फिर से संकट में कोटला, BCCI ने छीनी मैच की मेजबानी
फिरोजशाह कोटला के लिए संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है और कोर्ट से मंजूरी प्रमाण पत्र नहीं मिलने से बीसीसीआई ने दिल्ली से एक मैच की मेजबानी छीन ली है। कोटला में 12 फरवरी को श्रीलंका-भारत के बीच टी-20 क्रिकेट मैच का आयोजन नहीं होगा। हाईकोर्ट ने डीडीसीए को मैच के लिए प्रोविजनल सर्टिफिकेट देने से इंकार कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि डीडीसीए को सभी संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेकर कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेना होगा, तभी स्टेडियम में मैच कराने की इजाजत दी जाएगी। अदालत के कड़े रवैये को देख डीडीसीए ने याचिका वापस ले ली।
डीडीसीए की ओर से मंजूरी के प्रमाण पत्र नहीं भेजे जाने के चलते बीसीसीआई ने इस मैच को अब दिल्ली की बजाय रांची में कराने का फैसला लिया है। इसके साथ ही इस स्टेडियम में टी-20 वर्ल्ड कप के होने वाले चार मुकाबलों पर संकेट के बादल मंडराने लगे हैं। 31 मार्च तक डीडीसीए ने मंजूरी को लेकर विवाद नहीं सुलझाए तो वर्ल्ड कप के मुकाबले भी उनके हाथ से जा सकते हैं।
31 जनवरी तक का समय, वरना जाएंगे वर्ल्ड कप के 4 मैच
सूत्रों के मुताबिक बीसीसीआई ने वर्ल्ड कप मुकाबलों के आयोजन को लेकर डीडीसीए को 31 जनवरी शाम पांच बजे तक की मोहलत दी है।
अगर इस दौरान तक डीडीसीए मैच के आयोजन के लिए जरूरी मंजूरी के प्रमाण पत्रों को बोर्ड को भेजता है तभी कोटला में वर्ल्ड कप के चार मुकाबले हो सकेंगे। वरना इन्हें भी दूसरे आयोजन स्थलों पर शिफ्ट कर दिया जाएगा। 30 और 31 जनवरी को शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के चलते डीडीसीए के लिए इन प्रमाण पत्रों को जुटाना आसान नहीं होगा।
न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर व न्यायमूर्ति विभू बाखरू की खंडपीठ ने डीडीसीए के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने के लिए 31 मार्च 2016 तक का समय मिला हुआ है, मैच फरवरी में होना है।
खंडपीठ ने कहा कि इसी अदालत की खंडपीठ ने 18 नवंबर 2015 को उसे भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट मैच करवाने के लिए सशर्त प्रोविजनल सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया था। खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि इसके बाद कभी भी डीडीसीए को प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रदान नहीं किया जाएगा और उसे स्टेडियम में हर हाल में 31 मार्च 2016 तक पूरा कामकाज करवाना होगा।
कीर्ति आजाद के साथ डीडीसीए के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले पूर्व भारतीय कप्तान बिशन सिंह बेदी ने अदालत के इस फैसले के बाद मांग की है कि डीडीसीए को अब सरकारी प्रशासक के हवाले कर देना चाहिए। खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2011 से डीडीसीए कंप्लीशन सर्टिफिकेट लेने की अपेक्षा हर बार मैच करवाने के लिए अंतिम समय में प्रोविजनल सर्टिफिकेट के लिए याचिका दायर कर देती है।
स्टेडियम में सभी काम पूरा कर दिल्ली शहरी कला आयोग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भूमि और विकास कार्यालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेकर साउथ एमसीडी से कंप्लीशन सर्टिफिकेट क्यों नहीं लेते। वहीं, एमसीडी ने भी कहा कि अधिनियम में कहीं भी प्रोविजनल सर्टिफिकेट का प्रावधान नहीं है।