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कोहली ने सचिन से नहीं लिया सबक: ओवल में भी विकेट के पीछे दिया कैच, तेंदुलकर 17 साल पहले जूझे थे ऑफ साइड की गेंदों पर
Thu, 02 Sep 2021 08:30 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लीड्स
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लीड्स
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 02 Sep 2021 08:30 PM IST
सार
इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा सीरीज में विराट कोहली छह पारियों में विकेटकीपर को या स्लिप में कैच थमा बैठे। हाल ही में सुनील गावस्कर ने उन्हें सचिन तेंदुलकर की 2003 में सिडनी में खेली गई पारी से सीख लेने की सलाह दी थी।
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सचिन तेंदुलकर (बाएं) और विराट कोहली।
- फोटो : Social Media
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विस्तार
टीम इंडिया का मध्यक्रम पिछले काफी समय से खराब फॉर्म से जूझ रहा है। इनमें क्रिकेट प्रशंसकों के लिए सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात कप्तान विराट कोहली का फॉर्म से बाहर होना है। दरअसल, कोहली ने पिछले 21 महीनों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक नहीं लगाया। वहीं, इंग्लैंड में जारी टेस्ट सीरीज में भी उनका बल्ला लगातार शांत है। कोहली चौथे टेस्ट की पहली पारी में 50 रन बनाकर विकेट के पीछे कैच थमा बैठे, जबकि इससे पहले पांच पारियों में भी ऑफ साइड की गेंदों को कवर पर खेलने के दौरान स्लिप में या विकेटकीपर के हाथों कैच हुए।
जिस समस्या से विराट कोहली फिलहाल जूझ रहे हैं, 2003-04 में उसी समस्या से टीम इंडिया के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भी परेशान थे। दरअसल, तेंदुलकर उस दौरान लगातार ऑफ साइड की गेंदों को कवर में खेलने की कोशिश में थे। इसके चलते दूसरे टेस्ट की पहली पारी में वह गिलक्रिस्ट को कैच थमा बैठे।
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ऑस्ट्रेलिया ने पकड़ ली थी तेंदुलकर की कमजोरी
इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने तेंदुलकर की इस कमजोरी को तुरंत पकड़ा और उन्हें ऑफ साइड पर लंबी गेंद फेंकनी शुरू कर दी। तीसरे टेस्ट तक तो तेंदुलकर मजबूरन पैर निकालकर कवर ड्राइव खेल कर आउट होते रहे। तेज गेंदें उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट के दस्तानों में समाती रहीं। दोनों ही पारियों में तेंदुलकर विकेट के पीछे लपके गए। तीन मैचों में उनके खाते में सिर्फ 88 रन ही जुड़ पाए थे। अपनी पांच पारियों में वह दो बार शून्य के स्कोर पर आउट हुए। ऐसे में बार-बार एक ही तरह आउट होने के बाद सचिन ने अपनी तकनीक में एक बड़ा बदलाव किया और अगले ही मैच में उनके बल्ले से दोहरा शतक निकला।
क्या था तेंदुलकर की तकनीक में बदलाव?
