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भूल दोहराना विजय को पड़ जाता महंगा
मोहाली/ब्यूरो
Updated Mon, 18 Mar 2013 12:45 AM IST
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रणजी ट्रॉफी में उनके नाम कोई बड़ा स्कोर नहीं था। बावजूद इसके उनकी प्रतिभा देख चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा किया।
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उन्हें गौतम गंभीर की जगह टीम में शामिल किया गया।
दरअसल ऑफ स्टंप के बाहर ललचाती गेंदों पर स्ट्रोक लगाने की आदत विजय को महंगी पड़ रही थी।
ईरानी ट्रॉफी में जब वह खेले तो उन्होंने फैसला कर लिया था कि अब सिर्फ विकेट पर टिकेंगे, ऑफ स्टंप से बाहर छेड़छाड़ नहीं करेंगे।
चेन्नई में दूसरी पारी में उन्होंने फिर यही गलती की। भला हो कप्तान धोनी का जो उन्होंने विजय को हैदराबाद टेस्ट के लिए बरकरार रखा।
विजय ने इसके बाद अब तक यह गलती नहीं दोहराई है। नतीजा लगातार दो शतकों के रूप में सामने है।
विजय ने 153 रनों की पारी खेलने के बाद खुलासा किया कि चेन्नई टेस्ट की दूसरी पारी में वह जिस तरह से आउट हुए उससे वह बुरी तरह आहत थे।
हालांकि वह अपने खेलने के तरीके पर पहले ही काम शुरू कर चुके थे। उनका एकमात्र लक्ष्य विकेट पर अपने को बनाए रखना था। इसमें उन्हें सफलता मिली है।
हालांकि वह जानते हैं कि वह स्ट्रोक खेल सकते हैं लेकिन वर्तमान में यह उनके खेल को प्रभावित कर रहा है। यही वजह है कि उन्होंने रन काफी धीमे बनाए हैं।
विजय का उनका उपनाम मांक दूसरे कारणों से मिला है लेकिन इसके विपरीत उन्होंने अपनी बल्लेबाजी को बिलकुल शांत अंदाज में ढाल लिया है। दरअसल शिखर और विजय की सफलता चयनकर्ताओं के लिए राहत भरा कदम है।
दक्षिण अफ्रीका दौरे के लिए इन दोनों की सफलता ने अब तक सबसे सफल भारतीय ओपनिंग जोड़ी सहवाग और गंभीर के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
विजय को अपना पहला टेस्ट 2008 में नागपुर में गौतम गंभीर पर प्रतिबंध लगने के चलते खेलने को मिला। 33 और 41 रनों की अच्छी पारियां खेलने के बावजूद वह बाहर थे।
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अगली बार उन्हें फिर गंभीर की बहन की शादी होने के चलते खेलने को मिला। उन्होंने मुंबई में श्रीलंका के खिलाफ 87 रनों की पारी भी खेली लेकिन सहवाग के 293 रनों के आगे यह बेकार साबित हुई।
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