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Bengaluru Stampede: बंगलूरू भगदड़ मामले में RCB-KSCA पर होगी कार्रवाई, कर्नाटक मंत्रिमंडल ने लिया बड़ा फैसला
Thu, 24 Jul 2025 04:57 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 24 Jul 2025 04:57 PM IST
सार
कर्नाटक के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल ने बैठक के बाद बताया कि मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय किया कि वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत का जश्न मनाने में शामिल निजी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी।
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बंगलूरू में भगदड़
- फोटो : PTI
विस्तार
कर्नाटक मंत्रिमंडल ने चिन्नास्वामी स्टेडियम के निकट हुई भगदड़ की घटना पर न्यायमूर्ति जॉन माइकल डी कुन्हा की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। स्टेडियम में चार जून को हुई भगदड़ की घटना में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हो गए थे।
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निजी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई होगी
कर्नाटक के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल ने बैठक के बाद बताया कि मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय किया कि वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत का जश्न मनाने में शामिल निजी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी। उन्होंने कहा, 'मंत्रिमंडल ने न्यायमूर्ति जॉन माइकल डी कुन्हा की रिपोर्ट को स्वीकार करने और उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय किया है।'
कर्नाटक के कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल ने बैठक के बाद बताया कि मंत्रिमंडल ने यह भी निर्णय किया कि वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत का जश्न मनाने में शामिल निजी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगी। उन्होंने कहा, 'मंत्रिमंडल ने न्यायमूर्ति जॉन माइकल डी कुन्हा की रिपोर्ट को स्वीकार करने और उसके आधार पर कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय किया है।'
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आरसीबी-केएससीए के खिलाफ कार्रवाई
उन्होंने कहा कि कानूनी कार्रवाई निजी संघों, आरसीबी, कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) और डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स जैसी कंपनियों के खिलाफ की जाएगी। मंत्री ने कहा कि जहां तक अधिकारियों का सवाल है, विभागीय जांच शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि भगदड़ और लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनका नाम न्यायमूर्ति डी कुन्हा की रिपोर्ट में दर्ज है।
उन्होंने कहा कि कानूनी कार्रवाई निजी संघों, आरसीबी, कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) और डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क्स जैसी कंपनियों के खिलाफ की जाएगी। मंत्री ने कहा कि जहां तक अधिकारियों का सवाल है, विभागीय जांच शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि भगदड़ और लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनका नाम न्यायमूर्ति डी कुन्हा की रिपोर्ट में दर्ज है।
चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर हुई थी भगदड़
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने इस हादसे के एक दिन बाद पांच जून को न्यायिक जांच का आदेश दिया था। भगदड़ के बाद बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद और अतिरिक्त आयुक्त (पश्चिम) विकास कुमार विकास को निलंबित कर दिया गया था। यह घटना आरसीबी फ्रेंचाइजी द्वारा आईपीएल में अपने सफल अभियान के बाद आयोजित विजय परेड के दौरान हुई थी। स्टेडियम के बाहर भारी भीड़ एकत्र हो गई थी, जिससे भगदड़ मच गई।
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने इस हादसे के एक दिन बाद पांच जून को न्यायिक जांच का आदेश दिया था। भगदड़ के बाद बेंगलुरु पुलिस आयुक्त बी दयानंद और अतिरिक्त आयुक्त (पश्चिम) विकास कुमार विकास को निलंबित कर दिया गया था। यह घटना आरसीबी फ्रेंचाइजी द्वारा आईपीएल में अपने सफल अभियान के बाद आयोजित विजय परेड के दौरान हुई थी। स्टेडियम के बाहर भारी भीड़ एकत्र हो गई थी, जिससे भगदड़ मच गई।
जांच आयोग ने इन्हें जिम्मेदार ठहराया
