फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Cricket ›   Cricket News ›   Dhoni flop as mentore was unable to remove pressure and make planning

मेंटर धोनी फ्लॉप: बड़े मैचों में खिलाड़ियों का दबाव नहीं कम कर सके धोनी, टीम के खेल में कोई रणनीति भी नहीं दिखी

Mon, 01 Nov 2021 05:51 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: शक्तिराज सिंह Updated Mon, 01 Nov 2021 05:51 PM IST
सार

टी-20 वर्ल्डकप 2021 में धोनी को मेंटर बनाए जाने के बाद सभी को उम्मीद थी कि धोनी कमाल की रणनीति बनाएंगे और अपनी टीम को विजेता बनाएंगे। साथ ही खिलाड़ियों का दबाव भी कम होगा, लेकिन भारत के दोनों मैचों में ऐसा कुछ नहीं दिखा है। 

विज्ञापन
Dhoni flop as mentore was unable to remove pressure and make planning
मेंटर के रूप में धोनी कुछ खास नहीं कर पाए हैं। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

न्यूजीलैंड के खिलाफ हार के बाद टी-20 वर्ल्डकप में भारतीय टीम का सफर लगभग खत्म हो चुका है। अब भारत के सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदें किस्मत के भरोसे हैं। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले भारत को यह ट्रॉफी जीतने का प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन यह दावेदारी सिर्फ दो मैचों के बाद ही खत्म हो चुकी है। इस वर्ल्डकप में पूर्व भारतीय कप्तान महेंन्द्र सिंह धोनी को टीम इंडिया का मेंटर बनाया गया था और उम्मीद की जा रही थी, कि धोनी की रणनीति की बदौलत भारत हर मैच में जीत हासिल करेगा और चैंपियन बनेगा, लेकिन दो बड़े मैचों में ऐसा नहीं दिखा है। 
विज्ञापन


भारत ने अब तक इस टूर्नामेंट में दो मैच खेले हैं और दोनों मैच बड़े अंतर हारा है। किसी भी मैच में ऐसा नहीं लगा कि भारत यह मैच जीत सकता है। शुरुआत से ही विपक्षी टीमों ने भारत पर दबाव बनाया है और टीम इंडिया इससे उबर नहीं पाई है। इस दौरान किसी भी मैच में धोनी का असर भी भारतीय खिलाड़ियों पर नहीं दिखा है और न ही कप्तान कोहली के फैसले ऐसे थे, जिनमें धोनी का प्रभाव दिखा हो।
विज्ञापन


टीम चयन पर उठे सवाल
पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में भारत की प्लेइंग इलेवन पर सवाल खड़े किए गए। धोनी ने अपनी कप्तानी में फिटनेस पर जोर दिया था और उन्हीं खिलाड़ियों को टीम में शामिल करते थे, जो पूरी तरह से फिट रहते थे। विराट की सोच भी ऐसी ही थी, लेकिन भुवनेश्वर कुमार और हार्दिक पांड्या को भारतीय टीम में मौका दिया गया। ये दोनों खिलाड़ी पूरी तरह से फिट नहीं नजर आए थे। इन्हें खिलाने का फैसला किसका था और इस पर धोनी-कोहली ने आपत्ति क्यों नहीं जताई यह बात समझ से परे है। वहीं धोनी एक मैच के बाद टीम बदलने में यकीन नहीं रखते थे। ऐसे में पाकिस्तान के खिलाफ हार के बाद भुवनेश्वक को क्यों टीम से बाहर कर दिया गया। यह बात भी समझ से परे है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके अलावा न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में रोहित की बजाय ईशान किशन से पारी की शुरुआत करवाना और पावरप्ले में जडेजा से गेंदबाजी कराने का फैसला चौकाने वाला था। क्या धोनी और कोहली के बीच ओपनिंग जोड़ी और पावरप्ले के गेंदबाजों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। अगर ऐसा है तो धोनी मेंटर के रूप में कर क्या रहे हैं। वहीं यदि कोहली उनकी बात ही नहीं सुन रहे तो धोनी को मेंटर बनाया क्यों गया। 

