजीलैंड - फोटो : ट्विटर

न्यूजीलैंड का एक बड़ा शहर ऑकलैंड जहां पर आपको भारतीय एक बड़ी तादाद में मिलेंगे। ऑकलैंड का क्रिकेट मैदान ईडन पार्क क्रिकेट के बेहद मशहूर मैदानों में से एक है। यहां पर क्रिकेट के अलावा रग्बी मैचों का भी आयोजन होता है। इस मैदान की क्षमता 41000 है जो न्यूजीलैंड के दूसरे सबसे बड़े मैदान वेलिंग्टन से करीब 10 हजार से भी ज्यादा है। हालांकि, भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरे वन-डे को देखने के लिए लगभग 60 फीसदी स्टेडियम ही भरा था।

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मैदान के अधिकारी ने हमें बताया कि इस मैदान पर जब भी भारत के साथ मुकाबला होता है तो स्टेडियम खचाखच भरा होता है लेकिन अन्य मुल्कों से मैच के दौरान वैसा माहौल नहीं होता है। माहौल की बात करें तो ईडन पार्क का नजारा अद्भुत है। ये शहर के बीचों बीच में है।
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सबसे मजेदार बात है कि जब बीच मैदान में मैच चल रहा है तभी मैदान से ठीक सटे एरिया जहां टीमें नेट प्रैक्टिस करती हैं वहां बच्चे क्रिकेट खेल रहें हैं। न्यूजीलैंड क्रिकेट अपने देश में खेल को लोकप्रिय बनाने और युवा पीढ़ी को खेल से जुड़ने के लिए बहुत सहूलियत देती है जो भारत के किसी भी मैदान में आपको दूर-दूर तक नजर आती है।
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मैच से एक दिन पहले मैने ये भी देखा कि कैसे एक दर्जन स्कूली बच्चों को 1 मीटर से भी कम की दूरी पर राष्ट्रीय टीम के साथ प्रैक्टिस को दिखाया गया, खिलाड़ियों के साथ मुलाकात कराई गई, सेल्फी खींचे गए और बच्चे खुशी से फूले समाते हुए घर लौटे। खेल को ये मुल्क अलग ही अंदाज में आपको परिचय कराता है। भारत और बीसीसीआई को इससे सीख लेने की जरूरत है।

ऐतिहासिक मैदान पर इतिहास रचने से चूका भारत

India vs New Zealand: Eden Park of Auckland is historical venue
भारत बनाम न्यूजीलैंड - फोटो : सोशल मीडिया

न्यूजीलैंड का ये सबसे पुराना मैदान है। न्यूजीलैंड ने अपना पहला टेस्ट 1929-30 सीजन में यहीं खेला था। 1955-56 में वेस्टइंडीज के खिलाफ न्यूजीलैंड ने अपने टेस्ट जीवन की पहली जीत भी इसी मैदान पर हासिल की थी। इस लिहाज से स्थानीय लोगों के लिए ये मैदान कई मायनों में ऐतिहासिक है, लेकिन इस मैदान पर न्यूजीलैंड ने भारत को इतिहास रचने से रोक दिया।

अगर भारत यहां वन-डे मुकाबला जीतता तो इस दौरे पर तीनों फॉर्मेट में सीरीज जीतकर इतिहास रचने का एक शानदार मौका था, लेकिन टी-20 फॉर्मेट में 5-0 की जीत के बाद 0-2 से पिछड़ना और अब 0-3 का खतरा भी टीम इंडिया के सामने है।

189 रन पर 8 विकेट गंवाने के बाद जिस तरह से घरेलू टीम ने पलटवार किया तो हर भारतीय दर्शक मैदान में हतप्रभ था। शार्दुल ठाकुर का 10 ओवर में 60 रन देना हैरानी वाला प्रदर्शन नहीं था, लेकिन जसप्रीत बुमराह का 10 ओवर में बिना किसी विकेट के 64 रन देना निश्चित तौर पर चिंताजनक रहा।