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने हाल ही में विराट कोहली को सलाह दी थी कि इंग्लैंड के खिलाफ वह जो गलती कर रहे हैं, उससे पार पाने के लिए वह 2003-04 की सचिन तेंदुलकर की तकनीक से मदद लें। उन्होंने कहा कि जो सचिन ने सिडनी में किया, कोहली को भी वही करना चाहिए। विकेट के पीछे आउट होने से बचने की अपनी तकनीक का खुद सचिन ने भी हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर 2003 में उन्होंने मैदान में उतरते ही फैसला कर लिया था कि पारी में वो ऑफ की तरफ आती गेंदों पर कवर ड्राइव नहीं लगाएंगे।
सचिन ने 436 गेंदें खेलीं, एक भी कवर ड्राइव नहीं लगाया
तेंदुलकर ने बताया था- "जब मैंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने आउट होने के तरीकों पर अपने भाई से बात की, तो उन्होंने कहा कि तुम्हारी बल्लेबाजी में कोई कमजोरी नहीं, सिर्फ शॉट सेलेक्शन में दिक्कत है।"
सचिन के मुताबिक, इस सलाह के बाद उन्होंने गेंदबाजों के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए अनुशासन को हथियार बनाया। टेस्ट मैच में सचिन को भाई की तरफ से नॉट आउट रहने की चुनौती मिली और इसके बाद सचिन ने पवेलियन लौटने से बचने के लिए कवर ड्राइव ही नहीं खेला। अपनी 241 रन की शानदार पारी के लिए सचिन ने 436 गेंदें खेली थीं।
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जिस समस्या से विराट कोहली फिलहाल जूझ रहे हैं, 2003-04 में उसी समस्या से टीम इंडिया के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भी परेशान थे। दरअसल, तेंदुलकर उस दौरान लगातार ऑफ साइड की गेंदों को कवर में खेलने की कोशिश में थे। इसके चलते दूसरे टेस्ट की पहली पारी में वह गिलक्रिस्ट को कैच थमा बैठे।
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ऑस्ट्रेलिया ने पकड़ ली थी तेंदुलकर की कमजोरी
इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने तेंदुलकर की इस कमजोरी को तुरंत पकड़ा और उन्हें ऑफ साइड पर लंबी गेंद फेंकनी शुरू कर दी। तीसरे टेस्ट तक तो तेंदुलकर मजबूरन पैर निकालकर कवर ड्राइव खेल कर आउट होते रहे। तेज गेंदें उनके बल्ले का किनारा लेकर विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट के दस्तानों में समाती रहीं। दोनों ही पारियों में तेंदुलकर विकेट के पीछे लपके गए। तीन मैचों में उनके खाते में सिर्फ 88 रन ही जुड़ पाए थे। अपनी पांच पारियों में वह दो बार शून्य के स्कोर पर आउट हुए। ऐसे में बार-बार एक ही तरह आउट होने के बाद सचिन ने अपनी तकनीक में एक बड़ा बदलाव किया और अगले ही मैच में उनके बल्ले से दोहरा शतक निकला।
क्या था तेंदुलकर की तकनीक में बदलाव?
भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने हाल ही में विराट कोहली को सलाह दी थी कि इंग्लैंड के खिलाफ वह जो गलती कर रहे हैं, उससे पार पाने के लिए वह 2003-04 की सचिन तेंदुलकर की तकनीक से मदद लें। उन्होंने कहा कि जो सचिन ने सिडनी में किया, कोहली को भी वही करना चाहिए। विकेट के पीछे आउट होने से बचने की अपनी तकनीक का खुद सचिन ने भी हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर 2003 में उन्होंने मैदान में उतरते ही फैसला कर लिया था कि पारी में वो ऑफ की तरफ आती गेंदों पर कवर ड्राइव नहीं लगाएंगे।
सचिन ने 436 गेंदें खेलीं, एक भी कवर ड्राइव नहीं लगाया
तेंदुलकर ने बताया था- "जब मैंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने आउट होने के तरीकों पर अपने भाई से बात की, तो उन्होंने कहा कि तुम्हारी बल्लेबाजी में कोई कमजोरी नहीं, सिर्फ शॉट सेलेक्शन में दिक्कत है।"
सचिन के मुताबिक, इस सलाह के बाद उन्होंने गेंदबाजों के खिलाफ मोर्चा लेने के लिए अनुशासन को हथियार बनाया। टेस्ट मैच में सचिन को भाई की तरफ से नॉट आउट रहने की चुनौती मिली और इसके बाद सचिन ने पवेलियन लौटने से बचने के लिए कवर ड्राइव ही नहीं खेला। अपनी 241 रन की शानदार पारी के लिए सचिन ने 436 गेंदें खेली थीं।