दोनों मैचों में दबाव में दिखी टीम
धोनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो दबाव सोखने में माहिर हैं। एक खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने कई बार मुश्किल हालातों में सूझबूझ से बल्लेबाजी की है और टीम को जिताया है। इस वर्ल्डकप में उन्हें मेंटर बनाए जाने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि बड़े मैचों में खिलाड़ियों का दबाव कम होगा और युवा खिलाड़ी खुलकर अपना स्वाभाविक खेल खेलेंगे। मैच में इसका ठीक उल्टा दिखाई दिया। युवा खिलाड़ियों के साथ रोहित और विराट जैसे खिलाड़ी दबाव में दिखे और कभी भी टीम इंडिया खुलकर नहीं खेल सकी। 

हार्दिक को रोकने का फैसला गलत
वर्ल्डकप के दौरान टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक खबर में लिखा था कि धोनी की वजह से हार्दिक भारतीय टीम में बने हुए हैं। चयनकर्ता उनकी खराब फॉर्म और फिटनेस की समस्या के बाद उन्हें भारत भेजना चाहते थे, लेकिन धोनी ने कहा कि हार्दिक टीम के एकमात्र फिनिशर हैं और उनका खेलना जरूरी है। इसी वजह से पांड्या दोनों मैच खेले और भारत की हार में अहम योगदान दिया। धोनी का यह फैसला भी टीम पर उल्टा पड़ा है। 

बिना तैयारी के उतरी टीम इंडिया
पाकिस्तान के खिलाफ जिस तरह भारतीय बल्लेबाज शाहीन अफरीदी और न्यूजीलैंड के खिलाफ ईश सोढ़ी का शिकार बने, उससे तो यही लगता है कि टीम इंडिया बिना किसी तैयारी के मैच खेलने उतर रही है। पहले ऐसा नहीं होता था। भारत मोहम्मद इरफान और बाकी खिलाड़ियों के लिए खास तौर पर प्रैक्टिस करता था और बल्लेबाज उनकी पिटाई भी करते थे। इसके वीडियो भी सामने आते थे। इस बार ऐसे वीडियो नहीं सामने आए। रवि शास्त्री के बाद धोनी के टीम में जुड़ने से भारत की तैयारी बेहतर होनी थी, लेकिन नतीजे इसके विपरीत तस्वीर दिखाते हैं। अगर भारतीय टीम बिना तैयारी के उतर रही है तो धोनी और शास्त्री क्या कर रहे हैं। 


खिलाड़ियों के दिमाग में कोई रणनीति ही नहीं थी
यूएई की पिचें बहुत हद तक भारतीय पिचों की तरह हैं। जहां स्पिन गेंदबाज और विविधता के साथ गेंदबाजी करने वाले गेंदबाजों को सफलता मिलती है। ऐसे हालातों में भारतीय खिलाड़ियों को खेलने की आदत होती है। खासकर विराट और रोहित जैसे बल्लेबाजों को इन पिचों पर रन बनाना बखूबी आता है, लेकिन इस वर्ल्डकप में ये अनुभवी खिलाड़ी संभलकर खेलने की बजाय बेतुके शॉट खेलकर आउट हुए। विराट का स्वाभाविक खेल इसके विपरीत है। राहुल भी आईपीएल में संभलकर बल्लेबाजी करते हैं और बाद में बड़े शॉट लगाते हैं। वर्ल्डकप में उनका भी खेल इसके उलट रहा है। इसकी वजह क्या है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जब राहुल और किशन खराब शॉट खेलकर आउट हो रहे थे, तब विराट के संभलकर खेलने की नसीहत क्यों नहीं दी गई। धोनी क्या कर रहे थे यह बड़ा सवाल है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें क्रिकेट समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। क्रिकेट जगत की अन्य खबरें जैसे क्रिकेट मैच लाइव स्कोरकार्ड, टीम और प्लेयर्स की आईसीसी रैंकिंग आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed