{"_id":"ccc506cde3c9ee9330ea930607805be5","slug":"haroon-lorgat-bcci-bcci-vs-csa","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोगार्ट से क्यों नाराज है बीसीसीआई","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
लोगार्ट से क्यों नाराज है बीसीसीआई
Updated Wed, 27 Nov 2013 09:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय क्रिकेट टीम के दक्षिण अफ्रीका के दौरे से पहले उछले कार्टून विवाद ने एक और सवाल भी उठा दिया है कि आखिर क्यों बीसीसीआई क्रिकेट साउथ अफ्रीका (सीएसए) के सीईओ हारुन लोगार्ट को पसंद नहीं करती।
विज्ञापन
लोगार्ट विश्व क्रिकेट की संचालक संस्था अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुके हैं।
वह इस पद पर चार साल तक रहे। उनके इसी कार्यकाल के दौरान भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और मजबूत हुआ। हालांकि इस दौरान कई ऐसे मौके भी आए जब बीसीसीआई को लोगार्ट की कार्यशैली पंसद नहीं आई।
विज्ञापन
बीसीसीआई और लोगार्ट के बीच सबसे बड़ा विवाद तब हुआ, जब उन्होंने लॉर्ड वूल्फ कमेटी का गठन करके तमाम देशों के क्रिकेट बोर्डों के लिए आचार संहिता और प्रशासन के मानदंड बनाने की कोशिश की।
विज्ञापन
वूल्फ कमेटी
इस कमेटी ने जो सिफारिशें दीं, वो भी बीसीसीआई को नागवार गुज़रीं क्योंकि वूल्फ कमेटी ने भारतीय बोर्ड को भी प्रशासन के तौर-तरीक़े बदलने की नसीहत देते हुए बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
जब आईसीसी ने यह कमेटी गठित की, तभी बीसीसीआई ने इस पर अपना विरोध जाहिर कर दिया था।
इसके बावजूद न केवल यह कमेटी बनी बल्कि उसकी रिपोर्ट भी सार्वजनिक हुई। हरियाणा और पंजाब के सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश मुकुल मुद्गल भी इस समिति के सदस्य थे।
अगर इस कमेटी के सुझाव लागू होते तो बीसीसीआई और कई देशों के क्रिकेट बोर्डों का आमूलचूल ढांचा ही बदल जाता।
समिति की सिफारिशों में एक सुझाव राजनीतिज्ञों को क्रिकेट बोर्डों से दूर रखने का था। हालांकि लोगार्ट के आईसीसी से हटते ही इस समिति की रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली गई।
डीआरएस पर भी नाराजगी
इसी तरह बीसीसीआई के न चाहने के बाद भी अंपायर फैसला समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) को क्रिकेट में लागू किया गया। हालांकि बीसीसीआई ने इसे लागू करने से साफ मना कर दिया।
लोगार्ट आईसीसी में अपने कार्यकाल का विस्तार भी चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि लोगार्ट ने कई बार संकेतों में बीसीसीआई को कठघरे में खड़ा किया।
2011 में जब भारत में विश्व कप का आयोजन हुआ तब भी लोगार्ट की कई टिप्पणियां बीसीसीआई को नाखुश करने वाली थीं। आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पद से हटने के बाद लोर्गाट श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड से भी जुड़ना चाहते थे।
कुछ समय के लिए वह श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड से सलाहकार के रूप में भी जुड़े। मीडिया में तब ये ख़बरें आईं थीं कि बीसीसीआई की नापसंदगी के चलते उन्हें इस पद से हटना पड़ा।
सीएसए के सीईओ
क्रिकेट साउथ अफ्रीका (सीएसए) में उनके सीईओ बनने से पहले भी बीसीसीआई ने सार्वजनिक तौर पर उनके नाम पर नाखुशी जाहिर की थी। तब सीएसए ने बीसीसीआई की परवाह न करते हुए उन्हें सीईओ बनाया।
सीएसए के सीईओ बनने के बाद लोगार्ट ने कई बार बीसीसीआई से मतभेद दूर करने की बात की। पर बात बनी नहीं। वह नाराज बीसीसीआई को मना नहीं पाए।
नतीजतन, बीसीसीआई ने दक्षिण अफ्रीका के भारतीय टीम के दौरे को खत्म करने का मन बना लिया था।
अब ये दौरा इस शर्त पर हो रहा है कि लोर्गाट टीम इंडिया के दौरे से न केवल अलग रहेंगे बल्कि बीसीसीआई के साथ किसी भी बातचीत में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा।
लोगार्ट भारतीय मूल के हैं। उनका परिवार काफी पहले गुजरात से दक्षिण अफ्रीका चला गया था। उन्होंने वहीं पढ़ाई की। वहां उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेली। तत्कालीन दक्षिण अफ्रीका सरकार की नस्लवाद नीतियों के कारण वह राष्ट्रीय टीम में नहीं आ पाए।
लोगार्ट पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और दक्षिण अफ्रीका में एक निवेश कंपनी भी चलाते हैं।