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मरकर फिर जिंदा हुए 'लिटिल मास्टर', डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था

Thu, 11 Aug 2016 07:40 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 11 Aug 2016 07:40 PM IST
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Hanif Mohammad survives after losing heartbeat for six minutes
- फोटो : Getty

इसे चमत्कार कहें या कुदरत का करिश्मा कि पाकिस्तान क्रिकेट के लिटिल मास्टर कहे जाने वाले पूर्व बल्लेबाज हनीफ मोहम्मद को पहले डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, लेकिन 6 मिनट बाद वह फिर से जिंदा हो उठे।

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अस्पताल की ओर से उनके निधन की सूचना टीवी चैनलों को दे दी गई और इस दुखद खबर को पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर चला दिया गया। क्रिकेट जगत में शोक की लहर फैल गई। लेकिन इसके कुछ ही मिनट बाद हनीफ के दिल ने फिर से धड़कना शुरू कर दिया।
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इस घटना के बाद वहां मौजूद डॉक्टरों और उनके परिजनों के चेहरों पर खुशियां लौट आईं। कुछ ही मिनट बाद टीवी चैनलों पर हनीफ के जिंदा होने की खबर चलाई जाने लगी। यह सुनते ही लोगों ने अल्लाह का शुक्रिया किया और कहा कि अल्लाह ने उन्हें दूसरी जिंदगी दी है। यह उनके लाखों प्रशंसकों और समर्थकों की दुआओं का असर है।
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81 वर्षीय हनीफ कैंसर की वजह से कई दिनों से यहां आगा खान अस्पताल में भर्ती थे और शरीर के कई अंग फेल हो जाने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। बृहस्पतिवार सुबह डॉक्टरों ने उन्हें ‘क्लीनिकल’ मृत घोषित कर दिया था, लेकिन इसके छह मिनट बाद ही उनके दिल की धड़कन वापस आ गई।

लेकिन अब पाक अखबार द डान की रिपोर्ट के अनुसार, हनीफ का शाम को देहांत हो गया।


 

लारा ने हनीफ का तोड़ा था एक पारी में 499 रन बनाने का रिकॉर्ड

Hanif Mohammad survives after losing heartbeat for six minutes
हनीफ मोहम्मद - फोटो : Getty
पाक क्रिकेट के पहले महान बल्लेबाज हनीफ 1954-55 में भारत दौरे पर आई पाक टीम के सदस्य भी रहे। उन्होंने 1952 में इसी दौरे के दौरान दिल्ली में भारत के खिलाफ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी।

पाकिस्तान के लिए 55 टेस्ट खेल चुके हनीफ 2013 से गले के कैंसर से पीड़ित हैं और लंदन में सर्जरी कराकर वह घर लौटे थे। उन्होंने 1957-58 में वेस्टइंडीज के खिलाफ 337 रनों की बड़ी पारी खेली थी। वह टेस्ट में तिहरा शतक लगाने वाले एशिया के पहले बल्लेबाज बने थे। उन्हें पाक क्रिकेट का लिटिल मास्टर कहा जाता है। 

उनकी 337 रनों की यह पारी करीब 40 सालों तक एशिया में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सबसे बड़ी पारी के रूप में शुमार रही। हनीफ के बाद 1997 में सनत जयसूर्या ने भारत के खिलाफ 340 रनों की पारी खेलकर इस रिकॉर्ड को तोड़ा था।

साथ ही हनीफ ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 499 रनों की सबसे बड़ी पारी खेली जिसे बाद में वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा ने नाबाद 501 रनों की पारी खेलकर नया इतिहास बनाया था।

81 साल की उम्र में हनीफ को मिला दूसरा 'जन्म'

Hanif Mohammad survives after losing heartbeat for six minutes

हनीफ मोहम्मद के बेटे शोएब मोहम्मद ने अस्पताल से अपने पिता की मौत की सूचना विभिन्न टीवी चैनलों को दे दी कि शरीर के विभिन्न अंग फेल होने की वजह से उनके पिता का निधन हो गया है। लेकिन कुछ ही मिनट बाद उन्होंने टीवी चैनल को यह सूचना दी कि उनके पिता का निधन नहीं हुआ, वह अभी जिंदा हैं।

शोएब ने कहा, "उनके पिता के दिल की धड़कन छह मिनट के लिए बंद हुई थी लेकिन डॉक्टर इसे वापस लाने में सफल रहे। अल्लाह ने उन्हें दूसरा जन्म दिया है और मेरा मानना है कि यह उनके प्रशंसकों और समर्थकों की दुआओं का असर है।"

शोएब ने कहा कि जब वह अस्पताल जा रहे थे तब उनके एक रिश्तेदार ने उन्हें सूचित किया कि उनके पिता का निधन हो गया है। यह खबर सुनते ही वह रोने लगे लेकिन जब मैं अस्पताल पहुंचा तो मुझे बताया गया कि उनके दिल की धड़कन सिर्फ छह मिनट के लिए बंद हुई थी लेकिन डॉक्टर उसे वापस लाने में सफल रहे। इस तरह से 81 साल की उम्र में हनीफ को यह दूसरा 'जन्म' मिला है।

अस्पताल के प्रवक्ता ने मेडिकल बुलेटिन जारी कर कहा कि हनीफ जिंदा हैं और उन्हें बेहतर इलाज मुहैया कराई जा रही है। सांस की तकलीफ होने की वजह से हनीफ को 30 जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह वेंटिलेटर पर हैं। लेकिन शाम होते-होते हनीफ का निधन हो गया। 

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