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ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को कम सजा मिलने से नाराज हुए हरभजन, ICC पर भड़के

Mon, 26 Mar 2018 09:28 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 26 Mar 2018 09:28 AM IST
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harbhajan singh slashes icc decision over steve smith and cameron bencroft
हरभजन सिंह

ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच तीसरा टेस्ट भारी विवादों के कारण चर्चा का केंद्र बन गया है। पूर्व कंगारू कप्तान स्टीव स्मिथ ने केपटाउन में खेले गए तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन प्रेस कांफ्रेंस में गेंद के साथ छेड़छाड़ (बॉल टेंपरिंग) की बात को स्वीकार करके क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। इसके बाद से ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की चारों ओर आलोचना हो रही है। 

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बता दें कि बॉल टेंपरिंग विवाद के बाद आईसीसी ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ को एक टेस्ट मैच के लिए निलंबित किया है। स्मिथ पर मैच फीस का 100 प्रतिशत जुर्माना भी लगाया गया है। स्मिथ के अलावा ऑस्ट्रेलियाई ओपनर कैमरन बेनक्रॉफ्ट को आईसीसी ने 3 डिमेरिट अंक दिए हैं। साथ ही उन पर मैच फीस का 75 प्रतिशत जुर्माना लगाया है। 
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यही नहीं, स्मिथ से टेस्ट मैच के बीच में ही कप्तानी व डेविड वॉर्नर से उप-कप्तानी छीन ली गई और टिम पैन को कार्यवाहक कप्तान नियुक्त किया गया। इसका असर यह रहा कि प्रोटियाज टीम ने तीसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को भारी अंतर से हराकर चार मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली है।
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हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को आईसीसी ने जो सजा दी है, उससे टीम इंडिया के अनुभवी ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह खुश नहीं हैं। उन्होंने एक ट्वीट के जरिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को आड़े हाथों लिया है।

भज्जी ने ICC को इस तरह किया क्लीन बोल्ड

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स्टीव स्मिथ

भज्जी ने आईसीसी पर तंज कसते हुए ट्वीट किया, 'वाह आईसीसी। अद्भुत फैसला और गजब की निष्पक्षता दिखाई। सारे सबूत बैनक्रॉफ्ट के खिलाफ होने के बावजूद उस पर कोई बैन नहीं लगाया गया। 2001 में तो हमारे छह खिलाड़ियों के खिलाफ कोई सबूत न होने के बावजूद ज्यादा अपील करने पर बैन लगाया था। और 2008 का सिडनी टेस्ट याद है? गलती नहीं पाई गई, फिर भी तीन मैचों के लिए बैन लगाया। आपके पास अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग नियम हैं।'





बता दें कि बॉल टेंपरिंग विवाद पर आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डेविड रिचर्डसन ने कहा, 'ऑस्ट्रेलियाई टीम के नेतृत्व समूह द्वारा ऐसा आचरण खेल भावना के विपरीत है और गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। कप्तान होने के नाते स्टीव स्मिथ अपने खिलाड़ियों की हरकत के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं और उन्हें निलंबित करना सही होगा।'

उन्होंने आगे कहा, 'खेल के नियमों पर सख्त रूप से अमल किए जाने की जरूरत है। पिछले कुछ सप्ताह में हमें भद्दी छींटाकशी, अंपायरों के फैसले पर विरोध, वॉकऑफ, गेंद से छेड़खानी और मैदान के बाहर औसत बर्ताव के वाकये देखने को मिले।'

जब बेनक्रॉफ्ट की चीटिंग कैमरे में हुई कैद

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कैमरन बेनक्रॉफ्ट

याद हो कि कि बेनक्रॉफ्ट ने गेंद को एक तरफ से खुरदरा करने के लिए सैंडपेपर का इस्तेमाल किया था , ताकि गेंदबाजों को स्विंग मिले। यह घटना विवादित इसलिए हुई क्योंकि मैदानी अंपायरों ने बेनक्रॉफ्ट से पूछताछ की तो उन्होंने अपनी जेब से एक काला कपड़ा निकालकर दिखाया। इसके बाद एक वीडियो स्क्रीन पर दिखाया गया, जिसमें दिखा कि बेनक्रॉफ्ट ने एक पीले रंग का टेप अपने अंतःवस्त्र में छिपा दिया।

दिन का खेल खत्म होने के बाद बेनक्रॉफ्ट ने कप्तान स्मिथ के साथ मिलकर प्रेस कांफ्रेंस में अपनी गलती स्वीकार की। इसके साथ ही स्मिथ ने स्वीकार किया कि उन्हें भी गेंद के साथ छेड़खानी करने की जानकारी थी और आगे से ऐसी गलती कभी नहीं दोहराई जाएगी। इस घटना से क्रिकेट फैंस को भी गहरा झटका लगा है और स्मिथ, बेनक्रॉफ्ट व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की जमकर आलोचना हो रही है।

आईसीसी का पक्षपात रवैया- 2001 का विवाद

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सचिन तेंदुलकर

भज्जी ने 2001 के विवाद का जिक्र अपने ट्वीट में किया। याद हो कि उस समय टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका दौरे पर थी। 16 से 20 नवंबर के बीच हुए टेस्ट मैच में टीम इंडिया के 6 खिलाड़ियों को मैच में ज्यादा अपील करने की वजह से बैन झेलना पड़ा था। यह फैसला इंग्लैंड के मैच रेफरी माइक डेनेस ने लिया था। 

इसमें सचिन तेंदुलकर को बॉल टेंपरिंग के लिए 1 मैच का सस्पेंशन, वीरेंद्र सहवाग को अत्यधिक अपील के लिए 1 मैच का बैन, तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली को अपने खिलाड़ियों का व्यवहार नियंत्रित न कर पाने के लिए एक टेस्ट और दो वन-डे मैच का निलंबन, हरभजन सिंह, शिव सुंदर और दीप दासगुप्ता को अत्यधिक अपील के लिए 1 मैच का सस्पेंशन झेलना पड़ा था। इस पर काफी बवाल हुआ, जिसके बाद सहवाग को छोड़ शेष खिलाड़ियों की सजा हटा ली गई थी। 

बीसीसीआई और क्रिकेट साउथ अफ्रीका के विरोध के बाद अगले मैच में डेनेस को स्टेडियम में नहीं घुसने दिया गया था। इसके बाद आईसीसी ने अगले टेस्ट मैच को दोस्ताना मैच घोषित कर दिया था। सहवाग को एक मैच का बैन झेलना पड़ा था।

2008- मंकीगेट विवाद

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हरभजन सिंह - फोटो : ndtv

जनवरी 2008 में भारत के ऑस्ट्रेलिया टूर के दौरान हरभजन सिंह और एंड्रयू साइमंड्स के बीच 'मंकीगेट' विवाद हुआ था। सिडनी टेस्ट के दौरान साइमंड्स ने भज्जी पर नस्ली टिप्पणी का आरोप लगाया था। 

इसके लिए हरभजन पर लेवल 3 के चार्ज लगाए गए। उन्हें तीन टेस्ट मैचों के लिए बैन किया गया और मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना भी लगाया गया। बीसीसीआई के विरोध और सचिन तेंदुलकर की गवाही के बाद जज हेनसन ने हरभजन पर लगा बैन हटा लिया था। बाद में साइमंड्स को अपना आरोप वापस लेना पड़ा था।

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