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IPL 2025: पांच साल से रोजाना 600 गेंदों का सामना करते रहे वैभव सूर्यवंशी, आईपीएल डेब्यू पर बटोरी सुर्खियां
Sun, 20 Apr 2025 08:48 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sun, 20 Apr 2025 08:48 PM IST
सार
राजस्थान रॉयल्स के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ मैच से आईपीएल में डेब्यू किया। उन्होंने अपनी पहली ही गेंद पर छक्का जड़कर सुर्खियां बटोरी।
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वैभव सूर्यवंशी और संजीव गोयनका
- फोटो : IPL/BCCI
विस्तार
राजस्थान रॉयल्स के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी 14 साल की उम्र में आईपीएल डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। उन्होंने शनिवार को लखनऊ सुपर जाएंट्स के खिलाफ डेब्यू किया था। अपने पहले ही मैच में वैभव सुर्खियां बटोरने में सफल रहे। वैभव ने शार्दुल ठाकुर की पहली गेंद पर छक्का लगाकर बता दिया कि उनमें कितनी प्रतिभा है।
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पांच साल की ट्रेनिंग का मिल रहा फल
कहते हैं पूत के पांव पालने में नजर आते हैं। पहले ही आईपीएल मैच में 20 गेंदों में 34 रन की पारी वैभव की प्रतिभा की बानगी पेश करती है। शार्दुल जैसे गेंदबाज पर पहली गेंद पर प्रहार कर उन्होंने संकेत दे दिया है उन्हें छोटा बच्चा समझने की गलती नहीं करें। नाविक के तीर की तरह उनके शॉट ताकतवर और सटीक हैं, लेकिन 14 वर्षीय खिलाड़ी अपने स्ट्रोक्स में इतनी ताकत कैसे पैदा कर सकता है कि उसने शीर्ष स्तर के आक्रमण का सामना करते हुए एक बार नहीं बल्कि तीन बार गेंद को स्टैंड में भेजा? पटना के उनके कोच मनीष ओझा ने कहा, आप लोगों ने उसके शॉट में ताकत देखी। बल्ले की स्विंग और सही टाइमिंग देखी। अगर छक्का मारने के लिए ताकत ही एकमात्र मानदंड होता तो पहलवान क्रिकेट खेलते। यह पांच साल की ट्रेनिंग है जिसमें हर दिन 600 सौ गेंदें खेली जाती हैं।
ये भी पढ़ें: PBKS vs RCB: कोहली ने डेविड वॉर्नर का यह सर्वकालिक रिकॉर्ड तोड़ा, चेज करते हुए इस सत्र का तीसरा पचासा जड़ा
कहते हैं पूत के पांव पालने में नजर आते हैं। पहले ही आईपीएल मैच में 20 गेंदों में 34 रन की पारी वैभव की प्रतिभा की बानगी पेश करती है। शार्दुल जैसे गेंदबाज पर पहली गेंद पर प्रहार कर उन्होंने संकेत दे दिया है उन्हें छोटा बच्चा समझने की गलती नहीं करें। नाविक के तीर की तरह उनके शॉट ताकतवर और सटीक हैं, लेकिन 14 वर्षीय खिलाड़ी अपने स्ट्रोक्स में इतनी ताकत कैसे पैदा कर सकता है कि उसने शीर्ष स्तर के आक्रमण का सामना करते हुए एक बार नहीं बल्कि तीन बार गेंद को स्टैंड में भेजा? पटना के उनके कोच मनीष ओझा ने कहा, आप लोगों ने उसके शॉट में ताकत देखी। बल्ले की स्विंग और सही टाइमिंग देखी। अगर छक्का मारने के लिए ताकत ही एकमात्र मानदंड होता तो पहलवान क्रिकेट खेलते। यह पांच साल की ट्रेनिंग है जिसमें हर दिन 600 सौ गेंदें खेली जाती हैं।
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जब आम 14 वर्षीय बच्चे प्लेस्टेशन खेलने और होमवर्क करने में व्यस्त होते हैं, तब बिहार के समस्तीपुर के इस किशोर ने शार्दुल ठाकुर और आवेश खान जैसे अनुभवी गेंदबाज की गेंदों पर छक्के लगाए। उन्होंने गेंद को सवाई मानसिंह स्टेडियम की दर्शक दीर्घा में पहुंचा दिया। कोच ओझा ने इस विशेष प्रतिभा को पहचाना और सुनिश्चित किया कि 10 साल के वैभव को इस तरह तैयार किया कि जब भी मौका मिले, वह बड़ी चुनौती के लिए तैयार रहे।