एक दिन पहले ही मार्टिन गप्टिल ने प्रेस कांफ्रेस में ये कहा था कि बुमराह पर आप महारत तो हासिल नहीं कर सकते, लेकिन लगातार उनका सामना करने पर आपको उनके पढ़ने में थोड़ी सहूलियत जरूर मिलती है। न्यूजीलैंड निश्चित तौर पर बुमराह को बेहतर तरीके से खेल रहा है।

रॉस टेलर ने एक बार संकटमोचक की भूमिका निभाई, लेकिन उनका साथ जिस अंदाज में अपना पहला वनडे खेल रहे काइल जेमीसन ने दिया वो शानदार रहा। जेमीसन इस मैच से पहले ही अपने चयन को लेकर सुर्खियों में थे। न्यूजीलैड के क्रिकेट इतिहास में वो सबसे लंबे कद वाले खिलाड़ी बन चुके हैं।

न्यूजीलैंड ने जो लक्ष्य दिया था वो विशालकाय नहीं था खासकर ये देखते हुए कि इस मैदान पर पिछले 6 मैचों में बाद में बल्लेबाजी करती हुए टीमों को 4 बार जीत मिली थी। फ्लडलाइट में यहां बल्लेबाजी
करना आसान माना जाता है, जैसा कि हैमिल्टन में हुआ था। लेकिन, न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों ने ऐसा समां बांधा कि 100 रन बनने से पहले ही आधी टीम पवेलियन लौट गई।

मौके को भुनाने से चूके केदार जाधव

India vs New Zealand: Eden Park of Auckland is historical venue
केदार जाधव

रोहित शर्मा और शिखर धवन की नियमित जोड़ी के अचानक हटने से अनुभव के लिहाज से 360 वन-डे मैच और करीब 15 हजार रन (14803) की सीधी कमी इस बैटिंग लाइन अप में दिखती है। पृथ्वी शॉ और मयंक अग्रवाल को बहुत मुश्किल से इस वन-डे सीरीज में मौका मिला था, लेकिन पहले दोनों मैचों में इस नई नवेली जोड़ी ने मौके को गंवाया ही।

इस मैच में केदार जाधव का फ्लॉप होना उनके वन-डे करियर के लिए एक बड़ा झटका है। जाधव पहले से ही 35 साल के हैं और 2023 के वर्ल्ड कप को देखते हुए उन्हें भविष्य की टीम का हिस्सा नहीं माना जा सकता है। इतना ही नहीं मौजूदा समय में वो इसलिए खेल रहे हैं क्योंकि ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या चोटिल हैं।

ऐसे में ऑकलैंड में जाधव के पास ये एक बड़ा मौका था जहां पर वो शानदार पारी खेलकर चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट के भरोसे पर खरे उतरने की कोशिश करते। टी-20 सीरीज में बेहतरीन खेल दिखाने वाले मनीष पांडे को बाहर रखकर जाधव को इसलिए खिलाया जाता है कि वो कुछ ओवर की गेंदबाजी भी कर सकें, लेकिन पहले वन-डे की तरह दूसरे वन-डे में भी कप्तान कोहली ने उन्हें गेंद नहीं थमाई।

ऐसे में अगर बे ओवल में होने वाले तीसरे वन-डे में जाधव बाहर बैंठे तो किसी को चौंकने की जरूरत नहीं है। हो सकता है शिवम दुबे या फिर पांडे उनके जगह खेले। मुमकिन है कि जाधव ने अपना आखिरी वन-डे भी खेल लिया हो। नवदीप सैनी और रविंद्र जाडेजा की जोड़ी ने मुश्किल हालात में भी उम्मीद जगाई, लेकिन जडेजा रॉस टेलर नहीं है।

टेलर वन-डे क्रिकेट में 8000 से ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में औसत के मामले में सिर्फ चुनिंदा दिग्गजों से ही पीछे हैं। बहरहाल, ऑकलैंड में हार ने ये तय कर दिया कि भारत का सपना विदेश में किसी मुल्क में तीनों फॉर्मेंट में सीरीज जीतना सपना ही है। वन-डे सीरीज में हार बड़ी बात नहीं है लेकिन एक अहम मौके को चूकना निश्चित तौर पर निराशाजनक है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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