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अंजलि को बस एक ही चिंता, क्रिकेट बिना कैसे रहेंगे सचिन
हेमंत रस्तोगी/मुंबई
Updated Sun, 17 Nov 2013 09:33 AM IST
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यह पत्नी अंजलि ही थीं, जिन्होंने सचिन को उनके लंबे कैरियर के दौरान उन्हें घर की हर चिंता से दूर रखा। शायद यही कारण था कि विदाई की बेला पर सचिन ने अपनी पत्नी को उनकी सफलता का बहुत बड़ा स्तंभ बताया।
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लेकिन पत्नी अंजलि को यह चिंता सतानी लगाने लगी है कि इतने साल तक क्रिकेट के लिए जीने के बाद सचिन इसके बिना कैसे रहेंगे। अंजलि की चिंता यह है कि वह क्रिकेट को इस कदर जीते हैं कि इसके बिना उनकी कल्पना करना मुश्किल है।
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सच्चाई यह है कि सचिन के बिना क्रिकेट की कल्पना तो की जा सकती है, लेकिन क्रिकेट कि बिना सचिन के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है।
अंजलि यह भी बताती हैं कि जब वह लाहली में हरियाणा के खिलाफ अपना आखिरी रणजी ट्रॉफी मैच खेलने के लिए गए थे। उस दौरान उन्होंने टीवी पर उन्हें पिच की मिट्टी को माथे पर लगाते देखा था।
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जब वह घर पर आए तो उन्होंने इस बारे में उनसे पूछा। उन्होंने यही कहा कि क्या उन्होंने उनकी यह बात नोटिस की थी। दरअसल यह उनका इस खेल के प्रति प्यार है।
इधर वानखेड़े में सचिन तेंदुलकर पहले खुद रोए फिर उनकी पत्नी अंजलि रोईं बेटी सारा भी भावुक हो उठी। अर्जुन ने मां को संभाला और इसके बाद तो पूरा वानखेड़े सचिन की विदाई और उनके भाषण पर नम हो उठा।
मौका ही ऐसा बन पड़ा था। जिस मास्टर ब्लास्टर को क्रिकेट का महानायक बनाने में जिनका योगदान था बस सचिन उन्हीं के प्रति आभार व्यक्त कर रहे थे।
और दिल से निकल रही इन्हीं भावनाओं ने सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण समेत सभी को भावुक कर दिया। यहां तक भारत सरकार भी उनके स्वर्णिम कैरियर के आगे नतमस्तक हो गई।
पिता, मां, पत्नी, भाई-बहन, बेटी-बेटा, सास-ससुर, कोच रमाकांत आचरेकर, आंटी, पुराने और नए दोस्त, राहुल द्रविड, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण, अनिल कुंबले के साथ पूरी भारतीय टीम, बीसीसीआई, एमसीए, फीजियो, डॉक्टर, निजी मैनेजर, मार्क मस्करेनहॉस, मीडिया और यहां तक उनके प्रशंसक सचिन ने सभी का दिल से आभार व्यक्त किया।
इन सब के बाद जब सभी जाने की तैयारी में थे तभी सचिन अचानक अकेले पिच की ओर बढ़े। पिच पर पहुंचकर उन्होंने दोनों हाथों से इसे छूकर नमन किया और इसकी मिट्टी अपने माथे पर लगा ली। यह उस 22 गज की पट्टी के लिए नमन था जिसने उन्हें इतिहास पुरुष बनाया।
यह ऐसा मौका था जहां सचिन की आंखें एक बार फिर भर आई थीं। सचिन जाते-जाते सभी का शुक्रिया कर रुला गए। यही नहीं जिसका नाम उनकी इस सूची में नहीं था उसके लिए उन्होंने माफी भी मांगी।
कम बोलने वाले सचिन ने पूरे 21 मिनट तक चली अपनी स्पीच से सभी चुप्पी साधने पर मजबूर कर दिया। वह अमूमन मैच के बाद तुरंत खाली हो जाने वाले खचाखच भरे वानखेड़े का चक्कर लगाना भी नहीं भूले।
खुद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और भविष्य की धरोहर विराट कोहली ने उन्हें कंधों पर बैठाया और वह तिरंगा लहराते हुए यही कह रहे थे देख लो अब इस सफेद जर्सी में दोबारा नहीं दिखाई दूंगा।
बाद में शिखर धवन, मुरली विजय और मोहम्मद शमी और एक बार फिर विराट ने उठाया।