बेटे के लिए पिता ने बेच दी खेती की जमीन
ऐसी प्रतिभा रातों-रात नहीं बनीं, इस अविश्वसनीय कहानी की नींव तब पड़ी जब उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने अपने बेटे के क्रिकेट सपनों को पूरा करने के लिए अपनी खेती की जमीन बेच दी। बिहार क्रिकेट संघ ने वैभव का समर्थन किया और उसे रणजी ट्रॉफी में जगह दिलाई। तिलक नायडू की अध्यक्षता में अंडर-19 राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने उसे कोल्ट टेस्ट क्रिकेट में पहुंचाया। अंत में राजस्थान रॉयल्स के राहुल द्रविड़ और जुबिन भरूचा ने आईपीएल की शुरुआत से पहले उसे 150 से अधिक की गति से साइड-आर्म थ्रोडाउन का सामना करवाकर इस अनगढ़े हीरे को चमकाने में अपना योगदान दिया। ओझा वैभव के पिता और उनके बलिदान की प्रशंसा करते हैं। उसके पिता मैच दिखाने के लिए हर दूसरे दिन 100 किलोमीटर की यात्रा करते थे। मां उसके खान-पान को लेकर बहुत सजग रहती थीं। अगर कोई व्यक्ति प्रतिदिन 600 गेंदें खेलता है तो उसे प्रोटीन के मामले में ज्यादा पोषण की जरूरत होगी।
ऐसी प्रतिभा रातों-रात नहीं बनीं, इस अविश्वसनीय कहानी की नींव तब पड़ी जब उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने अपने बेटे के क्रिकेट सपनों को पूरा करने के लिए अपनी खेती की जमीन बेच दी। बिहार क्रिकेट संघ ने वैभव का समर्थन किया और उसे रणजी ट्रॉफी में जगह दिलाई। तिलक नायडू की अध्यक्षता में अंडर-19 राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने उसे कोल्ट टेस्ट क्रिकेट में पहुंचाया। अंत में राजस्थान रॉयल्स के राहुल द्रविड़ और जुबिन भरूचा ने आईपीएल की शुरुआत से पहले उसे 150 से अधिक की गति से साइड-आर्म थ्रोडाउन का सामना करवाकर इस अनगढ़े हीरे को चमकाने में अपना योगदान दिया। ओझा वैभव के पिता और उनके बलिदान की प्रशंसा करते हैं। उसके पिता मैच दिखाने के लिए हर दूसरे दिन 100 किलोमीटर की यात्रा करते थे। मां उसके खान-पान को लेकर बहुत सजग रहती थीं। अगर कोई व्यक्ति प्रतिदिन 600 गेंदें खेलता है तो उसे प्रोटीन के मामले में ज्यादा पोषण की जरूरत होगी।
बल्ले का स्विंग युवराज जैसा
ओझा ने अपने शिष्य के बारे में कहा, जब वह आठ साल का था तब उसके पिता संजीव उसे मेरे पास लाए थे। हर बच्चा अलग होता है लेकिन अगर मैं उस उम्र के दूसरे लड़कों को देखता हूं तो उसे जो भी सिखाया जाता तो उसमें कार्यान्वित करने की समझ थी। उसका तरीका, बैक-लिफ्ट, कार्यान्वयन, इरादा, सभी हमेशा तालमेल में रहते थे। अकादमियों में अन्य लड़के शायद एक दिन में 50 गेंदें खेलते हैं। मैंने वैभव के ट्रेनिंग सत्रों के लगभग 40 वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किए हैं। आप देखेंगे कि उसका बल्ले का स्विंग युवराज सिंह जैसा है।
ओझा ने अपने शिष्य के बारे में कहा, जब वह आठ साल का था तब उसके पिता संजीव उसे मेरे पास लाए थे। हर बच्चा अलग होता है लेकिन अगर मैं उस उम्र के दूसरे लड़कों को देखता हूं तो उसे जो भी सिखाया जाता तो उसमें कार्यान्वित करने की समझ थी। उसका तरीका, बैक-लिफ्ट, कार्यान्वयन, इरादा, सभी हमेशा तालमेल में रहते थे। अकादमियों में अन्य लड़के शायद एक दिन में 50 गेंदें खेलते हैं। मैंने वैभव के ट्रेनिंग सत्रों के लगभग 40 वीडियो यूट्यूब पर अपलोड किए हैं। आप देखेंगे कि उसका बल्ले का स्विंग युवराज सिंह जैसा है।