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Breaking: बीसीसीआई को बड़ी राहत! केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा- RTI के दायरे में नहीं आता क्रिकेट बोर्ड

Mon, 18 May 2026 02:01 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Mon, 18 May 2026 02:01 PM IST
सार

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बीसीसीआई को आरटीआई कानून के दायरे से बाहर रखा है। आयोग ने कहा कि बीसीसीआई न तो सरकारी संस्था है और न ही उसे सरकार से पर्याप्त फंडिंग मिलती है। इस फैसले के बाद बोर्ड पर सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी देने की बाध्यता नहीं रहेगी।

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CIC Rules BCCI Is Not A Public Authority Under RTI Act, Reverses 2018 Decision
बीसीसीआई - फोटो : BCCI

विस्तार

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई को सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' नहीं माना जा सकता। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सोमवार को यह बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि बीसीसीआई न तो सरकार के स्वामित्व में है, न ही उसके नियंत्रण में और न ही उसे सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलती है।
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क्या है पूरा मामला?
यह विवाद साल 2018 में शुरू हुआ था, जब तत्कालीन सूचना आयुक्त एम. श्रीधर आचार्युलु ने बीसीसीआई को आरटीआई एक्ट की धारा 2(h) के तहत पब्लिक अथॉरिटी घोषित किया था। उस फैसले में बोर्ड को पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (PIO) नियुक्त करने का निर्देश भी दिया गया था। हालांकि बीसीसीआई ने इस आदेश को मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी। बाद में अदालत ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए केंद्रीय सूचना आयोग के पास भेज दिया। अब सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने नया फैसला सुनाते हुए कहा है कि बीसीसीआई आरटीआई कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में नहीं आता।

सीआईसी ने खारिज की अपील
यह मामला एक अपील से जुड़ा था, जिसमें पूछा गया था कि बीसीसीआई किस प्रावधान और अधिकार के तहत भारत का प्रतिनिधित्व करता है और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ियों का चयन करता है। हालांकि केंद्रीय सूचना आयोग ने इस अपील को खारिज कर दिया।
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'निजी और स्वायत्त संस्था है BCCI'
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीसीसीआई तमिलनाडु सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत एक निजी और स्वायत्त संस्था है। इसे न तो संविधान के तहत बनाया गया है, न संसद या राज्य विधानसभा के किसी कानून के जरिए और न ही किसी सरकारी अधिसूचना से इसकी स्थापना हुई है। सूचना आयुक्त पी.आर. रमेश ने अपने आदेश में कहा, 'बीसीसीआई को RTI एक्ट की धारा 2(h) के तहत पब्लिक अथॉरिटी नहीं माना जा सकता। इसलिए मौजूदा मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में आरटीआई कानून के प्रावधान इस पर लागू नहीं होते।'
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सरकार का नियंत्रण या फंडिंग नहीं
केंद्रीय सूचना आयोग ने साफ कहा कि बीसीसीआई पर सरकार का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है और यह संस्था आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर है। यही वजह है कि इसे आरटीआई कानून के दायरे में नहीं लाया जा सकता। इस फैसले के बाद बीसीसीआई पर सूचना के अधिकार कानून के तहत जानकारी देने की बाध्यता नहीं रहेगी। यह फैसला भारतीय क्रिकेट प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे बीसीसीआई की स्वायत्तता और मजबूत होगी। वहीं दूसरी ओर, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो सकती है।
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