भगदड़ की जांच कर रहे एक सदस्यीय आयोग ने इस घटना के लिए आयोजकों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों दोनों को जिम्मेदार ठहराया है। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति माइकल डी’कुन्हा वाले आयोग ने 11 जुलाई को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को दो खंडों वाली रिपोर्ट सौंपी। कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल द्वारा साझा की गई इस रिपोर्ट में आयोजन के आयोजकों- रॉयल चैलेंजर्स स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (आरसीएसपीएल), डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क और केएससीए पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि अनिवार्य मंजूरी न होने के बावजूद आयोजन की अनुमति देकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी इसमें शामिल थे।
भगदड़ की जांच कर रहे एक सदस्यीय आयोग ने इस घटना के लिए आयोजकों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों दोनों को जिम्मेदार ठहराया है। उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति माइकल डी’कुन्हा वाले आयोग ने 11 जुलाई को मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को दो खंडों वाली रिपोर्ट सौंपी। कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच के पाटिल द्वारा साझा की गई इस रिपोर्ट में आयोजन के आयोजकों- रॉयल चैलेंजर्स स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (आरसीएसपीएल), डीएनए एंटरटेनमेंट नेटवर्क और केएससीए पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि अनिवार्य मंजूरी न होने के बावजूद आयोजन की अनुमति देकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी इसमें शामिल थे।
'सात दिन पहले अनुमति प्राप्त करने में विफल रहे आयोजक'
रिपोर्ट में कहा गया है, 'आयोजकों का यह कर्तव्य था कि वे कम से कम सात दिन पहले निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत करके पूर्व अनुमति प्राप्त करते…लेकिन वे ऐसा करने में विफल रहे।' आयोग ने तत्कालीन पुलिस आयुक्त बी दयानमदा, अतिरिक्त आयुक्त (पश्चिम) विकास कुमार विकास, पुलिस उपायुक्त सेंट्रल डिवीजन शेखर एच टेक्कनवर, कब्बन पार्क सहायक पुलिस आयुक्त सी बालकृष्ण और पुलिस निरीक्षक गिरीश ए के का नाम लेते हुए कहा है कि वे ‘यह जानते हुए भी कि यह आयोजन अनधिकृत था और यह कार्यक्रम बिना उचित सुरक्षा व्यवस्था के जल्दबाजी में आयोजित किया गया, इस कार्यक्रम को रोकने में विफल रहे।’
रिपोर्ट में कहा गया है, 'आयोजकों का यह कर्तव्य था कि वे कम से कम सात दिन पहले निर्धारित प्रारूप में आवेदन प्रस्तुत करके पूर्व अनुमति प्राप्त करते…लेकिन वे ऐसा करने में विफल रहे।' आयोग ने तत्कालीन पुलिस आयुक्त बी दयानमदा, अतिरिक्त आयुक्त (पश्चिम) विकास कुमार विकास, पुलिस उपायुक्त सेंट्रल डिवीजन शेखर एच टेक्कनवर, कब्बन पार्क सहायक पुलिस आयुक्त सी बालकृष्ण और पुलिस निरीक्षक गिरीश ए के का नाम लेते हुए कहा है कि वे ‘यह जानते हुए भी कि यह आयोजन अनधिकृत था और यह कार्यक्रम बिना उचित सुरक्षा व्यवस्था के जल्दबाजी में आयोजित किया गया, इस कार्यक्रम को रोकने में विफल रहे।’
कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया
आयोग की रिपोर्ट में अवैज्ञानिक बैरिकेडिंग, संकीर्ण प्रवेश द्वार, पुलिस कर्मियों की कम तैनाती और बुनियादी आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया तंत्र का अभाव समेत कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया है, जिनके कारण यह घटना हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोजन स्थल के पास कोई आपातकालीन चिकित्सा केंद्र या आपातकालीन चिकित्सा केंद्र स्थापित नहीं किया गया था। इसके अलावा, रिपोर्ट में आयोजकों पर असंगत और भ्रामक घोषणाएं करने का आरोप लगाया गया, जिससे भीड़ में अफरातफरी मच गई। आयोजकों ने प्रवेश द्वार के बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए, जिससे भीड़ अनियंत्रित रूप से उमड़ पड़ी। बैरिकेड भी खराब तरीके से लगाए गए थे, जिससे खतरनाक अड़चनें पैदा हुईं।
आयोग की रिपोर्ट में अवैज्ञानिक बैरिकेडिंग, संकीर्ण प्रवेश द्वार, पुलिस कर्मियों की कम तैनाती और बुनियादी आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया तंत्र का अभाव समेत कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया है, जिनके कारण यह घटना हुई। रिपोर्ट में कहा गया है कि आयोजन स्थल के पास कोई आपातकालीन चिकित्सा केंद्र या आपातकालीन चिकित्सा केंद्र स्थापित नहीं किया गया था। इसके अलावा, रिपोर्ट में आयोजकों पर असंगत और भ्रामक घोषणाएं करने का आरोप लगाया गया, जिससे भीड़ में अफरातफरी मच गई। आयोजकों ने प्रवेश द्वार के बारे में कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए, जिससे भीड़ अनियंत्रित रूप से उमड़ पड़ी। बैरिकेड भी खराब तरीके से लगाए गए थे, जिससे खतरनाक अड़चनें पैदा हुईं।