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कीवियों के खिलाफ चमके गुरनूर बराड़: रोहित और कोहली को दिया श्रेय, बताया किस गेंदबाज से सीखे गुर
Sat, 07 Nov 2026 08:34 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, वेलिंग्टन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, वेलिंग्टन
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Sat, 07 Nov 2026 08:34 PM IST
सार
भारतीय तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ ने न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे वनडे में 30 रन देकर चार विकेट लेकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में गेंदबाजी की सही लाइन और लेंथ समझने के लिए उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली से सलाह ली थी। उमेश यादव और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल से भी उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला।
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गुरनूर बराड़
- फोटो : BCCI
विस्तार
न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारतीय तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ का प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। सीरीज के दूसरे वनडे में करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 30 रन देकर चार विकेट लेने वाले गुरनूर ने अपनी सफलता के पीछे कड़ी मेहनत, सीनियर खिलाड़ियों की सलाह और टीम प्रबंधन के भरोसे को अहम बताया है। उन्होंने खुलासा किया कि न्यूजीलैंड में अभ्यास के दौरान उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली से यहां की परिस्थितियों में गेंदबाजी के लिए सही लाइन और लेंथ को लेकर सलाह ली थी। इसके अलावा कप्तान शुभमन गिल और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल से मिली मदद ने भी उनके प्रदर्शन को निखारने में भूमिका निभाई।
गुरनूर ने शनिवार को हेनरी स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में 30 रन देकर चार विकेट हासिल किए। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने न्यूजीलैंड को 134 रन पर समेट दिया और डकवर्थ लुईस पद्धति से चार रन से मुकाबला जीतकर पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली। गुरनूर ने पहले वनडे में भी 44 रन देकर तीन विकेट लिए थे।
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गुरनूर ने शनिवार को हेनरी स्टेडियम में खेले गए दूसरे वनडे में 30 रन देकर चार विकेट हासिल किए। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने न्यूजीलैंड को 134 रन पर समेट दिया और डकवर्थ लुईस पद्धति से चार रन से मुकाबला जीतकर पांच मैचों की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली। गुरनूर ने पहले वनडे में भी 44 रन देकर तीन विकेट लिए थे।
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गुरनूर बराड़
- फोटो : ANI
रोहित और विराट से ली लाइन-लेंथ की सलाह
गुरनूर ने बताया कि न्यूजीलैंड में मैच सिमुलेशन अभ्यास के दौरान उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली से यहां की पिचों पर गेंदबाजी की रणनीति के बारे में बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ियों के पास काफी अनुभव है और उनकी सलाह से उन्हें अपनी गेंदबाजी को बेहतर समझने में मदद मिली।
गुरनूर के मुताबिक, उन्होंने रोहित और विराट से पूछा कि न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में किस लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करना बल्लेबाजों के लिए अधिक मुश्किल हो सकता है। उन्होंने बताया कि कप्तान शुभमन गिल से भी वह इसी तरह चर्चा करते रहते हैं। एक बल्लेबाज के नजरिए से यह समझने की कोशिश करते हैं कि किस लेंथ पर गेंद डालने से बल्लेबाज को परेशानी हो सकती है।
गुरनूर ने बताया कि न्यूजीलैंड में मैच सिमुलेशन अभ्यास के दौरान उन्होंने रोहित शर्मा और विराट कोहली से यहां की पिचों पर गेंदबाजी की रणनीति के बारे में बातचीत की थी। उन्होंने कहा कि दोनों खिलाड़ियों के पास काफी अनुभव है और उनकी सलाह से उन्हें अपनी गेंदबाजी को बेहतर समझने में मदद मिली।
गुरनूर के मुताबिक, उन्होंने रोहित और विराट से पूछा कि न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में किस लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी करना बल्लेबाजों के लिए अधिक मुश्किल हो सकता है। उन्होंने बताया कि कप्तान शुभमन गिल से भी वह इसी तरह चर्चा करते रहते हैं। एक बल्लेबाज के नजरिए से यह समझने की कोशिश करते हैं कि किस लेंथ पर गेंद डालने से बल्लेबाज को परेशानी हो सकती है।
