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AFG vs NZ: मैदान ढंकने के लिए किया शामियाने का इस्तेमाल, डीडीसीए से उधार लिया कवर; फिर भी नहीं शुरू हो सका मैच

Tue, 10 Sep 2024 08:34 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Tue, 10 Sep 2024 08:34 PM IST
सार

बीसीसीआई ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) को कानपुर, बेंगलुरु और ग्रेटर नोएडा के विकल्प दिए थे। एसीबी ने लॉजिस्टिक कारणों से ग्रेटर नोएडा को चुना।

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Afghanistan-New Zealand test match interupted by wet outfield used tarpaulin to protect outfield super sopper
अफगानिस्तान बनाम न्यूजीलैंड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच ग्रेटर नोएडा में हो रहा एकमात्र टेस्ट मैच दूसरे दिन भी नहीं शुरू हो सका। तमाम प्रयास के बावजूद खेल शुरू करने के लिए मैदान के तैयार नहीं होने से काफी किरकरी का सामना करना पड़ रहा है। शहीद विजय सिंह पथिक खेल परिसर में लगातार दूसरे दिन एक भी गेंद नहीं फेंकी जा सकी जिससे इस स्टेडियम पर प्रश्नचिन्ह लगे हैं। इस मैच में अब तक टॉस भी नहीं हो सका है। 
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आसमान साफ होने के बावजूद नहीं शुरू हो पाया खेल
सोमवार को भले ही थोड़ी बारिश हुई, लेकिन मंगलवार बारिश नहीं होने के बावजूद खेल शुरू नहीं हो पाया। मैदानकर्मियों ने मैदान सुखाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन मैदान को खेलने लायक नहीं बना सके। मैदान को सुखाने के लिए कई तरीके के प्रयोग किए गए जिसमें शामियाने का इस्तेमाल और इलेक्ट्रिक पंखे शामिल थे। इसके अलावा दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) से ग्राउंड कवर और उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ (यूपीसीए) से सुपर सोपर भी उधार लिया गया। मैदानकर्मी अभ्यास परिसर से सूखी घास लाकर मिड आन और मिडविकेट क्षेत्र में लगाने की कोशिश कर रहे थे। ऑफ साइड में तीन टेबल फैन भी लगाए गए जिससे उसे सुखाया जा सके। स्टेडियम अधिकारियों के अनुसार मैदान में पांच सुपर सोपर लगाए गए लेकिन काम नहीं बना।
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कुशल मैदानकर्मी नहीं होने पर मजदूरों से लिया गया काम 
सूत्रों की माने तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने यूपीसीए से दो सुपर सोपर मांगे थे जो मेरठ स्टेडियम से भेजे गए। दिन में विवाह में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक शामियाने का इस्तेमाल आउटफील्ड ढंकने के लिए किया गया और शाम को बरसाती लगाई गई। कोटला से डीडीसीए अधिकारियों ने आउटफील्ड कवर भेजे। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के पास कुशल मैदानकर्मी भी नहीं थे जिसकी वजह से मजदूरों को काम पर लगाया गया।
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बीसीसीआई ने दिए थे तीन विकल्प 
बीसीसीआई ने अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) को कानपुर, बेंगलुरु और ग्रेटर नोएडा के विकल्प दिए थे। एसीबी ने लॉजिस्टिक कारणों से ग्रेटर नोएडा को चुना। एसीबी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैनेजर मिन्हाज राज ने कहा, यह हमेशा से अफगानिस्तान का घरेलू मैदान रहा है। हम 2016 से यहां खेल रहे हैं। बारिश के कारण यह सब हुआ। हमने यहां स्थानीय टीम के खिलाफ तीन वनडे मैच भी खेला है जिसमें कोई दिक्कत नहीं हुई थी। 

सुविधाओं के अभाव पर भड़का एसीबी
स्टेडियम में सुविधाओं के अभाव पर एसीबी ने भी कड़ी रुख अख्तियार किया है। एसीबी के एक अधिकारी ने कहा, यह बहुत बड़ी गड़बड़ी है, हम यहां कभी वापस नहीं आएंगे। यहां की सुविधाओं से खिलाड़ी भी नाखुश हैं। हमने संबंधित लोगों से पहले ही बात कर ली थी और स्टेडियम के लोगों ने हमें आश्वासन दिया था कि सब कुछ सही होगा।
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