{"_id":"b2f8e9c9aab2ec11250ce475aa17309e","slug":"bcci-proprosed-ravi-shastri-in-panel-bihar-opposed","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"BCCI को फिर से झटका, अब रवि शास्त्री के नाम का विरोध","category":{"title":"Cricket News","title_hn":"क्रिकेट न्यूज़","slug":"cricket-news"}}
BCCI को फिर से झटका, अब रवि शास्त्री के नाम का विरोध
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 21 Apr 2014 03:26 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच को बीसीसीआई की ओर से गठित की गई तीन सदस्यीय कमेटी के गठित होते ही उस पर अंगुलियां उठनी शुरू हो गई हैं।
इस कमेटी पर सबसे पहले सवालिया निशान लगाने का काम किसी और ने नहीं बल्कि खुद इस मामले के याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने किया है।
वर्मा ने साफ कर दिया है कि बोर्ड की ओर से गठित यह कमेटी उन्हें स्वीकार नहीं है। उनकी ओर से सर्वोच्च अदालत में इस मामले की सीबीआई या एनआईए से जांच की मांग रखी जाएगी।
विज्ञापन
इस कमेटी पर सबसे पहले सवालिया निशान लगाने का काम किसी और ने नहीं बल्कि खुद इस मामले के याचिकाकर्ता आदित्य वर्मा ने किया है।
वर्मा ने साफ कर दिया है कि बोर्ड की ओर से गठित यह कमेटी उन्हें स्वीकार नहीं है। उनकी ओर से सर्वोच्च अदालत में इस मामले की सीबीआई या एनआईए से जांच की मांग रखी जाएगी।
BCCI के वैतनिक कर्मचारी हैं रवि शास्त्री
आदित्य वर्मा ने इस कमेटी में रखे गए एकमात्र क्रिकेटर रवि शास्त्री के नाम पर एतराज जताया है।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सेक्रेटरी जनरल वर्मा का कहना है कि उन्हें कमेटी में शामिल किए गए माननीय दो सेवानिवृत्त जजों की नियुक्त पर कोई एतराज नहीं है लेकिन शास्त्री लंबे समय से बीसीसीआई के वैतनिक कर्मचारी हैं।
साथ ही आईपीएल-6 में स्पॉट फिक्सिंग और भ्रष्टाचार का मामला आने के कुछ दिनों बाद तक शास्त्री लगातार श्रीनिवासन चालीसा का गुणगान करने में व्यस्त रहे।
क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार के सेक्रेटरी जनरल वर्मा का कहना है कि उन्हें कमेटी में शामिल किए गए माननीय दो सेवानिवृत्त जजों की नियुक्त पर कोई एतराज नहीं है लेकिन शास्त्री लंबे समय से बीसीसीआई के वैतनिक कर्मचारी हैं।
साथ ही आईपीएल-6 में स्पॉट फिक्सिंग और भ्रष्टाचार का मामला आने के कुछ दिनों बाद तक शास्त्री लगातार श्रीनिवासन चालीसा का गुणगान करने में व्यस्त रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
CBI या NIA से कराई जाए जांच
आदित्य के अनुसार, ऐसे में उन्हें इस पूर्व क्रिकेटर से किसी तरह की उम्मीद नहीं है। आदित्य वर्मा साफ करते हैं कि जिस तरह उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की गई जस्टिस मुकुल मुद्गल कमेटी बीसीसीआई को स्वीकार नहीं है ठीक उसी तरह उन्हें भी बोर्ड की यह तीन सदस्यीय कमेटी स्वीकार नहीं है।
22 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान वह अपने वकील के जरिए अदालत के समक्ष इस कमेटी का विरोध करेंगे।
साथ ही मांग करेंगे कि किसी तरह आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच बोर्ड के जरिए नहीं बल्कि सीबीआई या एनआईए से कराई जाए। इसके बाद ही बोर्ड की साफ सुथरी छवि लोगों के सामने निखर कर आएगी।
22 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान वह अपने वकील के जरिए अदालत के समक्ष इस कमेटी का विरोध करेंगे।
साथ ही मांग करेंगे कि किसी तरह आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच बोर्ड के जरिए नहीं बल्कि सीबीआई या एनआईए से कराई जाए। इसके बाद ही बोर्ड की साफ सुथरी छवि लोगों के सामने निखर कर आएगी।
बोर्ड के साथ रवि शास्त्री का है लंबा करार
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई से एक तीन सदस्यीय पैनल गठित करने के लिए कहा था जो मुद्गल समिति की रिपोर्ट की जांच कर सके। रविवार को बीसीसीआई ने एक आपात बैठक बुलाई थी जहां शास्त्री के अलावा सीबीआई के पूर्व प्रमुख आर राघवन और कोलकाता उच्च न्यायालय के पूर्व प्रमुख न्यायाधीश जेएन पटेल के नाम प्रस्तावित किए गए।
इस बैठक में बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष शशांक मनोहर भी मौजूद थे और उन्होंने शास्त्री के नाम का विरोध किया था। बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार मनोहर ने शास्त्री के नाम का इसलिए विरोध किया था क्योंकि उनका बोर्ड के साथ एक कमेंटेटर के तौर पर अनुबंध है।
वहीं बोर्ड के कुछ सदस्य शास्त्री का नाम पैनल में इसलिए चाहते थे क्योंकि वह आचार कमेटी के सदस्य भी हैं। शास्त्री के अलावा शिवलाल यादव के नाम पर भी विचार किया गया लेकिन चूंकि वह बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं इसलिए उन्होंने यह जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। इनके अलावा अन्य किसी क्रिकेटर के नाम पर चर्चा नहीं की गई।
इस बैठक में बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष शशांक मनोहर भी मौजूद थे और उन्होंने शास्त्री के नाम का विरोध किया था। बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार मनोहर ने शास्त्री के नाम का इसलिए विरोध किया था क्योंकि उनका बोर्ड के साथ एक कमेंटेटर के तौर पर अनुबंध है।
वहीं बोर्ड के कुछ सदस्य शास्त्री का नाम पैनल में इसलिए चाहते थे क्योंकि वह आचार कमेटी के सदस्य भी हैं। शास्त्री के अलावा शिवलाल यादव के नाम पर भी विचार किया गया लेकिन चूंकि वह बोर्ड के उपाध्यक्ष हैं इसलिए उन्होंने यह जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। इनके अलावा अन्य किसी क्रिकेटर के नाम पर चर्चा नहीं की गई।