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लॉर्ड्स और गुवाहाटी की निराशा से सीखा सबक
गुरनूर ने अपने पिछले खराब प्रदर्शनों को भी याद किया। उन्होंने स्वीकार किया कि लॉर्ड्स और गुवाहाटी में खेले गए वनडे मुकाबलों में काफी रन खर्च करना उनके लिए निराशाजनक था। इन मैचों में उन्होंने क्रमशः 97 और 85 रन दिए थे।उन्होंने कहा कि किसी भी गेंदबाज के लिए इतने रन खर्च करना अच्छा अनुभव नहीं होता और शुरुआत में इससे उनका मनोबल भी प्रभावित हुआ था। हालांकि, उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी गलतियों पर विचार किया और यह समझने की कोशिश की कि अगली बार बेहतर प्रदर्शन कैसे किया जा सकता है। गुरनूर के अनुसार, पिछली गलतियों से सीखने की सोच ने उन्हें वापसी करने में काफी मदद की।
गुरनूर ने अपने पिछले खराब प्रदर्शनों को भी याद किया। उन्होंने स्वीकार किया कि लॉर्ड्स और गुवाहाटी में खेले गए वनडे मुकाबलों में काफी रन खर्च करना उनके लिए निराशाजनक था। इन मैचों में उन्होंने क्रमशः 97 और 85 रन दिए थे।उन्होंने कहा कि किसी भी गेंदबाज के लिए इतने रन खर्च करना अच्छा अनुभव नहीं होता और शुरुआत में इससे उनका मनोबल भी प्रभावित हुआ था। हालांकि, उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी गलतियों पर विचार किया और यह समझने की कोशिश की कि अगली बार बेहतर प्रदर्शन कैसे किया जा सकता है। गुरनूर के अनुसार, पिछली गलतियों से सीखने की सोच ने उन्हें वापसी करने में काफी मदद की।
गुरनूर बराड़
- फोटो : ANI
उमेश यादव की सलाह भी आई काम
गुरनूर ने अपनी गेंदबाजी में सुधार का श्रेय पंजाब के अपने साथी और अनुभवी तेज गेंदबाज उमेश यादव को भी दिया। उन्होंने बताया कि रणजी ट्रॉफी के दौरान चंडीगढ़ में उमेश की गेंदबाजी को करीब से देखने और उनसे बातचीत करने का मौका मिला।
उमेश ने उन्हें सलाह दी थी कि गेंदबाज को लगातार एक सही क्षेत्र में गेंदबाजी करनी चाहिए। इसके बाद जरूरत के मुताबिक लेंथ में बदलाव करने से गेंदबाजी अधिक प्रभावी हो सकती है। गुरनूर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भी इसी रणनीति को अपनाया और सही लेंथ पर लगातार गेंद डालने पर ध्यान दिया।
गुरनूर ने अपनी गेंदबाजी में सुधार का श्रेय पंजाब के अपने साथी और अनुभवी तेज गेंदबाज उमेश यादव को भी दिया। उन्होंने बताया कि रणजी ट्रॉफी के दौरान चंडीगढ़ में उमेश की गेंदबाजी को करीब से देखने और उनसे बातचीत करने का मौका मिला।
उमेश ने उन्हें सलाह दी थी कि गेंदबाज को लगातार एक सही क्षेत्र में गेंदबाजी करनी चाहिए। इसके बाद जरूरत के मुताबिक लेंथ में बदलाव करने से गेंदबाजी अधिक प्रभावी हो सकती है। गुरनूर ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भी इसी रणनीति को अपनाया और सही लेंथ पर लगातार गेंद डालने पर ध्यान दिया।
गिल के भरोसे से गेंदबाजों को मिली खुलकर खेलने की आजादी
गुरनूर ने कप्तान शुभमन गिल की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि गिल खिलाड़ियों को सिर्फ उनके प्रदर्शन के आंकड़ों से नहीं आंकते, बल्कि यह देखते हैं कि खिलाड़ी कितनी मेहनत कर रहा है और खुद को बेहतर बनाने के लिए किस दिशा में प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल काफी अच्छा है और हर खिलाड़ी को कप्तान का पूरा समर्थन मिल रहा है। भारत में सपाट पिचों पर गेंदबाजी करते समय भी गिल ने गेंदबाजों का हौसला बढ़ाया था। न्यूजीलैंड दौरे पर भी उनका संदेश यही है कि गेंदबाज अपनी ताकत पर भरोसा करें और बिना किसी डर के गेंदबाजी करें। गेंद पर चौका या छक्का लगने के बावजूद उन्हें अपनी योजना से पीछे नहीं हटना चाहिए।
गुरनूर ने कप्तान शुभमन गिल की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि गिल खिलाड़ियों को सिर्फ उनके प्रदर्शन के आंकड़ों से नहीं आंकते, बल्कि यह देखते हैं कि खिलाड़ी कितनी मेहनत कर रहा है और खुद को बेहतर बनाने के लिए किस दिशा में प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम का माहौल काफी अच्छा है और हर खिलाड़ी को कप्तान का पूरा समर्थन मिल रहा है। भारत में सपाट पिचों पर गेंदबाजी करते समय भी गिल ने गेंदबाजों का हौसला बढ़ाया था। न्यूजीलैंड दौरे पर भी उनका संदेश यही है कि गेंदबाज अपनी ताकत पर भरोसा करें और बिना किसी डर के गेंदबाजी करें। गेंद पर चौका या छक्का लगने के बावजूद उन्हें अपनी योजना से पीछे नहीं हटना चाहिए।
गुरनूर बराड़
- फोटो : ANI
मोर्ने मोर्केल से सीख रहे गेंदबाजी की बारीकियां
गुरनूर ने गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल को भी अपनी प्रगति में अहम बताया। उन्होंने कहा कि उनकी और मोर्कल की लंबाई तथा गेंदबाजी शैली में काफी समानता है। ऐसे में मोर्केल उन्हें अलग-अलग पिचों के हिसाब से सही लेंथ और गेंदबाजी की रणनीति समझाते रहते हैं।
गुरनूर ने बताया कि न्यूजीलैंड की पिचों पर तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी सही लेंथ पर गेंदबाजी करना जरूरी है। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ पिछली सीरीज का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बल्लेबाजों का दबदबा था, जबकि न्यूजीलैंड में गेंदबाजों को भी अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिल रहा है।
बाउंसर का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक करना जरूरी
दूसरे वनडे में गुरनूर ने अपनी उछाल और बाउंसर से न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खासा परेशान किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह अपनी बाउंसर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहते। उनका मानना है कि पहले बल्लेबाजों को फुल लेंथ और सही लाइन से चुनौती देना जरूरी है। इसके बाद सही समय पर बाउंसर का इस्तेमाल अधिक प्रभावी साबित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ गेंदबाजी करते समय उनका पूरा ध्यान अपनी स्वाभाविक लेंथ पर था। साथ ही मैदान के आकार और बाउंड्री की लंबाई को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया।
गुरनूर ने गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्केल को भी अपनी प्रगति में अहम बताया। उन्होंने कहा कि उनकी और मोर्कल की लंबाई तथा गेंदबाजी शैली में काफी समानता है। ऐसे में मोर्केल उन्हें अलग-अलग पिचों के हिसाब से सही लेंथ और गेंदबाजी की रणनीति समझाते रहते हैं।
गुरनूर ने बताया कि न्यूजीलैंड की पिचों पर तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी सही लेंथ पर गेंदबाजी करना जरूरी है। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ पिछली सीरीज का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बल्लेबाजों का दबदबा था, जबकि न्यूजीलैंड में गेंदबाजों को भी अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिल रहा है।
बाउंसर का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक करना जरूरी
दूसरे वनडे में गुरनूर ने अपनी उछाल और बाउंसर से न्यूजीलैंड के बल्लेबाजों को खासा परेशान किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह अपनी बाउंसर का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहते। उनका मानना है कि पहले बल्लेबाजों को फुल लेंथ और सही लाइन से चुनौती देना जरूरी है। इसके बाद सही समय पर बाउंसर का इस्तेमाल अधिक प्रभावी साबित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड के खिलाफ गेंदबाजी करते समय उनका पूरा ध्यान अपनी स्वाभाविक लेंथ पर था। साथ ही मैदान के आकार और बाउंड्री की लंबाई को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया।
2027 विश्व कप जीतना अंतिम लक्ष्य
गुरनूर ने कहा कि 2027 में होने वाला वनडे विश्व कप टीम का बड़ा लक्ष्य है, लेकिन फिलहाल वह एक मैच के हिसाब से अपनी तैयारी करना चाहते हैं। उनका मानना है कि हर मुकाबले में अपनी गलतियों को कम करना और लगातार बेहतर होना सबसे जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विश्व कप जीतना अंतिम लक्ष्य जरूर है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उनका ध्यान इस बात पर है कि अगले मैच में वह अपनी गेंदबाजी को कैसे और बेहतर बना सकते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार दो मैचों में प्रभावशाली प्रदर्शन कर गुरनूर ने भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण में अपनी उपयोगिता साबित की है।
गुरनूर ने कहा कि 2027 में होने वाला वनडे विश्व कप टीम का बड़ा लक्ष्य है, लेकिन फिलहाल वह एक मैच के हिसाब से अपनी तैयारी करना चाहते हैं। उनका मानना है कि हर मुकाबले में अपनी गलतियों को कम करना और लगातार बेहतर होना सबसे जरूरी है।
उन्होंने कहा कि विश्व कप जीतना अंतिम लक्ष्य जरूर है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर उनका ध्यान इस बात पर है कि अगले मैच में वह अपनी गेंदबाजी को कैसे और बेहतर बना सकते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ लगातार दो मैचों में प्रभावशाली प्रदर्शन कर गुरनूर ने भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण में अपनी उपयोगिता साबित की है।